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'जनता जैसे समझे, बात से समझे या हथियार से समझे':सीवान में SP के बॉडीगार्ड सिपाही उपेंद्र राणा सस्पेंड




25 जुलाई को सीवान में हुए छात्र प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया पर डाले गए एक वीडियो ने अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीवान एसपी पूरन कुमार झा के बॉडीगार्ड के रूप में कार्बाइन के साथ तैनात सिपाही उपेंद्र राणा का एक वीडियो छात्र प्रदर्शन के बाद तेजी से वायरल हुआ, जिसमें वह हेलमेट और बॉडी प्रोटेक्टर पहनकर हाथ में 9 एमएम कार्बाइन लिए नजर आ रहा है। वीडियो में वह कहता सुनाई देता है कि 25 जुलाई को प्रदर्शन है और वह पूरी तैयारी के साथ ड्यूटी पर तैनात है। वायरल वीडियो में सिपाही यह भी कहता है कि उसके पास गोली, बम-बारूद और 9 एमएम कार्बाइन मशीनगन है तथा “जनता जैसे समझे, बात से समझे या हथियार से समझे, समझाना तो पड़ेगा ही। अपने दायरे में रहकर काम करो, ऐसा कुछ मत करो कि सरकारी संपत्ति को नुकसान हो और मुझे हथियार उठाने के बाद फायर भी करना पड़े।” इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और सवाल उठाया कि क्या पुलिस प्रदर्शन से पहले ही बल प्रयोग और फायरिंग की मानसिकता बनाकर बैठी थी। मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब छात्र प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस जवान द्वारा एके-47 से फायरिंग का वीडियो भी वायरल हुआ। दोनों वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि प्रदर्शन से एक दिन पहले ही इस तरह के बयान सोशल मीडिया पर दिए जा रहे थे तो क्या प्रशासन पहले से ही कठोर कार्रवाई की तैयारी में था। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने संबंधित सिपाही के खिलाफ कार्रवाई की मांग शुरू कर दी। हालांकि इस पूरे मामले में अब तक पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस महकमे की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, वीडियो वायरल होने और बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए सिपाही उपेंद्र राणा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही जिस सोशल मीडिया अकाउंट से यह वीडियो साझा किया गया था, उसे भी निष्क्रिय करा दिया गया है। हालांकि विभागीय स्तर पर इस कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

अब यह मामला केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर रहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने वाले पुलिसकर्मियों का सार्वजनिक आचरण और सोशल मीडिया पर उनके संदेश कितने जिम्मेदार और मर्यादित होने चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की निष्पक्षता, संयम और जवाबदेही पर नई बहस छेड़ दी है।



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