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कैमूर जिले के छह सरकारी अस्पतालों में स्त्री रोग विशेषज्ञों और महिला चिकित्सकों की भारी कमी के कारण ग्रामीण महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले के नुआंव, रामगढ़, रामपुर, चांद और दुर्गावती सहित कई प्रखंड स्तरीय अस्पतालों में एक भी महिला डॉक्टर तैनात नहीं है, जिससे महिलाओं को इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। पुरुष चिकित्सकों के सामने बताने में झिझक स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल पहुंचने वाली कई महिलाएं पुरुष चिकित्सकों के सामने अपनी स्त्री रोग संबंधी या अन्य निजी स्वास्थ्य समस्याएं खुलकर नहीं बता पाती हैं। इस संकोच के कारण कई मामलों में बीमारी का समय पर इलाज नहीं हो पाता और स्थिति गंभीर हो जाती है। गर्भवती महिलाओं के लिए बढ़ी चिंता महिला चिकित्सकों की कमी का सबसे अधिक असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। अधिकांश मामलों में प्रसव एएनएम के भरोसे कराया जाता है। यदि प्रसव के दौरान कोई जटिलता उत्पन्न होती है, तो मरीजों को भभुआ सदर अस्पताल या अनुमंडल अस्पताल रेफर करना पड़ता है, जिससे रास्ते में मां और शिशु दोनों की जान को खतरा बना रहता है। 7.79 लाख महिलाओं पर केवल नौ महिला डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में लगभग 7.79 लाख महिलाओं की आबादी पर केवल नौ महिला चिकित्सक कार्यरत हैं। इनमें भी सिर्फ एक स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं, जिससे विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में कठिनाई हो रही है। हर साल 26 हजार से अधिक प्रसव जिले के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में हर वर्ष औसतन 26 हजार से अधिक प्रसव कराए जाते हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञ महिला चिकित्सकों की कमी स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। विभाग को भेजा गया है प्रस्ताव सिविल सर्जन ने बताया कि उपलब्ध संसाधनों के अनुसार मरीजों का इलाज किया जा रहा है। साथ ही विशेषज्ञ महिला चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजा गया है। विभाग से स्वीकृति मिलने के बाद रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
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कैमूर के 6 सरकारी अस्पतालों में महिला डॉक्टर नहीं:7.79 लाख महिलाओं पर सिर्फ 9 डॉक्टर, गर्भवतियों की बढ़ी परेशानी, विभाग को भेजा प्रस्ताव
