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मेरी बेटी सुसाइड नहीं कर सकती, डिप्रेशन में नहीं थी':केके यूनिवर्सिटी में छात्रा की संदिग्ध मौत, पिता बोले- अफवाह फैलाई जा रही, पढ़ाई में बहुत तेज थी




‘मेरी बेटी सुसाइड नहीं कर सकती है। वो डिप्रेशन में नहीं थी। घटना के एक दिन पहले मां और भाई-बहन से वीडियो कॉल पर बात की थी। बहुत खुश थी। कहीं से भी तनाव में नहीं आ रही थी। उसने किसी विवाद या टेंशन का कोई जिक्र भी नहीं किया था।’ ये कहना है महक के पिता रामू रजक का। दरअसल, बुधवार नालंदा जिले के दीपनगर थाना क्षेत्र स्थित केके यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में एग्रीकल्चर की छात्रा महक कुमारी(20) की संदिग्ध हालत में मौत हो गई। शव हॉस्टल के कमरे में मिला था। विश्वविद्यालय प्रशासन और सोशल मीडिया पर जहां इसे मानसिक तनाव और अवसाद के चलते उठाया गया आत्मघाती कदम बताया जा रहा है। वहीं मृतका के पिता ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। सहरसा जिले के नया बाजार निवासी रामू रजक ने पुलिस प्रशासन को दिए लिखित आवेदन में इसे सामान्य आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए हत्या के एंगल से जांच की मांग की है। पिता का दावा: सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाह रामू रजक ने कहा कि उनकी बेटी डिप्रेशन में नहीं थी। जिस दिन यह दुखद घटना घटी, उससे ठीक एक दिन पहले अपनी मां, पिता, भाई और बहन से वीडियो कॉल पर काफी देर तक खुशहाल माहौल में बातचीत की थी। वह हर रोज रात 8:00 बजे अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद घर पर परिजन से वीडियो कॉल के माध्यम से जुड़ा करती थी। मेरी बेटी 5 अगस्त को घर आई हुई थी। बेहद सकारात्मक माहौल में अपने शैक्षणिक प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही थी। उसके हाव-भाव, बातचीत या व्यवहार में मानसिक तनाव का दूर-दूर तक कोई संकेत नहीं था। रूममेट्स के साथ भी उसका व्यवहार पूरी तरह सामान्य था। 10 तारीफ को वापस हॉस्टल लौट गई थी। घटना से ठीक पहले उसने अन्य छात्राओं के साथ मिलकर जन्मदिन का जश्न भी मनाया था। ऐसे में डिप्रेशन की थ्योरी पूरी तरह से गढ़ी हुई प्रतीत होती है। पढ़ाई के दबाव की बात भी बेबुनियाद अकादमिक दबाव के सवाल पर पिता ने प्रशासन के समक्ष दस्तावेज और मार्कशीट दिखाते हुए बताया कि महक पढ़ाई में काफी होनहार थी। किसी भी सेमेस्टर में उसका स्कोर 7 या 8 एसजीपीए से कम नहीं रहा। वह बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत यहां पढ़ाई कर रही थी। लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही थी। घटनास्थल से मिले नोट्स और पीडीएफ का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पढ़ाई को लेकर आत्म-सुधार की सामान्य इच्छा हर विद्यार्थी में होती है, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं कि कोई बच्चा अपनी जान दे दे। उनके परिवार में बच्चों पर कभी भी 95 प्रतिशत अंक लाने या किसी खास मुकाम को हासिल करने का अनुचित दबाव नहीं बनाया गया। उनकी बड़ी बेटी पटना विश्वविद्यालय में पढ़ रही है और बेटा भी नीट की तैयारी कर रहा है। सभी बच्चे अपनी क्षमता के अनुसार स्वतंत्र रूप से पढ़ाई करते हैं। कॉलेज प्रशासन की घोर अनदेखी और संवेदनहीनता पर उठे सवाल परिजन के अनुसार, घटना के दिन 19 अगस्त को सुबह लगभग 8:15 बजे महक ने अस्वस्थ महसूस होने, अत्यधिक कमजोरी और चक्कर आने की जानकारी अपनी क्लास टीचर को मैसेज के माध्यम से दी थी। क्लास में आने में असमर्थता जताई थी। यह एक गंभीर स्थिति थी, जिसके बाद हॉस्टल वार्डन या किसी स्वास्थ्यकर्मी को तुरंत छात्रा के कमरे में भेजा जाना चाहिए था। लेकिन कॉलेज प्रबंधन की ओर से कोई सुध नहीं ली गई। दोपहर 2:43 बजे शिक्षिका की ओर से केवल यह संक्षिप्त मैसेज भेजा गया कि छुट्टी का आवेदन लेकर आ जाना। इसके बाद शाम 4:07 से 4:15 बजे के आसपास परिवार को सूचना दी गई कि छात्रा की हालत गंभीर है। जब परिजन पावापुरी अस्पताल पहुंचे, तो वहां भी प्रबंधन ने सांत्वना देने के बजाय घटना को सिर्फ पढ़ाई में अच्छी होने की बातें कहकर लीपापोती करने का प्रयास किया। हॉस्टल के खान-पान और प्रबंधन के रवैये पर भी गंभीर आरोप पिता ने विश्वविद्यालय परिसर के हॉस्टल में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने बताया कि हॉस्टल में रहने वाले छात्र-छात्राओं को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब रहती थी और पौष्टिक आहार का अभाव था। जब भी कोई छात्र भोजन की गुणवत्ता या अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर शिकायत करता था, तो प्रबंधन की ओर से उस छात्र को लक्षित करके मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। अस्वस्थ होने के बावजूद समय पर चिकित्सीय सहायता न देना और प्रशासनिक स्तर पर बरती गई घोर लापरवाही पूरे मामले को संदेहास्पद बनाती है। हत्या की धारा में प्राथमिकी दर्ज कर FSL जांच की मांग मृतका के पिता ने दीपनगर थाना में लिखित शिकायत पत्र सौंपते हुए प्राथमिकी दर्ज करने की गुहार लगाई है। दिए गए आवेदन में उल्लेख किया गया है कि परिस्थितियों को देखते हुए यह साधारण आत्महत्या नहीं लगती, बल्कि इसमें किसी अन्य बाहरी तत्व या व्यक्ति की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। पिता ने बिहार सरकार और जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि घटनास्थल का सूक्ष्म वैज्ञानिक निरीक्षण, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, मोबाइल कॉल डिटेल्स, सोशल मीडिया व चैट रिकॉर्ड्स की गहन तकनीकी जांच, एफएसएल टीम द्वारा साक्ष्य संकलन किया जाए। साथ ही हॉस्टल वार्डन, संबंधित शिक्षकों और प्रबंधन से कड़ाई से पूछताछ की जाए ताकि सच सामने आ सके और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके। छानबीन में जुटी पुलिस वहीं, इस मामले में दीपनगर थानाध्यक्ष सुमन कुमार ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ आवेदन प्राप्त हुआ है। पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। जल्द ही पूरे मामले का खुलासा कर दिया जाएगा।



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