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पटना के रिहायशी इलाकों में बड़ी संख्या में मकानों का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। नगर निगम की जांच में ऐसे 26,745 मकानों की पहचान हुई है, उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है। नोटिस पाने वाले मकान मालिकों को अपनी संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और व्यावसायिक गतिविधि को लेकर अपना पक्ष रखने का मौका दिया जा रहा है। अंचल स्तर पर सुनवाई की प्रक्रिया भी चल रही है। आज नूतन राजधानी अंचल में सुनवाई है। बड़ी संख्या में लोग अपने शिकायत लेकर यहां पहुंचे हैं। कुछ लोगों ने कहा कि मेरा G+4 बिल्डिंग है, मगर मुझे G+6 का कमर्शियल टैक्स लिया जा रहा है। वहीं, कुछ लोगों ने कहा कि जो सरकर चुनाव के समय 10 हज़ार रुपये बांटी है उसे ही अब वसूल रही है। टैक्स ही जमा कर रहे, नोटिस देने का क्या मतलब- राजीव कुमार वार्ड-11 के राजीव कुमार ने कहा, ‘दो-तीन दिन पहले मुझे नोटिस आया था। हम लोग पिछले कई सालों से कमर्शियल टैक्स ही जमा कर रहे हैं, तो अभी नोटिस देने का क्या मतलब है। हम लोग अगर कमर्शियल टैक्स जमा कर रहे हैं तो उस कमर्शियल की तरह ही इस्तेमाल करेंगे।’ मेरे घर में कोई भी कमर्शियल एक्टिविटी नहीं- उपेंद्र नाथ वार्ड-4 के उपेंद्र नाथ ने कहा, ‘16 अगस्त को मुझे नोटिस आया था, जबकि हमारे घर में कोई भी कमर्शियल एक्टिविटी नहीं है। मैं अपने परिवार के साथ पटना कॉलेज इलाके में रहता हूं। वहीं, शेखपुरा इलाके में हमारा एक और घर है, जहां नोटिस आया है। यह घर हमेशा बंद ही रहता है। अगल-बगल जहां कमर्शियल एक्टिविटी हो रही है, वहां वहां नोटिस नहीं भेजा गया है।’ मेरा G+4 बिल्डिंग, लेकिन G+6 का कमर्शियल टैक्स लिया – अमित राज अमित राज ने कहा, ‘मेरा घर वार्ड नंबर 18 में है, जो कि G+4 बिल्डिंग है, मगर मुझे G+6 का कमर्शियल टैक्स लिया जा रहा है। नोटिस मिलने के बाद जब मैं टैक्स जमा करने गया और उससे संबंधित डिटेल निकाला, तब इस बात का खुलासा हुआ। प्रॉपर्टी आईडी से तैयार की गई सूची नगर निगम ने आवासीय मकानों के व्यावसायिक इस्तेमाल की जानकारी जुटाने के लिए सबसे पहले प्रॉपर्टी आईडी के आधार पर डिजिटल सूची तैयार की। इसके बाद वार्ड स्तर पर कर्मचारियों ने मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया। जांच में कई ऐसे मकान मिले, जहां आवासीय भवन में अलग-अलग तरह की व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। नगर निगम के मुताबिक, कुछ मकान मालिक पहले से ही व्यावसायिक दर पर टैक्स का भुगतान कर रहे हैं। हालांकि किसी संपत्ति का इस्तेमाल नियमों के मुताबिक वैध है या नहीं, इसका अंतिम फैसला सुनवाई और दस्तावेजों की जांच के बाद किया जाएगा। दुकानों और ऑफिसों की संख्या सबसे ज्यादा रिहायशी परिसरों में सबसे अधिक दुकानें और व्यावसायिक कार्यालय संचालित होते मिले हैं। इसके अलावा पार्किंग, मैरिज हॉल, अस्पताल, हॉस्टल, कोचिंग संस्थान, स्कूल, गोदाम, गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट जैसी गतिविधियां भी चिन्हित की गई हैं। नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, आवासीय इलाकों में 194 गेस्ट हाउस, 154 छोटे उद्योग और 106 होटल संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा 15 कॉलेज, 39 हेल्थ क्लब, 70 नर्सिंग होम और 37 रेस्टोरेंट भी सूची में शामिल हैं। पाटलिपुत्र अंचल में दुकानें और हॉस्टल सबसे ज्यादा अंचलवार आंकड़ों में पाटलिपुत्र अंचल में सबसे अधिक दुकानें और ऑफिस चिन्हित किए गए हैं। यहां 1,820 दुकानें, 420 ऑफिस, 294 पार्किंग स्थल, 69 मैरिज हॉल और 349 हॉस्टल सूचीबद्ध हैं। बांकीपुर अंचल में हॉस्टल की संख्या सबसे अधिक 556 है। नूतन राजधानी अंचल में 1,219 दुकानें, जबकि अजीमाबाद अंचल में 1,019 दुकानें चिन्हित की गई हैं। पटना सिटी अंचल में 670 दुकानें सूची में शामिल हैं। मेयर बोलीं- नोटिस का अध्ययन कर रही हूं शिकायतकर्ताओं ने कहा कि उनके आवास में किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधि नहीं चल रही है और उन्हें अन्य श्रेणी के तहत नोटिस मिला है। इस पर पटना नगर निगम की मेयर सीता साहू ने शिकायतों का अध्ययन कर लिखित जवाब देंने की बात कही है। मेयर ने पहले एसकेपुरी और पाटलिपुत्र कॉलोनी मोड़ पर दुकानों को सील किए जाने और बाद में संबंधित पक्षों को कोर्ट से स्टे मिलने का भी जिक्र किया। EO बोले- आपत्ति पर जांच होगी, फिर आगे कार्रवाई करेंगे नूतन राजधानी अंचल के EO ने कहा, ‘जो लोग यहां आ रहे हैं, उनका अटेंडेंस लिया जा रहा है। उनको नोटिस पर जो आपत्ति है, उस पर आज आवेदन लिया गया है। लोग अपने पूरे डॉक्यूमेंट भी जमा कर रहे हैं। इसके बाद उन्हें एक डेट दी जा रही है। उनके आपत्ति पर जांच होगी और फिर आगे की कार्यवाई की जाएगी।’ रिहायशी जोन में किन गतिविधियों की अनुमति पटना के रेजिडेंशियल जोन-1, रेजिडेंशियल जोन-2 और अर्बन सेंटर जोन में मुख्य रूप से आवासीय गतिविधियों की अनुमति है। यहां मकान, हॉस्टल, बोर्डिंग-लॉजिंग हाउस, नाइट शेल्टर और इंटीग्रेटेड टाउनशिप जैसी गतिविधियां हो सकती हैं। कुछ परिस्थितियों में बैंक और बेकरी-कन्फेक्शनरी जैसी गतिविधियों की भी अनुमति है। कॉलेज जैसी गतिविधियों के लिए निर्धारित शर्तों और विशेष अनुमति की जरूरत हो सकती है। नगर निगम अब नोटिस के जवाब और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई करेगा।
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नोटिस पाने वाले मकान मालिकों की आज हो रही सुनवाई:पटना में पीड़ित बोले- सरकार चुनाव के समय ₹10 हजार बांटी, उसे अब वसूल रही है
