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'मत जाओ, अंदर जहरीली गैस है, नहीं माना बेटा':महिला बोली- जिस कुएं का पानी पिया, उसी ने मांग-कोख उजाड़ी; गयाजी में 4 की मौतों की कहानी




‘मेरे ससुर ने साल 1993 में कुआं खुदवाया था। मेरी शादी हुई तो खाना बनाने से लेकर खेत की सिंचाई तक का पानी उसी कुएं से आता था। मेरा बेटा भी उसी कुएं का पानी पीकर बड़ा हुआ। आज कुएं ने मेरी मांग के साथ-साथ कोख भी उजाड़ दी।’ गयाजी के डोभी प्रखंड के गढ़ करमोनी गांव की 40 साल सुनैना देवी ने रोते बिलखते ये बातें कही। दरअसल, शुक्रवार सुबह करमोनी गांव में कुएं में लगे बोरिंग से पाइप जोड़ने के लिए उतरे सुनैना के पति 45 साल के विजय चौधरी, सुनैना के बेटे 28 साल के विकास चौधरी की मौत हो गई। विजय और विकास चौधरी के साथ-साथ घटनास्थल के पास खेत में काम कर रहे 35 साल के दिलचंद मांझी, 45 साल के चमारी मांझी भी कुएं में उतरे थे। जहरीली गैस की चपेट में आकर उनकी भी मौत हो गई। जानकारी के बाद शेरघाटी SDO, डोभी BDO, CO और शेरघाटी DSP मौके पर पहुंचे। राहत और बचाव कार्य के लिए अग्निशमन विभाग (फायर ब्रिगेड) की टीम को बुलाया गया। ​रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कुएं में मौजूद जहरीली गैस का असर इतना तेज था कि रेस्क्यू में लगे फायर ब्रिगेड के कर्मचारी अजीत कुमार भी बेहोश हो गए। घटना को लेकर मृतक के परिजन और गांव के लोगों ने क्या कहानी बताई? घटना के बाद पुलिस, प्रशासन ने क्या कार्रवाई की? मृतक के परिजन की क्या मांग है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। पहले घटना से जुड़ी 2 तस्वीरें देखिए सबसे पहले पढ़िए घटनास्थल पर क्या हुआ था? सुबह करीब 10 बजे विजय चौधरी, अपने बेटे विकास चौधरी के साथ नाश्ता करने के बाद खेत में पहुंचे थे। विजय चौधरी के खेत में बने 30 फीट गहरे कुएं में बोरिंग लगी थी। बोरिंग से खेत में सिंचाई होती थी। जब सिंचाई का काम पूरा हो जाता था, तब बोरिंग से लगे पाइप को निकाल लिया जाता था। आखिरी बार करीब एक हफ्ते पहले बोरिंग से पाइप जोड़कर खेतों में सिंचाई की गई थी। उस दौरान पाइप निकाल लिया गया था। शुक्रवार को खेत में सिंचाई के लिए पाइप लेकर विजय चौधरी खेत में पहुंचे। उनके साथ उनका बेटा विकास चौधरी भी था। हमेशा की तरह विजय चौधरी रस्सी के सहारे कुएं में पाइप लेकर उतरे, लेकिन काफी देर तक नहीं आए। विकास ने झांककर देखा तो पिता नहीं दिखे। उसने शोर मचाया तो आसपास के खेत में काम कर रहे दिलचंद और चमारी मांझी कुएं के पास पहुंचे। जानकारी के मुताबिक, पहले दिलचंद कुएं में उतरा, लेकिन वो भी बाहर नहीं आया। दिलचंद और विजय चौधरी को देखने के लिए चमारी मांझी नीचे उतरा, लेकिन वो भी बाहर नहीं आया। इतनी देर में कुएं के पास भीड़ लग चुकी थी, विकास लगातार पापा को बचा लो, कहकर रोता जा रहा था। मत जाओ, अंदर जहरीली गैस है.. लोगों ने रोका लेकिन विकास नहीं माना जब तीन लोग बाहर नहीं आए तो आशंका जताई जाने लगी कि कुएं से जहरीली गैस निकली है, जिसकी चपेट में विजय चौधरी, दिलचंद और चमारी मांझी आ चुके हैं। लोगों ने विकास को पकड़कर रखा था। वो बार-बार कुएं में उतरने की जिद कर रहा था। विकास के जिद्दीपन को देख लोगों ने कहा कि नीचे मत जाना, जहरीली गैस निकली होगी, जिसकी चपेट में तीनों लोग आए होंगे, लेकिन विकास नहीं माना और लोगों से खुद को छुड़ाकर कुएं में उतर गया, लेकिन वो भी जहरीली गैस की चपेट में आ गया। विकास चार भाइयों में सबसे बड़ा था। उसके बाद तीन और भाई हैं। गांव के लोगों ने डेढ़ घंटे तक रेस्क्यू अभियान चलाया, तब पुलिस आई गांव के लोगों ने बताया कि घटना के बाद हम लोगों ने करीब डेढ़ घंटे तक रेस्क्यू अभियान चलाया, लेकिन किसी को कुएं से निकाल नहीं पाए। पुलिस को तत्काल सूचना दी गई थी, लेकिन पुलिस की टीम करीब डेढ़ घंटे और फायर ब्रिगेड की टीम करीब 2 घंटे बाद घटनास्थल पर पहुंची, लेकिन तब तक चारों लोगों की मौत हो चुकी थी। गांव के रहने वाले केदार बताते हैं कि खेत में सिंचाई के लिए कुएं में बोरिंग लगी थी। बोरिंग का बोरा खोला गया। इसके बाद कुएं के अंदर से अचानक तीखी गैस निकली। कुछ ही देर में कुएं के भीतर का माहौल जानलेवा हो गया। प्रत्यक्षदर्शी मिथिलेश चौधरी ने बताया कि कुएं में पानी केवल तीन फीट था। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। तत्काल रस्सी और लोहे का कांटा लेकर कुछ लोग कुएं के पास पहुंचे, लेकिन हम लोगों को कोई सफलता नहीं मिली, कोई कुएं के अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। ऑक्सीजन लेकर उतरा फायरकर्मी भी बेहोश होने लगा करीब 2 घंटे बाद पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम का एक कर्मी अजित ने भी कुएं में उतरने की कोशिश की। वो ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर नीचे गया था, लेकिन अंदर जाते ही उसकी हालत बिगड़ने लगी। वो बेहोश होने लगा। उसकी हालत भांप उसे उसके साथियों ने तुरंत ऊपर खींच लिया गया। उसकी कमर में रस्सी बंधी थी। इसलिए उसे तेजी से खींच लिया गया। इस घटना के बाद ग्रामीणों में डर और बढ़ गया। साफ हो गया कि कुएं के अंदर उतरना जानलेवा हो सकता है। इसके बाद ग्रामीणों ने सीधे नीचे उतरने की कोशिश बंद कर दी। एनडीआरएफ की टीम पहुंची, फिर चारों शवों को निकाला गया गांव के लोगों ने बताया कि आखिर में एनडीआरएफ की टीम पहुंची, जिसके बाद चारों शवों को एक-एक कर कुएं से निकाला गया। हालांकि, प्रशासन की देरी की लापरवाही को लेकर गांव के लोगों में नाराजगी दिखी, लेकिन मौके पर मौजूद बीडीओ ने तत्काल ग्रामीणों को समझा बुझाकर शांत करा लिया। वहीं, हादसे के शिकार दिलचन और चमारी मांझी के परिजन ने प्रशासन से मुआवजे की मांगी की और कहा कि हमारे परिवार के एकमात्र कमाने वाले वही थे। परिजन के मुताबिक मजदूरी कर ही दोनों परिवार का खर्च चलता था। अचानक हुई मौत ने परिवारों को बेसहारा कर दिया। चमारी मांझी के भाई चनारिक मांझी ने कहा कि चार लोग पहले ही कुएं में गिरकर बेहोश हो चुके थे। ऐसे में परिवार के लोगों की भी अंदर जाने की हिम्मत नहीं हुई। लेकिन इस हादसे में उनका भाई चला गया। घटनास्थल पर मौजूद पंचायत समिति सदस्य सुरेश यादव के मुताबिक कुआं गांव से करीब एक हजार फीट दूर बधार में है। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को तत्काल पारिवारिक लाभ योजना के तहत 20-20 हजार रुपए की सहायता दी है। अंतिम संस्कार के लिए तीन-तीन हजार रुपए भी दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से आपदा के तहत मिलने वाले मुआवजे का भरोसा भी दिया गया है। भूमिहीन और गरीब परिवारों को चार-चार लाख रुपए मुआवजा देने की बात कही गई है। आवास योजना के तहत जमीन और मकान उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया है। जिस कुएं ने गांव की प्यास बुझाई, उसी ने चार जिंदगी निगल ली गांव के लोगों ने कहा कि जिस कुएं में हमेशा उतरकर पाइप जोड़ा जाता था, उसी कुएं से अचानक जहरीली गैस कैसे निकली, ये समझ से परे है। ग्रामीणों का कहना है कि कुआं पुराना जरूर है, लेकिन उसकी सफाई होती रही है। गुरुवार की शाम तक इसी कुएं से पानी निकाला गया था। ग्रामीणों ने पानी पीया था।



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