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स्वतंत्रता दिवस से दो दिन पहले गरीबों, मजदूरों और किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा के तत्वावधान में औरंगाबाद शहर के गांधी मैदान में दो दिवसीय सामूहिक अनशन-सत्याग्रह शुरू किया गया। गुरुवार से शुरू हुआ ये आंदोलन शुक्रवार तक चलेगा। सत्याग्रह के दौरान संगठन से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गरीबों के मकानों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने, भूमिहीन परिवारों को जमीन उपलब्ध कराने, पलायन रोकने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी देने सहित कई मांगें उठाईं। आंदोलनकारियों ने कहा कि बिहार में बड़ी संख्या में गरीब परिवार वर्षों से सरकारी या अन्य जमीनों पर घर बनाकर रह रहे हैं। लंबे समय से वहां रहने के बावजूद उन्हें आवासीय जमीन का वैध अधिकार नहीं मिल पाया है। दूसरी ओर, विस्थापन और अतिक्रमण हटाने के नाम पर गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाए जाने की कार्रवाई से परिवारों के सामने गंभीर संकट पैदा हो रहा है। वक्ताओं ने सरकार से गरीबों को उजाड़ने के बजाय उन्हें कानूनी अधिकार देने की मांग की। ‘जिस जमीन पर गरीब बसे हैं, उन्हें उसी जगह पर बासगीत पर्चा मिलना चाहिए’ सत्याग्रह में गुड्डू चंद्रवंशी ने कहा कि गरीब वर्षों से जिस जमीन पर बसे हैं, उन्हें उसी स्थान का बासगीत पर्चा मिलना चाहिए। उन्होंने गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई तत्काल बंद करने तथा पीपीएच एक्ट 1947 के तहत पात्र परिवारों को बासगीत पर्चा देने की मांग की। साथ ही सभी भूमिहीन परिवारों को पांच-पांच डिसमिल जमीन उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। पलायन रोकने के लिए गांवों में रोजगार की गारंटी की मांग सत्याग्रह के दौरान बिहार से लगातार हो रहे मजदूरों के पलायन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि गांवों में रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं होने के कारण गरीब और मजदूर परिवारों के लोग रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करने को मजबूर हैं। इससे परिवार बिखर रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की कि पलायन रोकने के लिए गांवों में ही रोजगार के स्थायी और पर्याप्त अवसर पैदा किए जाएं। प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा, सम्मान और रोजगार की गारंटी के लिए प्रभावी कानून बनाने की भी मांग की गई। वक्ताओं ने मनरेगा के तहत पर्याप्त काम उपलब्ध कराने और मजदूरों को उनके श्रम का उचित पारिश्रमिक देने की बात कही। उन्होंने कहा कि गांवों में रोजगार मिलने से न केवल मजदूरों का पलायन रुकेगा, बल्कि ग्रामीण बाजार और स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। मजदूर-किसानों से अतिरिक्त टैक्स वसूली बंद करने की मांग भी आंदोलन के दौरान उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि गरीबों और मजदूरों की आर्थिक स्थिति मजबूत किए बिना बिहार में विकास और सामाजिक न्याय का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। सुखाड़, राशन और पेयजल संकट पर सरकार को घेरा सत्याग्रह में किसानों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि बारिश की कमी के कारण औरंगाबाद जिले के कई इलाकों में कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं। धान की रोपनी में परेशानी और खेतों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने से किसानों के सामने संकट की स्थिति बन रही है। उन्होंने सरकार से प्रभावित प्रखंडों का तत्काल आकलन कराने और आवश्यकता के अनुसार उन्हें सुखाड़ प्रभावित क्षेत्र घोषित करने की मांग की। आंदोलनकारियों ने किसानों को सिंचाई, बिजली और पेयजल की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराने के साथ फसल क्षति की भरपाई के लिए उचित मुआवजा देने की मांग की। उनका कहना था कि किसानों की स्थिति का समय रहते आकलन नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है। राशन कार्ड से गरीबों के नाम काटे जाने के मुद्दे पर भी आंदोलनकारियों ने नाराजगी जताई। वक्ताओं ने कहा कि गरीब परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के बजाय राशन सूची से पात्र लोगों के नाम हटाना उनके साथ अन्याय है। उन्होंने राशन सूची से गरीबों के नाम काटने की प्रक्रिया तत्काल बंद करने और सभी पात्र परिवारों को नियमित रूप से राशन उपलब्ध कराने की मांग की। ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट का मुद्दा भी उठाया गया। आंदोलनकारियों ने खराब चापाकलों की मरम्मत कराने और आवश्यकता के अनुसार नए जलस्रोत उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। नीट में पारदर्शिता और आंदोलन को गांव-गांव पहुंचाने का आह्वान सत्याग्रह के दौरान नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ न हो। उन्होंने परीक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की धांधली या अनियमितता सामने आने पर सख्त कार्रवाई की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि गरीबों, मजदूरों और किसानों की समस्याएं केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राज्य के बड़े हिस्से में लोग इन समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाने की जरूरत है। उन्होंने गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई के खिलाफ एकजुट होकर राज्यव्यापी आंदोलन को तेज करने का आह्वान किया। आंदोलनकारियों ने कहा कि उनका संघर्ष गरीबों को उजाड़ने के खिलाफ, भूमिहीनों को जमीन दिलाने, मजदूरों को रोजगार देने और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए है। दो दिवसीय सत्याग्रह के माध्यम से सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाने के साथ आम लोगों को भी इन मुद्दों पर संगठित करने का प्रयास किया जा रहा है। सामूहिक अनशन-सत्याग्रह में कृष्णा सिंह, विजय राम, कैलाश पासवान, अब्दुल जलील अंसारी, वीरेंद्र कुमार मेहता, सुदामा पासवान, नारायण राम सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि मांगों पर ठोस पहल नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।
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औरंगाबाद में बुलडोजर राज के खिलाफ गरीबों-मजदूरों का सामुहिक सत्याग्रह:भूमिहीन परिवारों को 5 डिसमिल जमीन, गांव में रोजगार की गारंटी देने की रखी मांग
