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केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में दसवीं प्रसार शिक्षा परिषद की बैठक:लैब से खेत और आजीविका पर जोर; किसानों को कार्बन फार्मिंग के नए अवसरों से जोड़ने के निर्देश




समस्तीपुर के डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में सोमवार को 10वीं प्रसार शिक्षा परिषद बैठक हुई है। इस दौरान 16 कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए कार्य योजना तैयार करने पर मंथन हुआ। मौके पर कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय ने प्रसार तंत्र के लिए एक नई दृष्टि प्रस्तुत की और वैज्ञानिकों से उत्पादन से आगे सोचने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अब वैज्ञानिकों को ‘तीन एल’, लैब से खेत और आजीविका(लैब टू लैंड एंड लाइवलीहुड) पर तुरंत काम करना होगा। अब सिर्फ उत्पादन सिखाना पर्याप्त नहीं है। किसानों को विपणन, निर्यात प्रोटोकॉल और गुणवत्ता मानकों का प्रशिक्षण देना होगा। उन्हें पड़ोसी देशों की मांग और आधुनिक पैकेजिंग की जानकारी भी देनी आवश्यक है, ताकि वे एक उद्यमी बन सकें। कुलपति ने आगे कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक किसानों को कार्बन फार्मिंग के नए अवसरों से जोड़ने पर ध्यान केंद्रित करें। केवीके प्रशिक्षण की संख्या और किसानों के नंबर की रिपोर्ट देते हैं, पर अब वो ऐसी रिपोर्ट देखना चाहते हैं जो समाज में आए वास्तविक बदलाव को दर्शाए। न कि सिर्फ प्रशिक्षणों की संख्या को बताएं। देश के सर्वश्रेष्ठ केंद्रों में कृषि विज्ञान केंद्र विशेष अतिथि के रूप में डॉ. रणधीर सिंह, पूर्व एडीजी कृषि प्रसार, आईसीएआर ने विश्वविद्यालय के प्रसार नेटवर्क की सराहना की। उन्होंने कहा कि आरपीसीएयू के कृषि विज्ञान केंद्र देश के सर्वश्रेष्ठ केंद्रों में है। यह गर्व की बात है कि विश्वविद्यालय के सभी 16 केवीके ने लगातार तीन वर्षों तक भारत सरकार की रैंकिंग में शीर्ष स्थान बनाए रखा है। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को सशक्त करने से कृषि परिदृश्य स्थायी रूप से बदलेगा।
महिला किसान भी पुरूषों की तरह बन सकती है आत्मनिर्भर पद्मश्री राजकुमारी देवी ‘किसान चाची’ ने महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कृषि में महिलाओं की भूमिका अपरिहार्य है। कृषि उद्यमिता, प्रसंस्करण और प्राकृतिक खेती को अपनाकर हमारी ग्रामीण महिलाएं और किसान पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकते हैं और समाज को समृद्धि की ओर ले जा सकते हैं। कार्यक्रम में प्रसार शिक्षा परिषद के सदस्य योगेन्द्र कुमार पाठक और राघव शरण प्रसाद ने भी अपने विचार व्यक्त किए और खेती में मजदूर की कमी सहित अन्य स्थानीय किसानों की समस्याओं की चर्चा की।



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