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न्यूयॉर्ककुछ ही क्षण पहले
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अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी को अमेरिका से बड़ी राहत मिली है। सोमवार को अमेरिका की फेडरल कोर्ट ने उनके खिलाफ आपराधिक मामला खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अडाणी और अन्य आरोपियों पर रिश्वत और धोखाधड़ी के मामले को आगे नहीं चलाने का फैसला किया है। ब्रूकलिन की अमेरिकी जिला जज निकोलस गारौफिस ने केस खारिज करने की मांग मंजूर कर दी।
गौतम अडाणी पर 2024 में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने की सहमति जताई थी, ताकि अडाणी ग्रुप की एक सहायक कंपनी को सोलर एनर्जी प्लांट डेवलप करने की मंजूरी मिल सके। हालांकि, अडाणी ग्रुप ने हमेशा इन गलत कामों से इनकार किया था।
फैसला आने के बाद गौतम अडाणी ने X पर पोस्ट किया- मैं न्यायिक प्रक्रिया के प्रति विनम्रता और गहरे सम्मान के साथ अमेरिकी अदालत के फैसले का स्वागत करता हूं।

अडाणी ने किसी समझौते की जानकारी से इनकार किया
15 जुलाई को अदालत में दिए एफिडेविट में अडाणी ने कहा था कि उन्हें ऐसे किसी समझौते की जानकारी नहीं है। उन्होंने माना कि वह पहले अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश करने का वादा कर चुके हैं।
अडाणी ने बताया कि उनके वकीलों ने न्याय विभाग के साथ बैठकों में कहा था कि यह निवेश वादा इन मामलों के समाधान का हिस्सा हो सकता है।
18 मई को न्याय विभाग ने केस छोड़ने की बात कही थी
18 मई को अमेरिकी न्याय विभाग ने घोषणा की थी कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाएगा। हालांकि, किसी मामले के आरोप औपचारिक रूप से तभी खारिज किए जा सकता था, जब जज इसकी मंजूरी देते।
समझिए, मामला भारत का, लेकिन अमेरिका में केस कैसे बना
मामला मुख्य रूप से भारत में एक बड़े सौर-ऊर्जा प्रोजेक्ट के ठेके हासिल करने के लिए कथित रिश्वत से जुड़ा था। अमेरिकी अभियोजन पक्ष ने नवंबर 2024 में गौतम अडाणी और कुछ अन्य अधिकारियों पर आरोप लगाया था कि अडाणी समूह से जुड़ी कंपनी अडाणी ग्रीन एनर्जी को भारत में बड़े सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट मिलने थे।
अमेरिकी अभियोजन के अनुसार, इन कॉन्ट्रैक्ट्स को हासिल करने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को करीब 26.5 करोड़ डॉलर (लगभग ₹2,200 करोड़) की रिश्वत देने की योजना बनाई गई थी। आरोप यह भी था कि इस कथित रिश्वत योजना को अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से छिपाया गया।
अमेरिका का तर्क था कि इस कथित योजना में अमेरिकी वित्तीय बाजार और अमेरिकी निवेशक जुड़े हुए थे। आरोपों के मुताबिक अडाणी समूह ने अमेरिकी निवेशकों से पैसा जुटाया था और कथित रिश्वत को छिपाने के लिए उन्हें गलत जानकारी दी गई।

16 की उम्र में स्कूल छोड़कर खड़ा किया साम्राज्य
गौतम अडाणी ने 1988 में गुजरात में महज 16 साल की उम्र में स्कूल छोड़ने के बाद कमोडिटी ट्रेडिंग के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। पिछले कुछ दशकों में उन्होंने अपने ग्रुप का विस्तार पोर्ट्स, एयरपोर्ट्स, माइनिंग, बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में किया।
आज अडाणी ग्रुप भारत के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर साम्राज्यों में से एक है। अमेरिकी केस खत्म होने की खबर ग्रुप के लिए वैश्विक स्तर पर बड़ी जीत मानी जा रही है।

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