4 घंटे पहले
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सावन मास की अमावस्या 12 अगस्त को है। इसे हरियाली अमावस्या कहा जाता है। इस बार यह तिथि इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन सूर्य ग्रहण भी होने जा रहा है। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में ग्रहण का सूतक काल भी देश में मान्य नहीं होगा। हरियाली अमावस्या से जुड़े सभी धर्म-कर्म पूरे दिन बिना किसी बाधा के किए जा सकेंगे।
ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, जब कोई ग्रहण किसी स्थान पर दिखाई नहीं देता, तो वहां उस ग्रहण का सूतक मान्य नहीं होता है। इसलिए 12 अगस्त को मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे और पूजा-पाठ सहित सभी धार्मिक गतिविधियां नियमित रूप से की जा सकेंगी। श्रद्धालु भगवान शिव का अभिषेक, रुद्राभिषेक, बिल्व पत्र अर्पण, दान-पुण्य, पितरों के तर्पण और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर सकेंगे।
सावन भगवान शिव की भक्ति करने का महीना है। इसी पवित्र माह में अमावस्या पड़ने के कारण हरियाली अमावस्या का महत्व और बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सुख, शांति और समृद्धि की कामना पूरी होती है। हरियाली अमावस्या प्रकृति और पर्यावरण से जुड़ा पर्व है। इस दिन पेड़-पौधे लगाने की परंपरा है। मान्यता है कि पौधरोपण और प्रकृति की सेवा से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। इसी कारण कई स्थानों पर सामूहिक रूप से पौधे लगाए जाते हैं और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जाता है।
सूर्य ग्रहण का समय और कहां-कहां दिखेगा
भारतीय समय अनुसार सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात करीब 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की रात करीब 1:28 बजे तक रहेगा। यह ग्रहण उत्तरी प्रशांत महासागर, पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका में दिखेगा।
अमावस्या पर स्नान और पितृ तर्पण की परंपरा
अमावस्या तिथि को पितरों की पूजा और तर्पण के लिए भी विशेष माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों और तीर्थस्थलों में स्नान करके पितरों के निमित्त तर्पण करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए तर्पण और दान से पितरों को संतुष्टि मिलती है।
जो लोग किसी तीर्थ या पवित्र नदी तक नहीं जा सकते, वे घर पर भी स्नान की धार्मिक विधि कर सकते हैं। इसके लिए पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। इसके बाद पितरों को याद करते हुए अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, जल, वस्त्र या जरूरत की अन्य वस्तुओं का दान करना किया जाता है।
किसी गौशाला में हरी घास और आर्थिक सहायता भी दे सकते हैं। दान करते समय सेवा और श्रद्धा की भावना को महत्व देना चाहिए। अमावस्या पर पशु-पक्षियों को भोजन कराने की भी परंपरा है। इस दिन गायों के अलावा कुत्तों और कौवों को भी रोटी या अन्य भोजन करा सकते हैं। इसे जीव सेवा और पितरों के प्रति श्रद्धा से जोड़कर देखा जाता है।
भगवान शिव की पूजा और मंत्र जप करें
सावन अमावस्या होने के कारण इस दिन भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व रहेगा। श्रद्धालु शिवलिंग पर जल और अपनी परंपरा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर सकते हैं। बिल्व पत्र चढ़ाकर भगवान शिव के मंत्रों का जप करना चाहिए। इस दिन महामृत्युंजय मंत्र का जप या भगवान शिव के नाम का स्मरण भी कर सकते हैं। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार रुद्राभिषेक और जलाभिषेक भी कर सकते हैं। भारत में सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण इन धार्मिक गतिविधियों पर ग्रहण संबंधी कोई बाधा नहीं मानी जाएगी।

