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Uttarakhand Voter List Notice: BJP-Congress MLAs and Officials Included


उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बीच अब मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम को भी नोटिस मिला है। उन्होंने बीते कल ही देहरादून में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि उनके नाम में विसंगति मिलने पर नोटिस जारी ह

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मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि SIR के दौरान जारी होने वाले नोटिस किसी शिकायत या कार्रवाई का संकेत नहीं हैं। मतदाता सूची में नाम, पता, उम्र या अन्य विवरण में तकनीकी त्रुटियां मिलने पर रिकॉर्ड ठीक कराने के लिए नोटिस भेजे जाते हैं। इसलिए लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

बीते कल हुई पीसी में उन्होंने था बताया कि राज्यभर में अब तक करीब 24 लाख नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 20 लाख यानी 83% नोटिस संबंधित मतदाताओं तक पहुंच चुके हैं। सत्यापन में सबसे ज्यादा गड़बड़ियां नाम, उम्र और पारिवारिक विवरण में मिली हैं।

CEO समेत इन बड़े चेहरों को मिल चुका है नोटिस

इससे पहले नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या, उनकी बहू, कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत, भाजपा विधायक सरिता आर्या, देहरादून छावनी से विधायक सविता कपूर, रायपुर से विधायक उमेश शर्मा काऊ और खटीमा से कांग्रेस विधायक भुवन चंद कापड़ी को भी SIR के तहत नोटिस जारी किए जा चुके हैं। निर्वाचन आयोग का कहना है कि सभी नोटिस रिकॉर्ड में मिली तकनीकी विसंगतियों को ठीक कराने के लिए भेजे गए हैं।

किसे किस वजह से मिला नोटिस

यशपाल आर्या को मतदाता सूची में उनके पिता के सरनेम में गड़बड़ी मिलने पर नोटिस दिया गया। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत के वर्ष 2003 के रिकॉर्ड में पूरा नाम दर्ज नहीं था। विधायक उमेश शर्मा काऊ के रिकॉर्ड में उनका उपनाम दर्ज नहीं मिला। विधायक सरिता आर्या को पुराने आवासीय पते के कारण नोटिस जारी हुआ। आयोग के अनुसार ज्यादातर मामलों में नाम की स्पेलिंग, अधूरा नाम, पुराने पते नोटिस जारी होने के मुख्य कारण हैं।

24 लाख नोटिस, 20 लाख लोगों तक पहुंची सूचना

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बीते कल बताया था कि अब तक राज्यभर में करीब 24 लाख नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 20 लाख यानी 83 प्रतिशत नोटिस संबंधित मतदाताओं तक पहुंच चुके हैं। बाकी नोटिस भी तेजी से वितरित किए जा रहे हैं ताकि सभी लोग समय रहते अपने रिकॉर्ड में सुधार करा सकें। आयोग का कहना है कि अभियान का उद्देश्य पात्र मतदाताओं का सही और त्रुटिरहित रिकॉर्ड तैयार करना है।

रिकॉर्ड सुधार के लिए हजारों आवेदन भी पहुंचे

मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 के तहत अब तक 57,493 आवेदन मिले हैं। फॉर्म-7 के जरिए 22,668 लोगों ने नाम हटाने के लिए आवेदन किया है। वहीं फॉर्म-8 के तहत 26,145 मतदाताओं ने नाम, पता और अन्य विवरण में संशोधन के लिए आवेदन किया है। निर्वाचन विभाग का कहना है कि सभी आवेदनों का नियमानुसार निस्तारण किया जा रहा है।

नोटिस का मतलब वोट कटना नहीं, सिर्फ रिकॉर्ड सुधार

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने साफ किया कि SIR के तहत मिलने वाला नोटिस किसी कार्रवाई या मतदाता का नाम हटाने का आदेश नहीं है। यह केवल रिकॉर्ड में मिली विसंगतियों को ठीक कराने की प्रक्रिया का हिस्सा है। मतदाता निर्धारित दस्तावेज बीएलओ या निर्वाचन कार्यालय में जमा कर आसानी से अपना रिकॉर्ड अपडेट करा सकते हैं। आयोग ने जिलाधिकारियों, ईआरओ और एईआरओ को सामान्य मामलों का मौके पर ही निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं।

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उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत करीब 24 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें से 20 लाख नोटिस संबंधित मतदाताओं तक पहुंच चुके हैं। नोटिस मिलने के बाद कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या उनका वोट कट जाएगा और अब उन्हें क्या करना होगा। (पढ़ें पूरी खबर)



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