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बिहार में 73,151 शिक्षकों ने ट्रांसफर की अर्जी लगाई:बिना मर्जी नहीं होगा तबादला, 5 साल की शर्त बदली, सरकार के 4 बड़े फैसले




31 अक्टूबर 2026 तक शिक्षकों की सभी मांगें और शिकायतें दूर कर दी जाएंगी। इसके बाद शिक्षकों को भी अपनी जिम्मेदारियां पूरी करनी होंगी।- मिथिलेश तिवारी, शिक्षा मंत्री बिहार में शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया चल रही है। इस बीच शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने गुरुवार को कहा कि 31 अक्टूबर 2026 तक शिक्षकों की सभी मांगों और शिकायतों का समाधान कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाएगी। इसके बाद शिक्षकों से भी उम्मीद होगी कि वे अपनी जिम्मेदारियों का पूरी ईमानदारी से निभाएं। सरकार के पिछले कुछ महीनों के फैसलों पर नजर डालें तो तस्वीर अलग दिखाई देती है। चार बार सरकार ने शिक्षकों के हित में अपने फैसले बदले हैं। 73,151 शिक्षकों ने ट्रांसफर के लिए आवेदन दिया है। अब बिना मर्जी शिक्षकों का तबादला नहीं होगा। दैनिक भास्कर की स्पेशल रिपोर्ट में पढ़िए कि किन परिस्थितियों में सरकार ने अपने फैसले बदले और अब आगे क्या होने वाला है। ट्रांसफर नीति पर शिक्षक संगठनों के विरोध, लगातार उठते सवालों और प्रशासनिक चुनौतियों के बीच सरकार को एक-दो नहीं, बल्कि चार बड़े फैसलों में बदलाव करना पड़ा है। -ये चार ऐसे फैसले हैं जिनमें सरकार को अपनी शुरुआती नीति बदलनी पड़ी। ये हैं.. 1: शनिवार को फिर हाफ-डे, केके पाठक की व्यवस्था बदली सरकार का पहला बड़ा फैसला सरकारी स्कूलों की समय-सारिणी को लेकर आया। पूर्व अपर मुख्य सचिव के.के. पाठक ने 28 नवंबर 2023 को सभी सरकारी स्कूलों में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी थी। 2: सरप्लस शिक्षकों के समायोजन में सरकार ने बदली रणनीति शिक्षा विभाग के अधिकारी सरप्लस शिक्षकों के समायोजन में लगे हैं। शुरुआती तैयारी यह थी कि जरूरत वाले स्कूलों में शिक्षकों का अनिवार्य समायोजन किया जाएगा। मतलब शिक्षक नहीं चाहें तब भी उन्हें जिस स्कूल में शिक्षक की कमी है वहां जाना होगा। इस व्यवस्था को लेकर शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई। इसके बाद सरकार ने अपना रुख बदला। 31 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्री ने घोषणा किया कि तबादला पूरी तरह ऐच्छिक होगा। अगर कोई शिक्षक चाहते हैं कि उनका ट्रांसफर नहीं हो तो वह दूसरे स्कूल में नहीं भेजे जाएंगे। अब शिक्षक जिन स्कूलों का विकल्प देंगे, पोस्टिंग केवल उन्हीं में होगी। यदि कोई शिक्षक आवेदन नहीं करता है तो उसे उसके वर्तमान विद्यालय में ही बने रहने दिया जाएगा। किसी शिक्षक को उसकी पसंद से बाहर किसी विद्यालय में नहीं भेजा जाएगा। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आवेदन नहीं करने वाले शिक्षक अपने वर्तमान विद्यालय में ही बने रहेंगे। उन्हें सामान्य तबादला प्रक्रिया में आवेदन करने का अवसर मिलेगा। 30 विकल्पों तक सीमित रहेगा तबादला शिक्षकों को न्यूनतम एक और अधिकतम 30 विद्यालयों का विकल्प देने की सुविधा दी गई है। विभाग का कहना है कि पोस्टिंग इन्हीं विकल्पों में से किसी एक स्कूल में होगी। इससे शिक्षकों को मनपसंद क्षेत्र चुनने का अवसर मिलेगा और अनचाहे तबादले की आशंका भी कम होगी। 3: प्रोबेशन अवधि की शर्त में ढील दी स्थानांतरण नियमावली के अनुसार प्रोबेशन अवधि पूरी किए बिना किसी शिक्षक को तबादला का लाभ नहीं दिया जाता, लेकिन इस बार सरकार ने इस शर्त में ढील दी है। ऐसे शिक्षक जिन्होंने हाल के महीनों में योगदान दिया है, उन्हें भी आवेदन का अवसर दिया गया है। इससे टीआरई-3, हेड टीचर और हेडमास्टर को सीधा लाभ मिला। यही नहीं, पिछले दो साल के भीतर ट्रांसफर हुए शिक्षकों को भी दोबारा आवेदन की अनुमति दी गई। इसे भी सरकार की नीति में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। 4: 5 साल की अनिवार्य सेवा की शर्त हटाई शिक्षक स्थानांतरण नीति में पहले यह प्रावधान रखा गया था कि 5 साल की सेवा पूरी करने वाले शिक्षकों का अनिवार्य तबादला होगा। इस प्रस्ताव का भी शिक्षक संगठनों ने विरोध किया। उनका तर्क था कि पारिवारिक परिस्थितियों, स्वास्थ्य और बच्चों की पढ़ाई जैसी समस्याओं को देखते हुए हर शिक्षक के लिए एक जैसा नियम लागू करना व्यावहारिक नहीं है। सरकार ने शिक्षकों की मांग सुनी और इस शर्त भी ढील दी है। अब पांच वर्ष पूरे होने के बावजूद ट्रांसफर अनिवार्य नहीं रहेगा।



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