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बिहारशरीफ में 1.25 करोड़ की डकैती केस में सुराग नहीं:पुलिस को स्थानीय लोगों पर शक; पीड़ित बीज कारोबारी बोला- एक घंटे का तांडव भूल नहीं पा रहे




बिहार शरीफ में बीज कारोबारी राजीव रंजन के आवास पर रविवार रात 1.25 करोड़ की डकैती केस में पुलिस 24 घंटे बाद भी खाली हाथ है। इतनी बड़ी और सुनियोजित डकैती बिना किसी पुख्ता सूचना (लाइनर) के संभव नहीं है। पीड़ित परिवार, विशेषकर राजीव रंजन का स्पष्ट मानना है कि इस पूरी घटना में आसपास के ही किसी व्यक्ति या स्थानीय लोगों की अहम भूमिका रही होगी। डकैतों को यह सटीक जानकारी थी कि घर में नकदी और आभूषण रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि वारदात में शामिल अपराधियों को घर की स्थिति, छत से प्रवेश करने के रास्ते और परिवार के सदस्यों की संख्या के बारे में पूरी जानकारी थी। बिना किसी स्थानीय लाइनर की सटीक मुखबिरी के दर्जन भर अपराधियों का इतनी आसानी से घर में घुसना, एक घंटे तक बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के लूटपाट करना और फिर सुरक्षित निकल जाना नामुमकिन है। पुलिस भी अब इस ‘लाइनर’ थ्योरी पर गंभीरता से काम कर रही है और आसपास के संदिग्ध लोगों की गतिविधियों की जांच कर रही है। घटना से जुड़ी 3 तस्वीरें देखिए पीड़ित राजीव रंजन बोले- आंखों के सामने से लुटेरों का तांडव घूम रहा पीड़ित राजीव और उनके परिवार ने कहा कि घटना की रात का वह खौफनाक मंजर उनकी आंखों के सामने से नहीं हट रहा है। रात होते ही डकैतों का वह एक घंटे का तांडव उनकी आंखों के सामने तैरने लगता है, जिससे उनकी रातों की नींद पूरी तरह से गायब हो गई है। घर के बच्चे इस कदर डरे हुए हैं कि वे अब भी कांप रहे हैं। राजीव रंजन के पिता बालेश्वर प्रसाद पहले से ही गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं, जबकि खुद राजीव रंजन ब्लड प्रेशर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त हैं। उनकी पत्नी आभा सुमन माइग्रेन की गंभीर मरीज हैं। डकैती के दौरान हुए तनाव, खौफ और मारपीट ने इन सभी की स्वास्थ्य स्थिति को और अधिक नाजुक बना दिया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि भय इतना हावी है कि दिन हो या रात, घर का कोई भी सदस्य सो नहीं पा रहा है। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने खड़े किए सवाल, पीड़ित परिवार बोला- एक-एक पैसे का हिसाब घटना को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोग इतनी बड़ी रकम घर में होने को लेकर पीड़ित परिवार पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं। इसके जवाब में राजीव रंजन की पत्नी आभा सुमन ने कहा कि जिसके साथ ऐसी घटना घटती है, वही इसका असली दर्द समझ सकता है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि जिस किसी को भी उनके पैसों का हिसाब-किताब लेना है, वह सीधे उनके घर आए, वे पाई-पाई का हिसाब देने को तैयार हैं। उन्होंने रुंधे गले और आक्रोशित स्वर में कहा कि जो लोग बिना सच्चाई जाने गलत बातें लिख रहे हैं, भगवान करे कि उनके साथ भी ऐसी ही घटना हो, तब उन्हें समझ आएगा कि पैसा कैसे आता है और कैसे चला जाता है। उन्होंने समाज की गिरती मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मानवता इस कदर खत्म नहीं होनी चाहिए कि पीड़ित के साथ खड़े होने के बजाय लोग उस पर ही लांछन लगाएं। जो लोग उन्हें जानते-पहचानते तक नहीं हैं, वे बिना सच जाने भद्दे कमेंट कर रहे हैं, जो बेहद निंदनीय है। पाई-पाई को मोहताज हुआ कारोबारी का परिवार, नए घर का निर्माण कार्य ठप राजीव रंजन एक सफल बीज कारोबारी हैं और उनका परिवार बहुत जल्द ही अपने नए मकान में शिफ्ट होने की तैयारी कर रहा था। नए घर का निर्माण कार्य बहुत ही जोर-शोर से चल रहा था, लेकिन इस घटना के बाद न केवल उनके वर्तमान घर का सुकून छिन गया है, बल्कि उनके नए सपनों के आशियाने का निर्माण कार्य भी पूरी तरह से ठप हो गया है। आर्थिक तंगी और मानसिक सदमे के कारण फिलहाल निर्माण कार्य को अनिश्चित काल के लिए रोक दिया गया है। तीन विशेष टीमों का गठन, सुरक्षा के लिए तीन शिफ्ट में पुलिस बल तैनात घटना के तुरंत बाद पीड़ित परिवार को सुरक्षा का अहसास कराने और उनके खौफ को कम करने के लिए प्रशासन द्वारा उनके घर के पास तीन शिफ्ट में पुलिस बलों की प्रतिनियुक्ति कर दी गई है। मामले को सुलझाने के लिए कुल तीन विशेष टीमों का गठन किया गया है। इन टीमों में स्थानीय दीपनगर थाने की पुलिस, जिला आसूचना इकाई की टीम और राज्य की विशेष कार्य बल की टीम को शामिल किया गया है। जांच को तकनीकी रूप से मजबूत करने के लिए पटना से आई डीआईयू की विशेष टीम ने घटनास्थल और उसके आसपास के मोबाइल टावरों का ‘टावर डंप’ डेटा भी हासिल कर लिया है, ताकि घटना के समय सक्रिय संदिग्ध मोबाइल नंबरों की पहचान की जा सके। पुलिस की एक विशेष टीम अपराधियों की धरपकड़ के लिए राज्य के बाहर भी लगातार छापेमारी कर रही है, क्योंकि अंदेशा है कि इस डकैती में किसी अंतरराज्यीय गिरोह का हाथ हो सकता है। वहीं, अन्य टीमें राज्य के भीतर पिछले कुछ दिनों या महीनों में हुई इसी तरह की डकैती की वारदातों के तौर-तरीकों का अध्ययन कर कड़ियां जोड़ने में लगी हुई हैं। पुलिस ने एक सप्ताह में रिकवरी का दिया है आश्वासन घटना के बाद नालंदा के पुलिस अधीक्षक भारत सोनी ने भी खुद घटनास्थल का मुआयना किया और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। एसपी ने परिवार की व्यथा सुनी और उन्हें पूर्ण सुरक्षा का भरोसा दिलाया। पुलिस अधीक्षक ने पीड़ित परिवार को स्पष्ट आश्वासन दिया है कि पुलिस पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है और आगामी एक सप्ताह के भीतर लूटी गई संपत्ति की रिकवरी कर ली जाएगी तथा सभी अपराधियों को सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा। इस पूरे मामले पर सदर डीएसपी-1 अमरनाथ ने आधिकारिक बयान देते हुए बताया कि पुलिस ने पीड़ित परिवार के बयान के आधार पर दीपनगर थाने में अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस की टीम लगातार इस अंधे कत्ल की तरह उलझे मामले के उद्भेदन के प्रयास में जुटी हुई है। अनुसंधान के क्रम में पुलिस के हाथ कुछ अहम सुराग लगे हैं, जिनके आधार पर लगातार विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। एक घंटे तक दर्जनभर हथियारबंद अपराधियों ने मचाया था तांडव दरअसल, रविवार की देर रात करीब दर्जन भर हथियारबंद और नकाबपोश डकैतों ने घर वालों को बंधक बनाकर और उनके साथ मारपीट कर 45 लाख रुपए नकद, 70 लाख रुपए के हीरे और सोने के आभूषण तथा लगभग 3 किलो चांदी लूटी थी। रविवार की आधी रात जब पूरा परिवार गहरी नींद में सोया हुआ था, तब लगभग 12 की संख्या में आए नकाबपोश डकैत छत के सहारे राजीव रंजन के मकान में दाखिल हुए। डकैतों ने घर में घुसते ही हथियारों के बल पर पूरे परिवार को अपने कब्जे में ले लिया। घर में उस वक्त राजीव रंजन, उनकी पत्नी आभा सुमन, उनके वृद्ध पिता बालेश्वर प्रसाद, माता फूलती देवी और दो छोटे बच्चे मौजूद थे। डकैतों ने करीब एक घंटे तक पूरे घर में तांडव मचाया। उन्होंने अलमारियों के ताले तोड़े, बक्सों को खंगाला और घर के कोने-कोने में रखी नकदी और कीमती आभूषणों को अपने कब्जे में ले लिया। विरोध करने पर अपराधियों ने परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट भी की। घटना के बाद से डकैतों की क्रूरता और उनके हथियारों का खौफ परिवार के सदस्यों के जेहन में इस कदर बैठ गया है कि वे अब तक सामान्य नहीं हो पाए हैं।



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