2 मिनट पहले
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दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च के दौरान 20 जुलाई को छात्रों पर पुलिस ने कार्रवाई की थी।
सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई जारी है। कोर्ट ने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, जो संवैधानिक दायरे में अपनी मांग उठा रहे थे। लोकतंत्र में आंदोलन होते रहेंगे, इसलिए ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई के स्पष्ट मानक तय होने चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिसने भी जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया है, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच मामले की सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि मामला सिर्फ दिल्ली का नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, नागपुर, बिहार समेत कई राज्यों में छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि याचिकाओं में पेलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन, लाठीचार्ज, आंसू गैस और महिलाओं व पत्रकारों के साथ कथित मारपीट जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाएगी। CJI ने कहा, “अगर जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तो जांच का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।”
वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया है कि जंतर-मंतर पर पुलिस ने तय प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया। उन्होंने सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों द्वारा हिंसा, इलेक्ट्रिक शॉक वाले हथियारों के इस्तेमाल, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई। राज्यसभा सांसद मनोज झा की ओर से दायर याचिका में बिहार के सीवान में प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी ने एक प्रदर्शनकारी पर AK-47 तान दी और उसका इस्तेमाल किया।
20 जुलाई के संसद मार्च की 2 तस्वीरें…

पुलिस-रैपिड एक्शन फोर्स ने लाठीचार्ज किया,आंसू गैस के गोले छोड़े, पथराव भी हुआ।

इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी घायल हुए। 100 से ज्यादा लोगों काे चोटें आईं थीं।
प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई मामले पर सुनवाई से जुड़ी अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
लाइव अपडेट्स
4 मिनट पहले
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कोर्ट रूम LIVE: वकील बोले- प्रदर्शनकारियों को इलेक्ट्रिक शॉक दिया गया
सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान: प्रदर्शनकारियों पर इलेक्ट्रिक शॉक देने वाले बैटन और इलेक्ट्रिक शील्ड के इस्तेमाल की रिपोर्टें हैं। एक युवा प्रदर्शनकारी दर्द से चीख उठा था। लाठीचार्ज और आंसू गैस का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल हुआ और तय प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया।
सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान: प्रदर्शन में लोगों की मौजूदगी कम करने के लिए पुलिस द्वारा झूठे मामलों में फंसाने और डराने-धमकाने के आरोप भी हैं। 20 जुलाई को दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिना किसी उकसावे के एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारा। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा के भी आरोप हैं।
CJI: इन सभी आरोपों की गहन जांच जरूरी है। इसमें कोई संदेह नहीं है। जांच पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। जांच समिति की संरचना क्या होगी, इस पर अदालत बाद में फैसला बताएगी।
6 मिनट पहले
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कोर्ट रूम LIVE: जिम्मेदारी तय नहीं हुई तो जांच का कोई मतलब नहीं
CJI: मामले की पूरी तरह स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। जिसने भी जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया है, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी। अगर जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तो जांच का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।
सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन: इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व जज की अगुआई में SIT से कराई जानी चाहिए। इससे कम कोई कदम सही संदेश नहीं देगा। उन्होंने यह भी कहा कि कल बिहार में एक पुलिसकर्मी ने AK-47 का इस्तेमाल किया।
सीनियर एडवोकेट शोएब आलम: प्रदर्शनकारी पूरी तरह निहत्थे थे। पुलिसकर्मी सुरक्षात्मक गियर और मास्क पहनकर कार्रवाई कर रहे थे। इसका वीडियो भी रिकॉर्ड में है।
सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान: हमने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग की घटनाओं को अलग-अलग श्रेणियों में रखा है। याचिका के साथ विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टें और तस्वीरें भी दी गई हैं। इनमें पेलेट गन के गंभीर इस्तेमाल और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों द्वारा हिंसा के आरोप शामिल हैं।
8 मिनट पहले
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कोर्ट रूम लाइव: CJI बोले- लोकतंत्र में आंदोलन होते रहेंगे
CJI: हमें नहीं लगता कि इस मामले में लंबी बहस की जरूरत है। यह छात्रों का पूरी तरह शांतिपूर्ण प्रदर्शन था, जो संवैधानिक दायरे में अपनी मांग उठा रहे थे। पुलिस का कहना है कि ऐसे प्रदर्शनों में कुछ बाहरी लोग घुस जाते हैं और माहौल बिगाड़ देते हैं। वहीं छात्रों का कहना है कि संवैधानिक अधिकार होने के बावजूद उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया।
सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन: जंतर-मंतर पर कार्रवाई से पहले तय प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। पुलिस को पहले लाउडस्पीकर से चेतावनी देनी चाहिए थी। इसके बाद वाटर कैनन, फिर पैरों के नीचे सीमित लाठीचार्ज और सबसे आखिर में आंसू गैस का इस्तेमाल होना चाहिए।
CJI: सभी पक्षों को रचनात्मक सुझाव देने चाहिए। पहले सुप्रीम कोर्ट ने जो प्रोटोकॉल तय किए थे, समय के साथ हालात बदल गए हैं। अब यह तय करना होगा कि किस तरह की आंसू गैस या दूसरे बल प्रयोग की अनुमति होनी चाहिए। लोकतंत्र में आंदोलन होते रहेंगे।
सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन: एक ASI ने खुद कार के शीशे तोड़े, इसका वीडियो मौजूद है। पुलिस ऐसे व्यवहार कर रही थी जैसे उसे खुली छूट मिली हो। जिम्मेदारी सिर्फ निचले स्तर पर नहीं, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों तक तय होनी चाहिए। जब तक ऐसा नहीं होगा, पुलिस को लगेगा कि वह बच निकल सकती है।
26 मिनट पहले
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CJI बोले- छात्रों पर पुलिस बर्बरता के गंभीर आरोप
CJI सूर्यकांत ने कहा कि याचिकाओं में पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि एक 19 साल के छात्र की आंख में पैलेट लगने से उसकी रोशनी चली गई। इसके अलावा इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल, एक युवती के ICU में भर्ती होने और कीलों वाली लाठियों से जानलेवा हमले के आरोप भी लगाए गए हैं।
CJI ने यह भी कहा कि एक पत्रकार के साथ बेरहमी से मारपीट और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों द्वारा हिंसा करने के आरोप भी याचिकाओं में शामिल हैं। साथ ही बिना किसी उकसावे के एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारने और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के आरोपों वाली अलग याचिका भी अदालत के सामने आई है।
33 मिनट पहले
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संसद मार्च में हुआ था लाठीचार्ज, 100 से ज्यादा घायल थे
कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला था। सुबह 8 से शाम 5 बजे तक चले प्रदर्शन में कई बार प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े, संसद की ओर मार्च किया। ये लोग जंतर-मंतर से संसद मार्ग, जनपथ चौराहा, वॉर मेमोरियल, कर्तव्य पथ, विजय चौक से संसद के करीब पहुंच गए थे।।
इन लोगों ने संसद में घुसने की कोशिश की थी। इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े थे। देर शाम को पथराव की तस्वीरें भी सामने आईं। इसमें 100 से ज्यादा लोग घायल हुए।
हालांकि पुलिस ने शाम 5 बजे तक जंतर-मंतर को खाली करा लिया। लेकिन, रात करीब 11 बजे CJP समर्थक जंतर-मंतर पहुंचे और फिर से प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
34 मिनट पहले
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पहले भी 3 बार सुप्रीम कोर्ट पहुंची कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ी याचिका
1. पहली बार- 24 मई, मांग थी- CJP बनाने वालों की गतिविधियों की जांच CBI करे
याचिकाकर्ता के वकील एनके गोस्वामी का दावा था कि CJP, ज्यूडीशियरी की इमेज खराब कर रही है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने कहा, ‘इसे इतनी भावुकता से मत लें।’
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाही के दौरान दिए गए मौखिक अदालती बयानों के कमर्शियलाइजेशन किए जाने के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई। इस पर CJI ने जवाब दिया था- “अभी ऐसी कोई गंभीर आपात स्थिति नहीं है। देखते हैं क्या होता है।” पढ़ें पूरी खबर…
2. दूसरी बार- 22 जुलाई, मांग थी- कॉकरोच पार्टी के समर्थकों पर लाठीचार्ज की जांच हो

एक वकील ने CJI की अगुआई वाली 3 जजों की बेंच के सामने जनहित याचिका लगाई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील ने कहा- छात्र महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे हैं। लेकिन उन पर पुलिस की बर्बरता के वीडियो भी हैं। यदि संभव हो तो मामले की सुनवाई जल्द की जाए।
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा था, ‘हमें वीडियो में दिलचस्पी नहीं है, हमारे पास देखने का समय नहीं है।’ जब वकील ने छात्रों के साथ मारपीट के वीडियो देखने का दूसरी बार अनुरोध किया तो CJI ने कहा, ‘हमारा और अपना समय बर्बाद मत कीजिए।’ पढ़ें पूरी खबर…
3. तीसरी बार- 24 जुलाई, मांग थी- पुलिस पर कंट्रोल जरूरी, कोर्ट हमारे बीच आ रहा है
इस बार मामला सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने उठाया। उन्होंने कोर्ट में बताया प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की हिंसा से जुड़ी 2 याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें कई राज्य पक्षकार के तौर पर शामिल हैं। इनका जिक्र पहले इसलिए नहीं किया गया क्योंकि वे डायरी नंबर का इंतजार कर रहे थे। इन दलीलों के बाद CJI ने कहा, “इसे लिस्टिंग में आने दें, हम इस पर सुनवाई करेंगे।”

इससे पहले एक दूसरे मामले की सुनवाई के दौरान CJI ने कहा था- मैंने CJP के प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज से जुड़ी किसी भी याचिका की सुनवाई से इनकार नहीं किया। सच ये है कि कोई रिट याचिका दाखिल ही नहीं की गई थी। मीडिया ने भी गलत खबरें चलाईं। पढ़ें पूरी खबर…
36 मिनट पहले
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36 दिन चला CJP का प्रदर्शन, प्रधान के इस्तीफे से खत्म
15 मई को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने बेरोजगारों को लेकर कॉकरोच वाला कमेंट किया। इसके खिलाफ सोशल मीडिया पर 16 मई को कॉकरोच जनता पार्टी बनी। 6 जून को इसे बनाने वाले अभिजीत दीपके भारत आए। 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी NEET पेपर लीक के मुद्दे को लेकर धरने पर बैठे।
36 दिन तक चला यह आंदोलन 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफे के बाद खत्म हुआ। प्रधान ने एक बयान में इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा- पिछले 10 दिन की घटनाओं ने उन्हें बहुत दुखी किया है और यह मुद्दा व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मामला नहीं है।
इसके अलावा, छात्रों के साथ अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने भी 26 दिन की भूख हड़ताल सरकार के आश्वासन के बाद खत्म कर दी थी। वे भी सोमवार को मेदांता हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होंगे।

