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अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन के साथ दुर्व्यवहार के विरोध में बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के आह्वान पर बिहारशरीफ सदर अस्पताल में ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से ठप हो गई है। दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई न होने से राज्य भर के चिकित्सकों में असुरक्षा और रोष व्याप्त है। ओपीडी सेवाओं के बहिष्कार के कारण अस्पताल में मरीजों का पर्चा कटना पूरी तरह से बंद रहा। इसके चलते दूर-दराज से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जमुआरा (भीखन टोला) से आए रामप्रवेश रविदास, इस्लामपुर से पहुंचे निरंजन, कालू पंडित और पिंकी देवी जैसे कई मरीजों ने बताया कि वे सर्दी-खांसी, बदन दर्द, कमजोरी और अन्य बीमारियों के इलाज के लिए आए थे। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर बताया गया कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं और ओपीडी बंद है। मजबूरी में इन मरीजों को बिना इलाज कराए ही वापस लौटना पड़ा। हालांकि, संघ के निर्देशानुसार इस दौरान अस्पताल में आपातकालीन सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहीं ताकि गंभीर मरीजों के इलाज में कोई बाधा न हो। हम सुरक्षित ही नहीं तो इलाज क्या करेंगे बिहारशरीफ सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि जब डॉक्टर और सिविल सर्जन ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो वे आम लोगों का इलाज कैसे कर पाएंगे। उन्होंने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि यहां हमेशा लॉ एंड आर्डर की गंभीर समस्या बनी रहती है, लेकिन आज तक अस्पताल परिसर में पुलिस पिकेट का निर्माण नहीं किया गया है। जिला प्रशासन और सरकार से चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए इस ओर अविलंब ठोस कदम उठाने की मांग की है।
ओपीडी में 500 मरीजों का होता था इलाज सदर अस्पताल बिहार शरीफ में रोजाना 500 से अधिक लोग ओपीडी की सेवा लेते थे। अचानक डॉक्टर के हड़ताल पर चले जाने के कारण दूर-दराज से आए मरीज को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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नालंदा सदर अस्पताल की ओपीडी सेवा ठप:अरवल सिविल सर्जन से दुर्व्यवहार पर आक्रोश, बिना इलाज के मरीजों को लौटना पड़ा
