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किशनगंज पुलिस अब डिजिटल तकनीक का भी इस्तेमाल कर रही है। जिले के थानों को टेक्नोलॉजी से लैस किया जा रहा है। अब तक 24 थानों में कंप्यूटर से कामकाज शुरू हो चुका है।
अनुसंधानकर्ताओं को डिजिटल पुलिसिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है। कंप्यूटर चलाने के लिए कार्यपालक सहायक और दक्ष पुलिसकर्मी तैनात हैं। उन्हें लैपटॉप-एंड्रॉयड फोन भी मिले हैं, जिससे जांच में सबूत डिजिटल रूप से सुरक्षित रहते हैं। 10 साल का डेटा कंप्यूटर में अपलोड क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) के तहत पिछले 10 साल का डेटा कंप्यूटर में अपलोड है। एफआईआर दर्ज होने के 24 घंटे में ऑनलाइन अपलोड होती है, जिससे लोगों को जानकारी मिलती है और काम में पारदर्शिता आती है।
डिजिटल पुलिसिंग में घटनास्थल पर मोबाइल वीडियोग्राफी और ई-साक्ष्य ऐप से सबूत डिजिटल रूप में दर्ज व सुरक्षित हो रहे हैं। इससे सबूतों के साथ छेड़छाड़ या उनके गायब होने की आशंका कम होती है। अनुसंधान को अधिक प्रभावी बनाना उद्देश्य एसपी संतोष कुमार ने कहा कि किशनगंज पुलिस को लगातार सशक्त और आधुनिक बनाया जा रहा है। आधुनिक पुलिसिंग के तहत सामान्य पुलिसिंग के साथ कंप्यूटर आधारित कार्यों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। डिजिटल पुलिसिंग का उद्देश्य अनुसंधान को अधिक प्रभावी बनाना और दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया को मजबूत करना है, ताकि लोगों को समय पर न्याय मिल सके।
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