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नवादा के संतोष 22 राज्यों-प्रदेशों की कर चुके हैं यात्रा:नौकरी छोड़ी, देश घूमना जुनून; लेह-लद्दाख से कन्याकुमारी-नाथुला से रण ऑफ कच्छ तक पहुंचे




लेह-लद्दाख की बर्फीली वादियों से कन्याकुमारी के समुद्री तट तक और सिक्किम के नाथुला दर्रे से गुजरात के रण ऑफ कच्छ तक। कहीं पहाड़ों की ऊंचाइयां, कहीं रेगिस्तान का विस्तार तो कहीं समुद्र की लहरें। नवादा के संतोष कुमार शाही का सफर भारत की विविधता को करीब से देखने और समझने की चाह में लगातार आगे बढ़ रहा है। किसान परिवार से आने वाले संतोष अब तक 22 राज्यों और छह केंद्रशासित प्रदेशों की यात्रा कर चुके हैं। सनातन धर्म के 12 ज्योतिर्लिंग और चार धाम के दर्शन से लेकर सिख धर्म के पांचों तख्तों तक पहुंच चुके संतोष का अगला लक्ष्य पूरे भारत का भ्रमण पूरा करना है। इसके बाद वे दुनिया की यात्रा पर निकलना चाहते हैं। नवादा जिला मुख्यालय से करीब 38 किलोमीटर दूर कुशाहन गांव के रहने वाले संतोष को अलग-अलग राज्यों की संस्कृति, रहन-सहन, खानपान और जीवनशैली जानने का जुनून है। उनके लिए घूमना केवल पर्यटन नहीं, बल्कि देश को करीब से समझने का एक तरीका है। इसी शौक को पूरा करने के लिए उन्होंने नौकरी तक छोड़ दी। बार-बार छुट्टी लेने की परेशानी से बचने के लिए उन्होंने घुमक्कड़ी को ही अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। अब वे समय निकालकर घूमने के बजाय अपनी जिंदगी को ही यात्राओं के हिसाब से आगे बढ़ा रहे हैं। छुट्टी की परेशानी से बचने के लिए छोड़ दी नौकरी नौकरी के साथ घूमने का शौक पूरा करना संतोष के लिए आसान नहीं था। किसी नई जगह जाने के लिए छुट्टी की जरूरत पड़ती थी। काम की जिम्मेदारियों के बीच बार-बार छुट्टी लेना मुश्किल होता था। ऐसे में उनके सामने दो रास्ते थे- नौकरी के साथ सीमित यात्राएं करना या फिर अपने जुनून को पूरा समय देना। संतोष ने दूसरा रास्ता चुना। नौकरी छोड़ने का फैसला उनके लिए सिर्फ रोजगार से दूरी बनाना नहीं, बल्कि अपनी पसंद की जिंदगी जीने की शुरुआत थी। इसके बाद उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में जाने और वहां की विशेषताओं को जानने पर ध्यान देना शुरू किया। उनकी यात्राओं का दायरा बढ़ता गया और भारत के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों को देखने की इच्छा उन्हें दूर-दराज के इलाकों तक ले गई। लद्दाख की बर्फीली वादियों से कन्याकुमारी के समुद्र तक भारत की भौगोलिक विविधता संतोष की यात्राओं में साफ दिखाई देती है। एक तरफ लेह-लद्दाख की ठंडी और ऊंची पहाड़ियां हैं, तो दूसरी तरफ कन्याकुमारी का समुद्री तट। सिक्किम का नाथुला दर्रा और गुजरात का रण ऑफ कच्छ भी उनके सफर का हिस्सा रहे हैं। इन जगहों की भौगोलिक परिस्थितियां, मौसम और जीवनशैली एक-दूसरे से काफी अलग हैं। देश के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचने की यह कोशिश उन्हें भारत की विविधता को अलग-अलग नजरिए से देखने का अवसर देती है। हर क्षेत्र की अपनी भाषा, खानपान, पहनावा और परंपराएं हैं। संतोष का उद्देश्य इन बदलावों को केवल तस्वीरों में दर्ज करना नहीं, बल्कि उनके बीच जाकर समझना भी है। धार्मिक स्थलों की यात्रा भी प्राथमिकता में संतोष की यात्राओं में धार्मिक स्थलों का भी विशेष स्थान है। वे सनातन धर्म के 12 ज्योतिर्लिंगों और चार धाम के दर्शन कर चुके हैं। इसके साथ ही सिख धर्म के पांचों तख्तों तक भी पहुंचे हैं। इन यात्राओं के जरिए उन्होंने देश की अलग-अलग धार्मिक परंपराओं से जुड़े प्रमुख स्थलों को देखने का लक्ष्य पूरा किया है। भारत में धार्मिक स्थलों की अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान है। इन स्थानों पर देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। संतोष के लिए इन स्थलों की यात्रा देश की धार्मिक विविधता को समझने का भी एक हिस्सा है। किसान परिवार से निकलकर बनाया अलग रास्ता संतोष एक किसान परिवार से आते हैं। नवादा के कुशाहन गांव से शुरू हुआ उनका सफर अब देश के कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक पहुंच चुका है। सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने अपनी रुचि को जीवन की प्राथमिकता बनाया। नौकरी छोड़ने का फैसला भी इसी सोच का हिस्सा रहा कि जिस काम में मन लगता है, उसके लिए समय और अवसर दोनों जरूरी हैं। अब तक 22 राज्यों और छह केंद्रशासित प्रदेशों की यात्रा कर चुके संतोष का सफर अभी पूरा नहीं हुआ है। उनका लक्ष्य भारत के बाकी हिस्सों को भी देखना और समझना है। देश भ्रमण पूरा होने के बाद वे विदेशों की यात्रा करना चाहते हैं। यानी कुशाहन गांव से शुरू हुई यह घुमक्कड़ी अब दुनिया देखने के सपने तक पहुंच गई है।



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