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सहरसा में छपरा इप्टा का ड्रामा 'द लास्ट क्राई' परफॉरम:पर्यावरण संकट पर उठाया सवाल; चाइल्ड आर्टिस्ट के एक्टिंग और म्यूजिक की हुई सराहना




बिहार इप्टा राज्यस्तरीय नाट्योत्सव 2026 ‘सच का रंगमंच : रंगों और विचारों का उत्सव’ में छपरा इप्टा की प्रस्तुति ‘द लास्ट क्राई’ ने दर्शकों का दिल जीत लिया। नाट्योत्सव के दूसरे दिन सहरसा में छपरा इप्टा ने सीपीएस, छपरा के सहयोग से पर्यावरण केंद्रित नाटक का मंचन किया। प्रस्तुति के दौरान सभागार तालियों से गूंजता रहा। अभिनय, संवाद, रंग-संगीत, प्रकाश और मंचीय परिकल्पना ने प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाया। नाटक में समृद्धि श्रेया ने सूत्रधार की भूमिका निभाई। उनकी सधी हुई संवाद अदायगी और मंचीय आत्मविश्वास ने कहानी को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया। अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी अभिनय क्षमता दिखाई वहीं प्रीति कुमारी ने ‘धरती’ के किरदार में पर्यावरण की पीड़ा, आक्रोश और मनुष्य से उसके सवालों को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया। युवराज सिंह ने ‘विकास’ की भूमिका में आधुनिक विकास और प्रकृति के विनाश के बीच के टकराव को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा। छपरा इप्टा के कलाकारों ने प्रकृति के अलग-अलग रूपों को भी मंच पर जीवंत किया। अनुभव सिंह ने वृक्ष, शगुन सिंह ने पक्षी, आर्यन कुमार सिंह ने पहाड़, स्मृति गौतम ने हवा और रिया शर्मा ने नदी की भूमिका निभाई। इन किरदारों के माध्यम से पर्यावरण संकट को दृश्यात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया। विराट कुमार सिंह ने ग्रामीण, जज, काका और कोरस की अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी अभिनय क्षमता दिखाई। रंग संगीत प्रस्तुति का खास आकर्षण राजन गुप्ता ने युवक, श्रेया सिंह ने युवती और अश्विनी सिंह ने मां की भूमिका निभाई। वहीं वंशिका ने बच्चे और गरिमा कुमारी ने महिला का किरदार निभाया। कोरस में आदित्य कुमार गुप्ता, आकृति कुमारी वर्मा, खुशी कुमारी, आराध्या सिंह और श्रुति कुमारी ने सामूहिक प्रस्तुति से मंच पर ऊर्जा भरी। नाटक के रंग-संगीत ने प्रस्तुति को और प्रभावशाली बनाया। हिमांशु कुमार राय ने सिंथेसाइजर, शैलेन्द्र कुमार शाही ने हारमोनियम, विनय कुमार ‘बीनू जी’ ने नाल, मानिक कुमार ने ड्रम तथा आयुष कुमार मान ने झाल-खंजड़ी संभाली। कंचन बाला का रंग संगीत प्रस्तुति का खास आकर्षण रहा। प्रकाश परिकल्पना रंगकर्मी रितेश रंजन की रही। नाटक का लेखन, निर्देशन और रंग-परिकल्पना डॉ. अमित रंजन ने किया। शैलेन्द्र कुमार शाही और शालिनी कुमारी के सह-निर्देशन तथा विनय कुमार के सह-निर्देशन संगीत ने प्रस्तुति को मजबूती दी। प्रस्तुति के बाद कलाकारों के चेहरों पर सफलता की खुशी दिखी। दर्शकों की लगातार तालियों ने छपरा इप्टा के किशोर रंगकर्मियों का उत्साह बढ़ाया।



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