- Hindi News
- National
- Justice BR Gawai Slams Justice Bhuyan Statement On SIR Case | Controversy
नई दिल्ली37 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

पूर्व CJI बीआर गवई और दिल्ली हाईकोर्ट के दो रिटायर्ड जजों ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां की टिप्पणी की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि SIR का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।
जस्टिस गवई ने सोमवार को कहा कि किसी लंबित मामले पर सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज को सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने इसे न्यायिक मर्यादा के खिलाफ बताया।
जस्टिस भुइयां ने रविवार को NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में 19वीं जस्टिस बोध राज साहनी मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन समारोह में भाषण दिया था।
उन्होंने कहा था कि लाखों भारतीय नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मूल रूप से मनमानी है। यह संवैधानिक व्यवस्था को नकारने जैसी है।
जस्टिस भुइयां ने क्या कहा था
जस्टिस भुइयां ने कहा था कि संविधान नागरिकों के दो वर्ग नहीं बनाता। एक वर्ग वोट देने के अधिकार वाला और दूसरा बिना वोटिंग अधिकार वाला नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा था कि ऐसी प्रक्रिया को किसी भी तरह की ‘व्हाटअबाउटरी’ से सही नहीं ठहराया जा सकता।
गवई ने PTI से बातचीत में कहा, “न्यायिक मर्यादा उन्हें उस मामले पर टिप्पणी करने की इजाजत नहीं देती, जो अदालत में विचाराधीन है।”
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज को ऐसे मुद्दे पर बयान नहीं देना चाहिए, जिस पर उसी अदालत में सुनवाई चल रही हो।
रिटायर्ड जजों ने भी सवाल उठाए
गवई की राय से दिल्ली हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज एसएन ढींगरा और आरएस सोढ़ी भी सहमत रहे। दोनों ने जस्टिस भुइयां की टिप्पणी पर सवाल उठाए।
जस्टिस ढींगरा ने कहा कि यह बयान सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज की सीमाओं से “काफी आगे” है। लंबित मामले पर सार्वजनिक कार्यक्रम में ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “उन्हें ऐसा बयान देने से पहले हजार बार सोचना चाहिए था।” ढींगरा ने यह भी कहा कि जस्टिस भुइयां को मामले के पूरे तथ्य पता नहीं थे।
SIR से जुड़े फैसले कथित तौर पर CEC ज्ञानेश कुमार ने अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए थे। इस बारे में पूछे जाने पर ढींगरा ने कहा कि असहमति होने पर चुनाव आयुक्त खुद बोल सकते हैं।
उन्होंने कहा, “वे देश के शीर्ष नौकरशाह हैं और महत्वपूर्ण पदों पर बैठे हैं। वे अपनी बात खुद कह सकते हैं। उनकी ओर से किसी और के बोलने की जरूरत नहीं है।”
वोट के अधिकार पर जस्टिस सोढ़ी की दलील
रिटायर्ड जज आरएस सोढ़ी ने SIR प्रक्रिया को ‘मताधिकार से वंचित करना’ बताए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वोट देने का अधिकार कानून के तहत तय होता है।
सोढ़ी ने कहा, “आपके पास वोट है या नहीं, यह कानून पर निर्भर करता है। अगर आप कानून के दायरे में आते हैं, तो आपके पास वोट है। अगर आप कानून के दायरे में नहीं आते, तो आपके पास वोट नहीं है।”
उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची में शामिल है या वह कानूनी शर्तें पूरी नहीं करता, तो नाम हटाने के लिए कानून का पालन करना चाहिए।
सोढ़ी ने कहा कि पात्र होने पर व्यक्ति दोबारा अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने की मांग कर सकता है।
उन्होंने नागरिकों को अपने ही देश में “दूसरे दर्जे” का बताने वाली बात पर भी सवाल उठाया। सोढ़ी ने ऐसी टिप्पणियों को “कठोर” और मुद्दे को देखने का अपरिपक्व तरीका बताया।
उन्होंने कहा, “मेरे हिसाब से इस तरह की कठोर सोच और कठोर बयान किसी मुद्दे को देखने का परिपक्व तरीका नहीं है। खासकर तब, जब आप ऐसे क्षेत्र में हों, जिसका आधार तर्क और विश्लेषण पर होना चाहिए।”
सोढ़ी ने कहा कि ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में बने रहने का कानूनी अधिकार रखता है या नहीं। यह भी देखना चाहिए कि कानूनी प्रक्रिया का पालन हुआ है या नहीं।
SIR और चुनाव पैनल से जुड़ी याचिकाएं लंबित
SIR प्रक्रिया से जुड़ी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। इसके अलावा चुनाव पैनल से जुड़े नए कानून की वैधता पर भी सुनवाई बाकी है।
इस नए कानून में मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन पैनल से CJI को बाहर रखा गया है।
जस्टिस भुइयां सार्वजनिक चर्चा में रहने वाले मुद्दों पर अपनी राय रखने के लिए जाने जाते हैं।
NALSAR के छात्रों का विरोध भी चर्चा में रहा
हाल ही में हैदराबाद का NALSAR तब चर्चा में आया था, जब कुछ छात्रों ने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार और प्रोफेसरों को पत्र लिखा था।
छात्रों ने यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बुलाने के किसी भी प्रस्ताव का विरोध किया था।
जस्टिस भुइयां NALSAR के चांसलर रह चुके हैं। रविवार को उन्होंने कहा कि उन्हें संस्थान के छात्रों पर गर्व है।
उन्होंने छात्रों से कहा, “आपने देश और दुनिया को दिखाया है कि यूनिवर्सिटी का छात्र, खासकर कानून का छात्र, कैसा होना चाहिए। आप प्रतिभाशाली, निडर और बहादुर हैं।”

