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वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) के मंगुराहा जंगल में 14 दिन बाद मंगलवार को एक बाघिन को ट्रेंकुलाइज(बेहोशी का इंजेक्शन) देकर सुरक्षित रेस्क्यू किया। विशेष रेस्क्यू टीम ने जसौली जंगल के कंपार्टमेंट नंबर-70 के पास शाम करीब 6 बजे उसे पकड़ा। मौके पर वेटरनरी डॉक्टर की निगरानी में हेल्थ चेकअप किया गया। इसके बाद रात करीब 10:30 बजे बाघिन को विशेष एंबुलेंस से गोरखपुर हवाई अड्डे के लिए रवाना किया गया। मंगुराहा वन क्षेत्र कार्यालय से गोरखपुर की दूरी करीब 160 किलोमीटर है। वीटीआर के वन संरक्षक-सह-क्षेत्र निदेशक गौरव ओझा, पशु चिकित्सक और विशेषज्ञों की टीम भी बाघिन के साथ बक्सा टाइगर रिजर्व गई। गोरखपुर से उसे हवाई मार्ग से पश्चिम बंगाल ले जाया जाएगा। मवेशी के शिकार से मिली लोकेशन रेस्क्यू अभियान में पिछले चार दिनों से बारिश के कारण बाधा आ रही थी। हालांकि, मौसम साफ होने के बाद टीम ने अभियान तेज किया। वहीं सोमवार की रात टीम द्वारा रखे गए एक मवेशी का बाघिन ने शिकार किया, जिससे उसकी सटीक लोकेशन का पता चला। घटनास्थल से मिले पगमार्क के आधार पर उसकी गतिविधियों को ट्रैक किया गया और उसके संभावित ठिकाने को चिन्हित कर रेस्क्यू की अंतिम रणनीति बनाई गई। मौके से आई तस्वीरें…. 100 सदस्यीय टीम, ड्रोन और हाथियों से निगरानी अभियान के अंतिम चरण में करीब 100 सदस्यीय टीम ने जंगल में 24 घंटे कैंप किया। बाघिन की निगरानी के लिए पांच मचान बनाए गए थे। ड्रोन और नाइट विजन कैमरों से लगातार निगरानी की गई। घने जंगल और प्रतिकूल मौसम को देखते हुए हाथी की भी मदद ली गई। रेस्क्यू टीम में पश्चिम बंगाल के चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट राजेंद्र जाखड़, एनटीसीए के असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल साजिद सुल्तान, असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट सयाक दत्ता समेत वीटीआर, देहरादून, बक्सा और दिल्ली के विशेषज्ञ शामिल रहे। बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की स्थायी आबादी बेहद कम है। यहां बाघ पुनर्वास योजना के तहत वीटीआर की बाघिन को भेजा जा रहा है। योजना के अनुसार 2 अक्टूबर 2026 को बाघिन को बक्सा के जंगल में बसाने की तैयारी है।
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VTR में 14वें दिन बाघिन का सफल रेस्क्यू:मवेशी के शिकार से मिली लोकेशन, 2 अक्टूबर को बक्सा टाइगर रिजर्व में शिफ्ट करने की तैयारी
