2 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

अभी पितृ पक्ष चल रहा है और आज (30 सितंबर) चतुर्थी तिथि का श्राद्ध किया जाएगा। पितृ पक्ष 10 अक्टूबर तक है। इन दिनों में पितरों को याद करने और उनके लिए पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है। पितृ पक्ष में किए जाने वाले धर्म-कर्म और नियमों के बारे में कई ग्रंथों में जिक्र किया गया है।
महाभारत में भी श्राद्ध कर्म से जुड़ी कई बातें बताई गई हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह और युधिष्ठिर के बीच हुए संवाद में श्राद्ध से जुड़े नियम, परंपराएं और कथाएं बताई गई हैं।
- महर्षि निमि से जुड़ी है श्राद्ध करने की परंपरा
महाभारत के अनुशासन पर्व के अध्याय 91 में युधिष्ठिर भीष्म से पूछते हैं कि पितामह श्राद्ध कब प्रचलित हुआ? सबसे पहले किस महर्षि ने इसका संकल्प किया?
भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर से कहा कि श्राद्ध की कथा महर्षि निमि से जुड़ी है। इस कथा के अनुसार ब्रह्मा जी से अत्रि मुनि की उत्पत्ति हुई। अत्रि मुनि के यहां भगवान दत्तात्रेय का जन्म हुआ और उनके वंश में आगे चलकर निमि ऋषि हुए।
निमि ऋषि के पुत्र का नाम श्रीमान था। कम उम्र में ही श्रीमान की मृत्यु हो गई। पुत्र की मृत्यु से निमि ऋषि बहुत दुखी हुए। इसी दुख में उन्होंने एक अमावस्या तिथि पर अपने पुत्र के लिए श्राद्ध कर्म किया।
उन्होंने ब्राह्मणों को भोजन कराया और पुत्र के लिए पिंडदान किया। धार्मिक परंपरा में इसी घटना को श्राद्ध कर्म की शुरुआत के रूप में बताया जाता है। इसके बाद पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा आगे बढ़ी।
- महाभारत में इन पितर देवताओं का भी उल्लेख
महाभारत में पितरों से जुड़ी मान्यताओं का भी वर्णन है। इसमें ब्रह्मा, पुलस्त्य, वसिष्ठ, अंगिरा और महर्षि कश्यप आदि को प्रमुख पितर देवताओं के रूप में माना जाता है। पितृ पक्ष में लोग अपने घर-परिवार के दिवंगत सदस्यों को याद करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए धर्म-कर्म करते हैं। श्राद्ध अपने प्रियजनों को याद करने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर है।
- मान्यता- श्राद्ध करने से पितरों को मिलती है शांति
मान्यता है कि पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों को शांति मिलती है। ऐसे कर्म व्यक्ति को अपने पूर्वजों से जुड़ने और उन्हें याद करने का अवसर देते हैं।
अब जानिए पितृ पक्ष में धूप-ध्यान के लिए जरूरी चीजें कौन-कौन सी है और धूप-ध्यान की सरल विधि…
जरूरी चीजें- गाय के गोबर से बने कंडे, धूप देने के लिए हवन कुंड या अन्य कोई बर्तन, घी, काले तिल, चावल, गुड़, कर्पूर, जल से भरा तांबे का लोटा, फूल, बैठने के लिए आसन। अगर ये सभी चीजें उपलब्ध न हो, तो जल, तिल, कंडे के अंगारे और गुड़-घी से भी श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करके धूप-ध्यान किया जा सकता है। आप चाहें तो खीर-पुड़ी भी बना सकते हैं। खीर-पुड़ी से भी धूप दिया जाता है।


