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सरकार जमाबंदी शुद्धिकरण और मृत रैयतों के नामांतरण का अभियान चला रही है। इसके उलट अंचल कार्यालयों में काम हो रहा है। अधिकारियों को 31 अक्टूबर तक खुद ही गलत जमाबंदियों में सुधार करना था, रैयतों के आवेदन का इंतजार नहीं। पर, रैयतों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। महीनों से अंचल कार्यालय के काट रहे चक्कर घटांव गांव के मोहम्मद शमीम अपनी पत्नी के नाम दर्ज जमीन की जमाबंदी शुद्धिकरण के लिए महीनों से अंचल कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। उनका ‘परिमार्जन’ आवेदन रद्द हुआ। अब राजस्व कर्मचारी उन्हें जमीन की मापी कराने को कह रहे हैं, जिससे प्रक्रिया लंबी हो गई है। सचिव जय सिंह के निर्देशों के मुताबिक, 15 सितंबर से 31 अक्टूबर तक डिजिटल जमाबंदी का मूल रजिस्टर-2 से मिलान कर नाम, खाता, खेसरा और रकबा की गलतियां ठीक करनी थीं। नापी जरूरी होने पर रैयत से शुल्क लिए बिना विभाग को अमीन से मुफ्त नापी करानी थी। जमाबंदी रद्द करने और अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
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जमाबंदी शुद्धिकरण आवेदन रिजेक्ट, रैयत लगा रहे ऑफिस के चक्कर:सरकारी निर्देशों के उलट अंचल कार्यालयों में काम, अधिकारियों को खुद करना था सुधार
