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जिंदा इदरीश को सरकारी कागजों में कर दिया ‘मृत':अब खुद को जिंदा साबित करने को काट रहे दफ्तरों के चक्कर, CO बोले-'भूलवश हुई गलती'




सीतामढ़ी के बेलसंड में सरकारी रिकॉर्ड की एक चौंकाने वाली गलती सामने आई है। चैनपुर गांव निवासी मोहम्मद इदरीश को अंचल कार्यालय के रिकॉर्ड में मृत दर्ज कर दिया गया, जबकि वह जिंदा हैं और गंभीर रूप से बीमार हैं। अब इदरीश और उनके परिजन सरकारी कागजों में खुद को जिंदा साबित करने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। मामला पुश्तैनी जमीन के दाखिल-खारिज और बंटवारे से जुड़ा है। बताया गया कि इदरीश अपनी संपत्ति का बंटवारा बच्चों के बीच करना चाहते थे। इसी सिलसिले में उन्होंने अंचल कार्यालय में आवेदन दिया था। आरोप है कि इसी प्रक्रिया के दौरान पर्याप्त जांच और सत्यापन के बिना ही सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया। देखें, मौक से आई तस्वीरें… रिकॉर्ड में मौत की जानकारी मिली तो बढ़ी परिवार की परेशानी सरकारी रिकॉर्ड में अपनी मौत दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद इदरीश और उनके परिवार की परेशानी बढ़ गई। परिजन कभी अंचल कार्यालय तो कभी पंचायत प्रतिनिधियों के पास पहुंचकर रिकॉर्ड दुरुस्त कराने की गुहार लगा रहे हैं। परिवार का कहना है कि इदरीश खुद अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं कि वे अभी जिंदा हैं, फिर सरकारी कागजों में उन्हें मृत क्यों कर दिया गया। गंभीर रूप से बीमार होने के कारण लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाना उनके लिए और मुश्किल हो रहा है। बिना जांच जिंदा व्यक्ति को मृत दर्ज करने पर उठे सवाल परिजनों का आरोप है कि जमीन के दाखिल-खारिज जैसी प्रक्रिया में अगर जरूरी सत्यापन किया गया होता तो ऐसी गलती नहीं होती। सवाल यह भी है कि किसी व्यक्ति को मृत दर्ज करने से पहले उसके मृत्यु प्रमाणपत्र या अन्य जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं किया गया। सरकार बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार लोगों को जमीन से जुड़े कामों में सहूलियत देने और जरूरत पड़ने पर घर तक सेवाएं पहुंचाने की बात करती है। ऐसे में सरकारी रिकॉर्ड में जिंदा व्यक्ति को मृत दर्ज किए जाने की घटना ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीओ बोले- भूलवश हुई गलती, रिकॉर्ड में सुधार जारी इधर, बेलसंड के सीओ अशोक कुमार ने मामले पर सफाई देते हुए कहा कि इदरीश को रिकॉर्ड में मृत दर्ज किया जाना भूलवश हुई गलती है। मामले की जानकारी मिलने के बाद रिकॉर्ड में सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब देखना होगा कि सरकारी रिकॉर्ड में इदरीश की जिंदगी वापस दर्ज होने में कितना समय लगता है और इस गलती के लिए जिम्मेदार प्रक्रिया या कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या नहीं।



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