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बक्सर में मंगलवार को गोयल धर्मशाला में एक विचार गोष्ठी हुई। इसमें सिद्धाश्रम और भगवान वामन की जन्मभूमि बक्सर के ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा की गई। ‘सिद्धाश्रम–वामनाश्रम: सभ्यता विकास की आदि भूमि; संदर्भ आकांक्षा, संकल्प व सिद्धि’ विषय पर हुई इस गोष्ठी में पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री अश्विनी चौबे मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। इसका आयोजन श्रीराम कर्मभूमि न्यास ने किया था। गोष्ठी में सिद्धाश्रम की पुरानी परंपरा, भगवान वामन की जन्मभूमि के तौर पर बक्सर की पहचान और सनातन संस्कृति से जुड़े कई पहलुओं पर बात हुई। वक्ताओं ने कहा कि बक्सर सिर्फ एक ऐतिहासिक शहर नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक नजरिए से भी बहुत अहम है। ”सबको मिलकर कोशिश करनी होगी” यहां से जुड़ी पौराणिक परंपराओं और धार्मिक जगहों को बचाते हुए, इसकी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की जरूरत बताई गई। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि बक्सर में हुई इस गोष्ठी में सिद्धाश्रम और भगवान वामन की पवित्र जन्मभूमि से जुड़े ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर अच्छी चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि सिद्धाश्रम की गौरवशाली परंपरा और सनातन संस्कृति को बचाने और आगे बढ़ाने का यह मौका प्रेरणा देने वाला है। चौबे ने कहा कि बक्सर की पुरानी पहचान और धार्मिक महत्व को बड़े स्तर पर दिखाने के लिए सबको मिलकर कोशिश करनी होगी। विकास का संकल्प लेने का संदेश दिया सिद्धाश्रम और वामनाश्रम से जुड़ी मान्यताओं, परंपराओं और इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाना होगा। साथ ही, इनके संरक्षण और विकास की दिशा में भी काम करने की जरूरत है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने सिद्धाश्रम और वामन भगवान से जुड़ी परंपराओं को बक्सर की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए, इसके संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए ऐसे और आयोजनों की जरूरत बताई। गोष्ठी के जरिए ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने और इसके विकास का संकल्प लेने का संदेश दिया गया। आयोजकों ने कहा कि बक्सर की इस गौरवशाली विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए लगातार कोशिशें की जाएंगी।
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'बक्सर की प्राचीन पहचान के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी':पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे बोले- 'सिद्धाश्रम पर हुई सेमिनार में चर्चा'
