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90 साल पुरानी गणेश पूजा पर साउंड को लेकर पाबंदी:नालंदा में आयोजकों ने लाउडस्पीकर-जागरण की अनुमति मांगी; एसडीओ बोले- आवेदन आने पर अनुमति दी जाएगी




नालंदा जिला मुख्यालय बिहारशरीफ का ऐतिहासिक व्यापारिक इलाका सोहसराय इन दिनों गणेशोत्सव के बीच प्रशासनिक पाबंदियों को लेकर चर्चा में है। यहां आजादी से पहले से चली आ रही करीब नौ दशक पुरानी गणेश पूजा की परंपरा के आयोजक इस बार साउंड सिस्टम और भक्ति जागरण की अनुमति को लेकर परेशान हैं। आयोजकों का कहना है कि डीजे पर रोक का वे पहले से पालन करते आए हैं, लेकिन अब सामान्य लाउडस्पीकर और पारंपरिक भक्ति कार्यक्रमों की अनुमति नहीं मिलने से पूजा और मेले की रौनक प्रभावित हो रही है। 1932 में आलू-प्याज मंडी से शुरू हुई थी गणेश पूजा सोहसराय में गणेश पूजा की शुरुआत वर्ष 1932 में हुई थी। उस समय यह इलाका उत्तर भारत की बड़ी आलू-प्याज मंडियों में शामिल था। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात समेत दूसरे राज्यों से व्यापारी यहां महीनों तक खरीद-बिक्री के लिए आते थे। स्थानीय कारोबारी भी व्यापार के सिलसिले में महाराष्ट्र और बंबई जाते थे। महाराष्ट्र में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की ओर से शुरू किए गए सार्वजनिक गणेशोत्सव से प्रभावित होकर सोहसराय के आढ़तियों ने यहां भी सार्वजनिक गणेश पूजा शुरू की। इसी क्रम में वर्ष 1932 में पहली बार ‘गोला गणेश जी’ की स्थापना की गई। धीरे-धीरे यह पूजा सोहसराय की पहचान बन गई। 14 दिनों तक चलता है गोला गणेश जी का अनुष्ठान श्री गोला गणेश पूजा समिति के अध्यक्ष विनीत कुमार ने बताया कि करीब 15-20 साल पहले बाजार समिति बनने के बाद आलू-प्याज की गद्दियां यहां से दूसरी जगह चली गईं, लेकिन पूर्वजों की शुरू की धार्मिक परंपरा आज भी जारी है। उन्होंने बताया कि यहां गणेशोत्सव का आयोजन 14 दिनों तक चलता है। गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है। इसके बाद सुबह-शाम आरती, भजन और महाप्रसाद का आयोजन होता है। आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वितीया की रात शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। विसर्जन के साथ आयोजन पूरा होता है। विनीत कुमार का कहना है कि इतने वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को इस बार प्रशासनिक सख्ती के कारण पहले की तरह आयोजित करना मुश्किल हो रहा है। डीजे बंद किया तो माना, अब सामान्य साउंड पर भी रोक का आरोप सोहसराय के साईं मंदिर के पास वर्ष 2000 से गणेश पूजा का आयोजन कर रही समिति के सदस्य पिंटू कुमार ने कहा कि पिछले दो-तीन वर्षों से प्रशासन ने डीजे पर रोक लगाई है। समिति ने इसे स्वीकार किया, क्योंकि डीजे से ध्वनि प्रदूषण और विवाद की आशंका रहती है। उनका कहना है कि इस बार डीजे के साथ सामान्य साउंड सिस्टम और लाउडस्पीकर को लेकर भी अनुमति नहीं मिल रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब शादी-ब्याह जैसे आयोजनों में डीजे बजते हैं, तो धार्मिक मेलों में पारंपरिक साउंड सिस्टम पर भी रोक क्यों लगाई जा रही है। ‘सड़क पर मेला है तो दो भोंपू से कैसे चलेगा’ पिंटू कुमार ने कहा कि समिति ने लाइसेंस के लिए निर्धारित प्रारूप में आवेदन किया है और प्रशासन की सभी शर्तों का पालन करने को तैयार है। उनके अनुसार, समिति को सिर्फ दो छोटे लाउडस्पीकर लगाने की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि घर के अंदर होने वाली पूजा और सड़क पर लगने वाले सार्वजनिक मेले की जरूरत अलग होती है। डीजे पर रोक रहे, लेकिन पूजा और मेले के दौरान भक्ति गीत और जरूरी घोषणाओं के लिए बुनियादी साउंड सिस्टम की अनुमति मिलनी चाहिए। 1960 से गणेश प्रतिमा स्थापित कर रहा क्रांति युवा संघ सोहसराय के कटहल टोला, मनिहारी गली हनुमान मोड़ में क्रांति युवा संघ वर्ष 1960 से गणेश प्रतिमा स्थापित कर रहा है। समिति के सदस्यों के अनुसार, वर्ष 2005 में तत्कालीन नालंदा जिलाधिकारी ने शांतिपूर्ण और भव्य आयोजन के लिए समिति को ‘नालंदा का गौरव’ सम्मान दिया था। समिति के सदस्य गुड्डू और पूर्व कार्यकर्ता श्रवण कुमार ने बताया कि पहले यहां बड़े स्तर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होते थे। बाद में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अनुमति से जुड़ी पाबंदियों के बाद समिति ने अपने आयोजन को भक्ति जागरण में बदल दिया। इसके बाद कई वर्षों तक गणेशोत्सव के दौरान रात में भक्ति जागरण होता रहा और बाहर से भजन गायक भी आते रहे। दो साल से जागरण की अनुमति नहीं मिलने का दावा श्रवण कुमार ने दावा किया कि पिछले दो वर्षों से प्रशासन की ओर से भक्ति जागरण के लिए लाइसेंस नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि अनुमति मांगने पर अधिकारियों की ओर से ऊपर से सख्त आदेश होने की बात कही जाती है। समिति के सदस्यों का कहना है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस-प्रशासन का सहयोग करते रहे हैं। इसलिए उनका आग्रह है कि भजन-कीर्तन और जागरण जैसे कार्यक्रमों के लिए नियमों के तहत अनुमति दी जाए। आयोजकों ने कहा- परंपरा और नियम दोनों साथ चलें सोहसराय के अलग-अलग पूजा पंडालों के आयोजकों का कहना है कि वे प्रशासन की ओर से तय नियमों का पालन करने के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था जरूरी है, लेकिन इसके साथ करीब 90 साल पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। आयोजकों ने मांग की है कि डीजे पर प्रतिबंध बरकरार रखते हुए पूजा, भक्ति गीत, जागरण और मेले के संचालन के लिए नियमों के तहत सामान्य साउंड सिस्टम की अनुमति दी जाए। एसडीओ बोले- आवेदन आएगा तो जागरण की अनुमति दी जाएगी बिहारशरीफ सदर एसडीओ कृषलय श्रीवास्तव ने बताया कि अगर आयोजकों की ओर से जागरण कराने के लिए आवेदन आता है तो उसे स्वीकृत किया जाएगा।



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