Headlines

Aja Ekadashi Vrat 2026 | Lord Vishnu Shiva Worship Rituals & Puja Tips


3 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

कल (सोमवार,7 सितंबर) अजा एकादशी व्रत है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहते हैं। एकादशी तिथि के स्वामी भगवान विष्णु माने जाते हैं। मान्यता है कि इस तिथि पर व्रत और पूजा करने से भक्त के जाने-अनजाने में हुए पापों का फल खत्म होता है और भगवान विष्णु की कृपा से सुख-शांति और सफलता मिलती है।

ग्रंथों में एकादशी को पवित्र और पापनाशिनी तिथि बताया गया है। स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में एकादशी व्रत की महिमा के बारे में विस्तार से लिखा है। अजा एकादशी के व्रत को लेकर मान्यता है कि विधि-विधान से यह व्रत करने वाले भक्त को सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है। श्रद्धालु इस दिन अन्न का त्याग करते हैं, भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, दिनभर संयम रखते हैं और भगवान के नाम का स्मरण करते हैं।

एकादशी के साथ सोमवार का संयोग

इस बार अजा एकादशी सोमवार को पड़ रही है। ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, सोमवार का संबंध शिव जी से है। ज्योतिष में सोमवार का कारक ग्रह चंद्र को माना जाता है। ऐसे में इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ शिव जी और चंद्र देव की पूजा करने का योग बना है।

जिन लोगों की कुंडली में चंद्र से जुड़े दोष हैं, उन्हें हर सोमवार शिव जी का विशेष अभिषेक करना चाहिए। शिवलिंग पर जल, दूध और पंचामृत चढ़ाएं। बिल्व पत्र, हार-फूल से श्रृंगार करें। शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं। मिठाई का भोग लगाएं। ऊँ सों सोमाय नम: मंत्र का जप करें। धूप-दीप जलाकर आरती करें।

सूर्य पूजा से करें दिन की शुरुआत

एकादशी की सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद उगते सूर्य देव को जल चढ़ाना चाहिए। इसके लिए तांबे के लोटे का इस्तेमाल करें। लोटे में जल भरें और फिर उसमें कुमकुम, चावल, फूल डालें। ॐ सूर्याय नमः मंत्र का जप करते हुए सूर्य को जल चढ़ाएं।

सूर्य को अर्घ्य चढ़ाने के बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु के सामने एकादशी व्रत करने का संकल्प लें। घर के मंदिर में विष्णु जी की पूजा में पंचामृत से अभिषेक करें। भगवान को तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार जप करें।

एकादशी पर तुलसी पूजा का भी है महत्व

भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व है। एकादशी की सुबह तुलसी के पौधे को जल अर्पित करें और शाम को उसके पास दीपक जलाएं। श्रद्धालु तुलसी की परिक्रमा भी कर सकते हैं। ध्यान रखें, सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्ते तोड़ने या पौधे को स्पर्श करने से बचना चाहिए।

तुलसी पूजा में तुलसी नामाष्टक का पाठ भी किया जा सकता है।

वृंदा, वृन्दावनी, विश्वपुजिता, विश्वपावनी। पुष्पसारा, नंदिनी च तुलसी, कृष्णजीवनी।।

एतन्नामाष्टकं चैतत्स्तोत्रं नामार्थसंयुतम्। यः पठेत्तां च संपूज्य सोऽश्वमेधफलं लभेत्।।

व्रत के साथ दान-पुण्य और सेवा भी करें

एकादशी पर पूजा के साथ सेवा और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। जरूरतमंदों को अनाज, कपड़े, जूते, छाता या भोजन दान करें। किसी गौशाला में दान करें। गायों को हरी घास खिलाएं। रोगी और वृद्ध लोगों की सेवा करें। पक्षियों के लिए छत पर दाना-पानी रखना, चींटियों के लिए आटा-शक्कर रखना और जरूरतमंद बच्चों को भोजन और मिठाई खिलाना भी सेवा के सरल तरीके हैं। बच्चों को पढ़ाई की चीजें भी दान कर सकते हैं।

द्वादशी पर भी करें विशेष पूजा

जो भक्त एकादशी का निर्जल या फलाहार व्रत रखते हैं, वे पूरे दिन अन्न से परहेज करते हुए भगवान विष्णु का ध्यान करते हैं। सुबह और शाम पूजा करने के साथ मंत्र जप किया जाता है। अगले दिन द्वादशी पर स्नान और पूजा के बाद जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराने की परंपरा है। इसके बाद भक्त स्वयं भोजन करके व्रत पूरा करते हैं।

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

    OpenBuk Bharat (ओपनबुक भारत) आपका भरोसेमंद डिजिटल न्यूज़ पोर्टल है। हम राष्ट्रीय, प्रादेशिक (बिहार), वाणिज्य, और मनोरंजन जगत की हर बड़ी खबर निष्पक्षता और सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।