Headlines

गया में शिक्षक दिवस पर शिक्षक संवाद-सम्मान समारोह:जीवन कुमार बोले- गुणवत्ता वाली शिक्षा से ही बनेगा विकसित बिहार; अगले 3 साल शिक्षा की गुणवत्ता पर फोकस




गया शहर के हरिदास सेमिनरी ऑडिटोरियम में शनिवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षक संवाद और सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बिहार की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने, स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और प्रधानाध्यापकों व शिक्षकों की भूमिका को प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई। समारोह में शिक्षा जगत से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया। मुख्य अतिथि के तौर पर अतरी विधायक रोमित कुमार और बिहार विधान परिषद गया शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के सदस्य एमएलसी जीवन कुमार मौजूद रहे। इसके अलावा जगजीवन कॉलेज के पूर्व प्राचार्य सत्येंद्र प्रजापति, मगध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रोफेसर दिलीप कुमार केशरी, कुलसचिव डॉ. प्रोफेसर विनोद कुमार मंगलम, कोंच विधायक अजय दांगी, जिला शिक्षा पदाधिकारी कृष्ण मुरारी गुप्ता, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी माध्यमिक शिक्षा आनंद कुमार, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना सुमित कुमार सौरभ, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी एसएसए एवं प्राथमिक शिक्षा नित्यम कुमार गौरव और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी योजना गौरव राज सहित अन्य अधिकारी व गणमान्य लोग उपस्थित रहे। एमएलसी जीवन कुमार ने शिक्षकों को किया सम्मानित शिक्षक दिवस के मौके पर एमएलसी जीवन कुमार ने मौजूद शिक्षकों को शॉल देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का योगदान समाज और राष्ट्र निर्माण की बुनियाद है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बिना विकसित बिहार की कल्पना नहीं की जा सकती। कार्यक्रम में शिक्षकों से बातचीत करते हुए उनकी भूमिका, चुनौतियों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरतों पर चर्चा की गई। वित्त रहित शिक्षकों को वेतनमान देने की घोषणा को बताया अहम कदम समारोह में बिहार की शिक्षा व्यवस्था में हुए जरूरी बदलावों के बारे में भी जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं। वित्त रहित शिक्षा व्यवस्था से जुड़े शिक्षकों को वेतनमान देने की घोषणा को बड़ा कदम बताया गया। वक्ताओं के अनुसार इस मांग को लेकर करीब 40 वर्षों से संघर्ष चला था। नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा दिए जाने को भी शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव बताया गया। वक्ताओं के अनुसार इससे शिक्षकों की आर्थिक परेशानियां कम हुई हैं और वेतन भुगतान की व्यवस्था में सुधार आया है। हालांकि कुछ शिक्षक अभी भी इस प्रक्रिया से बाहर हैं, जिनके लिए समाधान तलाशने की बात कही गई। स्थानांतरण नीति से शिक्षकों को मिली राहत कार्यक्रम में शिक्षकों की लंबे समय से लंबित स्थानांतरण नीति लागू किए जाने पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि इसके माध्यम से बड़ी संख्या में शिक्षक अपने गृह जिले और प्रखंड में वापस लौट सके हैं। वर्षों से घर से दूर रहकर सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए इसे बड़ी राहत बताया गया। इसके साथ ही प्राचार्यों और अतिथि शिक्षकों को स्थानांतरण नीति में शामिल करने, शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा नियमों की समीक्षा के लिए समिति गठित करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। अगले तीन साल में शिक्षा की गुणवत्ता पर रहेगा फोकस कार्यक्रम में शिक्षा क्षेत्र के लिए आने वाले तीन वर्षों की प्राथमिकताओं पर विशेष जोर दिया गया। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मॉडल स्कूलों का विकास और प्रखंड स्तर पर कॉलेजों का विस्तार प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताए गए। वक्ताओं ने कहा कि प्रखंड स्तर पर उच्च शिक्षा के संस्थानों का विस्तार होने से विशेष रूप से छात्राओं को फायदा होगा। उन्हें उच्च शिक्षा के लिए 50 से 80 किलोमीटर दूर जाने की मजबूरी कम होगी। बेहतर कार्य वातावरण और सुविधाएं देने पर जोर समारोह में इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षकों को सम्मान, बेहतर कार्य वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी जरूरी है। वक्ताओं ने बिहार को देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का बेहतर मॉडल बनाने के लक्ष्य के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया। समारोह ने शिक्षकों में नई ऊर्जा और जिम्मेदारी का संदेश दिया।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *