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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर बेगूसराय में बिहार का सबसे बड़ा जन्माष्टमी मेला का आयोजन किया गया है। ये मेला वृंदावन के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा जन्माष्टमी मेला भी है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह शनिवार शाम करीब 6 बजे उद्घाटन करेंगे। उनके साथ प्रभारी मंत्री रामकृपाल यादव, कला संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार, गन्ना मंत्री संजय पासवान के साथ जिले के अन्य विधायक भी मौजूद रहेंगे। इससे पहले शुक्रवार की देर रात तेघड़ा की गलियां भगवान श्रीकृष्ण के भक्तिरस से सराबोर हो गई है। पूरे जिले में मध्य रात में श्रीकृष्ण का जन्म होते ही वातावरण ‘नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की’ से गूंज उठी। बिहार का सबसे बड़ा जन्माष्टमी मेला लगने के कारण चप्पे-चप्पे में श्रीकृष्ण भजन की धूम मच गई और लोग कृष्ण की भक्ति में रम गए। जन्म काल पूरा होने के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान का स्नान, अभिषेक, पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन किया गया। जगह-जगह भजन और भाव नृत्य का आयोजन किया गया। तेघड़ा में लगे मेले की तीन तस्वीरें देखिए तेघड़ा में मेला देखने नेपाल से भी श्रद्धालु आते हैं तेघड़ा, गढ़हारा, बरौनी एवं उसके आसपास लगने वाला श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेला बिहार का सबसे बड़ा और भारत का दूसरा सबसे बड़ा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेला है। यहां मेला देखने के लिए बिहार ही नहीं, नेपाल, बंगाल, राजस्थान, दिल्ली, यूपी, असम, उड़ीसा, झारखंड के साथ विदेशों में रहने वाले तेघड़ा और आसपास के प्रवासी भारतीय भी आते हैं। 1927 में तेघड़ा में मात्र एक जगह से शुरू मेला आज सिर्फ तेघड़ा के 17 पंडालों में सज रहा है। अब तो तेघड़ा से चकिया तक करीब 20 किलोमीटर में 50 से अधिक जगहों पर पूजा-अर्चना हो रही है। तेघड़ा का ऐतिहासिक श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेला ना सिर्फ देश का दूसरा सबसे बड़ा मेला है, बल्कि यह धर्मनिरपेक्षता की अदभूत मिसाल प्रस्तुत करता है। अब जानिए, तेघड़ा में लगने वाले जन्माष्टमी मेले का इतिहास तेघड़ा उत्तरी क्षेत्र मेला समिति के अध्यक्ष भूपेश कुमार बताते हैं कि 1926 में तेघड़ा और आसपास के इलाकों में प्लेग महामारी के रूप में फैल गई थी। लोगों ने दूसरे जगह जाकर रहना शुरू कर दिया था, महामारी से बचने के लिए तेघड़ा के लोगों ने कई यज्ञ, अनुष्ठान, तंत्र-मंत्र का सहारा लिया, लेकिन कोई प्रभाव नहीं पड़ा। इसी बीच 27-28 फरवरी 1926 को भारत भ्रमण के लिए निकली चैतन्य महाप्रभु की कीर्तन मंडली तेघड़ा पहुंची, तो यहां की दुर्दशा देख चौंक गई। लोगों की स्थिति देख कर मंडली ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव (जन्माष्टमी) मनाने की सलाह दी तथा चैतन्य महाप्रभु की मंडली के सलाह पर 1927 पहली बार वंशी पोद्दार के नेतृत्व में तेघड़ा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। इसके बाद तेघड़ा में लोगों को प्लेग महामारी से मुक्ति मिली और तब से हर साल यहां मेला लगता है। समय के साथ मेला का आकार भी बढ़ता चला तथा तेघड़ा मेला में मंडपों की संख्या भी बढ़ती चली गई। तेघड़ा से शुरू होकर यह मेला रेलवे कॉलोनी बरौनी, गढ़हारा, बीहट, चकिया, सुशील नगर, लाखो, सूजा, वनद्वार, पहसारा होते हुए मंसूरचक तक पहुंच गया है। मेला के आकर्षण का केंद्र आकाश झूला, मौत का कुआं, जादूगर, ड्रैगन ट्रेन, मीना बाजार तमाम जगहों पर मेला के आकर्षण का केंद्र आकाश झूला, मौत का कुआं, जादूगर, ड्रैगन ट्रेन, मीना बाजार आदि लग गया है। पूजा मंडपों समेत संपूर्ण मेला क्षेत्र को आकर्षक ढ़ंग से सजाकर इसे ऐतिहासिक बनाया गया है। विधि व्यवस्था को लेकर स्थानीय प्रशासन जागरूक है, सभी गतिविधियां हो गई है।
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बेगूसराय में बिहार का सबसे बड़ा जन्माष्टमी मेला:वृंदावन के बाद देश का दूसरा बड़ा आयोजन; 20 किलोमीटर की रेंज में 50 से अधिक पंडाल
