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Aurangabad Krishna Janmashtami 2026 | Temple Decoration & Jhanki Updates


औरंगाबाद में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर उत्साह और भक्ति का माहौल है। जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड और ग्रामीण क्षेत्रों तक मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। औरंगाबाद शहर में कामा बीघा रोड, बाइपास स्थित पंचदेव धाम मंदिर, काली क्लब, नावाडीह, साईं

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मंदिरों को फूलों, रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक सजावट से सजाया गया। जगह-जगह भगवान श्रीकृष्ण की झांकियां और बाल स्वरूप में प्रतिमाएं आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। जन्माष्टमी का उत्साह केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहा।

घर-घर में भगवान कृष्ण के जन्म की बधाइयां गूंजती रहीं। बच्चे कृष्ण-कन्हैया का रूप धारण कर लोगों का मन मोहते दिख रहे। किसी ने पीला वस्त्र पहनकर कान्हा का रूप बनाया तो किसी ने सिर पर मुकुट और मोरपंख सजाया।

बच्चों ने कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ी प्रस्तुतियां भी दीं। श्रृंगार और पूजा सामग्री की दुकानों पर कृष्ण के वस्त्र, मुकुट, माला, मोरपंख और अन्य सामग्री की खूब मांग रही।

इस्कॉन मंदिर में लगी श्रद्धालुओं की भीड़

इस्कॉन मंदिर में लगी श्रद्धालुओं की भीड़

इस्कॉन मंदिर में तीन दिवसीय जन्माष्टमी महोत्सव

शहर के फार्म एरिया स्थित रघुनंदन नगर के इस्कॉन मंदिर में तीन दिवसीय जन्माष्टमी महोत्सव का आगाज अधिवास कीर्तन से हुआ। 4 सितंबर को मुख्य जन्माष्टमी आयोजन में शाम चार से सात बजे तक विशेष हरिनाम संकीर्तन हुआ। शाम 7 बजे भगवान श्रीकृष्ण का भव्य महाभिषेक किया गया।

रात 9 बजे से सांस्कृतिक-आध्यात्मिक कार्यक्रम हुए।

मटकी फोड़ कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहेगा

‘सीधी बात प्रभुजी के साथ’ आध्यात्मिक संवाद, भव्य महाआरती और मटकी फोड़ कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। प्रस्तावित इस्कॉन मंदिर का 3डी मॉडल श्रद्धालुओं को देखने को मिलेगा। बच्चों और युवाओं के लिए चित्रकला और हस्तकला प्रतियोगिता भी आयोजित होगी।

5 सितंबर को नंदोत्सव के साथ इस्कॉन के संस्थापक आचार्य श्रील प्रभुपाद जी का आविर्भाव दिवस मनाया जाएगा। दोपहर 12 से शाम पांच बजे तक विशाल निःशुल्क भंडारा प्रसाद का आयोजन होगा। इस्कॉन औरंगाबाद बिहार के अध्यक्ष अभय अच्युत दास ने शहरवासियों से परिवार सहित महोत्सव में शामिल होने की अपील की। जनसंपर्क प्रमुख युगनायक दास ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुरक्षा, चिकित्सा सहायता और पार्किंग की व्यवस्था की गई है।

श्री कृष्ण के वेश में बच्चे।

श्री कृष्ण के वेश में बच्चे।

अंबा के सतबहिनी मंदिर परिसर में 6 साल से मन रहा जन्माष्टमी उत्सव

कुटुंबा प्रखंड मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भी जन्माष्टमी को लेकर उत्साह है। मां सतबहिनी मंदिर, दुर्गा मंदिर, राधे-कृष्ण मंदिर दोस्ताना परसांवा, रसलपुर ठाकुरबारी, श्रीकृष्णपुरी ठाकुरबारी, कल्पवृक्ष धाम परता और पंचदेव धाम चपरा समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों पर विशेष आयोजन किए गए।

मंदिरों को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया और भगवान श्रीकृष्ण की झांकियां स्थापित की गईं। मां सतबहिनी मंदिर परिसर में श्रीकृष्ण कन्हैया सतबहिनी सेवा समिति के तत्वावधान में तीन दिवसीय जन्माष्टमी महोत्सव आयोजित किया गया।

समिति पिछले 6 वर्षों से यह आयोजन करती आ रही है। भव्य पंडाल में भगवान श्रीकृष्ण की आकर्षक आकृतियां और सजावट श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रही। रात में 12:00 बजे भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

महोत्सव के दूसरे दिन औरंगाबाद के दानिका संगीत महाविद्यालय के कलाकार सांस्कृतिक एवं भक्तिमय प्रस्तुति देंगे। तीसरे दिन भव्य भंडारा का आयोजन किया जाएगा। जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे। आयोजन समिति के अध्यक्ष दीपक पाठक, उपाध्यक्ष विनय गुप्ता, सचिव सुधीर सिंह, कोषाध्यक्ष सोनू कुमार, उप-सचिव बिहारी साव सहित अन्य सदस्यों ने बताया कि सांस्कृतिक संध्या में कृष्ण की लीलाओं और भक्ति गीतों पर आधारित प्रस्तुतियां होंगी।

सतबहिनी मंदिर को आकर्षक तरीके से सजाया गया ।

सतबहिनी मंदिर को आकर्षक तरीके से सजाया गया ।

जन्माष्टमी बनी संस्कृति, शिक्षा और सेवा का संगम

जिले के अन्य प्रखंडों में भी जन्माष्टमी की धूम रही। देव, गोह, रफीगंज, हसपुरा, मदनपुर, बारुण, दाउदनगर और नबीनगर में मंदिरों को सजाया गया और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, बाल रूप सज्जा प्रतियोगिता और भक्ति संध्या का आयोजन हुआ।

रफीगंज में समाज सेवा समिति बिहार की ओर से निजी हॉल में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। वहीं सरस्वती शिशु मंदिर वार में राधा-कृष्ण बाल रूप सजा प्रतियोगिता सह सांस्कृतिक कार्यक्रम में बच्चों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।गोह प्रखंड मुख्यालय में श्रीकृष्ण सामाजिक सेवा संस्थान के महोत्सव में शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और समाजसेवा को भी जोड़ा गया। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल 70 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।



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