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भोजपुर में किसानों की समस्याओं और कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को लेकर अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर तले एक दिवसीय धरना आयोजित किया गया। किसानों और संगठन के कार्यकर्ताओं ने केंद्र-राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने खेत-खेती-किसान बचाओ, कॉरपोरेट लूट का राज मिटाओ और भारत-अमेरिका कृषि समझौता खारिज करो जैसे नारे लगाए। धरना के माध्यम से सिंचाई, बिजली, खाद, कर्ज और जमीन से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। कर्ज माफ करने की मांग किसान नेता राजू यादव ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार भारत-अमेरिका कृषि समझौता कर देश की कृषि अर्थव्यवस्था को संकट में डालना चाहती है। आरोप लगाया कि बिहार में भाजपा की सरकार बनने के बाद कॉरपोरेट घरानों का प्रवेश बढ़ा है और किसानों की जमीन को औने-पौने दाम पर बड़े उद्योगपतियों को दिए जाने की तैयारी की जा रही है। टाउनशिप, सैटेलाइट और वाटर पार्क के नाम पर किसानों की हजारों एकड़ जमीन लिए जाने का भी उन्होंने विरोध किया। कहा कि साल 2019 में प्रधानमंत्री की ओर से किसानों को समर्थन मूल्य देने की घोषणा की गई थी, लेकिन आज तक किसानों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाया है। किसानों पर लाखों रुपए का कर्ज है, इसलिए सरकार को सभी तरह के कर्ज माफ करने चाहिए। किसानों के लिए बिजली उपलब्ध कराने की मांग धरनार्थियों ने भोजपुर में सिंचाई व्यवस्था की बदहाली का मुद्दा भी उठाया। किसान नेताओं ने कहा कि कम बारिश के कारण जिले के कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। अगस्त का आधा महीना बीतने के बाद भी कई नहरों के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच सका है। जिले के कई सरकारी नलकूप वर्षों से बंद पड़े हैं। खेतों तक बिजली के पोल पहुंचने के बावजूद कई जगह ट्रांसफार्मर नहीं लगाए गए हैं। किसानों ने कृषि कार्य के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग की। ‘कीमत बढ़ने से किसानों की परेशानी बढ़ी’ किसान महासभा ने खाद की उपलब्धता और कीमत को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि किसानों को सरकारी मूल्य पर खाद नहीं मिल पा रही है। पहले 50 किलो का बोरा मिलता था, जिसे घटाकर 45 किलो कर दिया गया है। कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है। इससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। धरना के दौरान कदवन जलाशय का निर्माण, सोन नहर का आधुनिकीकरण, नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने, बंद सरकारी नलकूपों को चालू करने, कृषि के लिए पर्याप्त बिजली और ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराने तथा सरकारी दर पर खाद देने की मांग की गई। रजिस्ट्री फीस वापस लेने की मांग रखी इसके अलावा किसानों के सरकारी कर्ज माफ करने, फर्जी बिजली बिल वापस लेने, किसान-मजदूरों के घरों पर वार्षिक टैक्स लगाने की नीति वापस लेने और जमीन की बढ़ी हुई रजिस्ट्री फीस वापस लेने की मांग भी रखी गई। महासभा ने सरकारी अस्पतालों में मोबाइल से मरीज देखने की व्यवस्था बंद कर पुराने पुर्जा सिस्टम को लागू करने की मांग भी सरकार के समक्ष रखी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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किसानों की समस्याओं को लेकर महासभा का धरना:भारत-अमेरिका कृषि समझौते का विरोध; सिंचाई के लिए बिजली, बंद नलकूपों को चालू करने की मांग
