![]()
चमोली में शुक्रवार को हुए हेलिकॉप्टर क्रैश के बाद उत्तराखंड में चारधाम हेली सेवाओं की सुरक्षा को लेकर नए नियम लागू होने से पहले ही विवाद शुरू हो गया है। इसके चलते सोमवार को चमोली, गंगोत्री और यमुनोत्री में हेली सेवाएं बंद हैं। वहीं, केदारनाथ में लंबी दूरी की पर्सनल चार्टर सेवाओं का संचालन नहीं हो रहा है। दरअसल, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने चार्टर हेलिकॉप्टर सेवाओं में दो पायलट अनिवार्य करने समेत कई नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये 2 नवंबर से लागू होने हैं। इनका विरोध करते हुए 11 हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों ने सोमवार से चार्टर सेवाएं बंद करने की चेतावनी दी थी। ऑपरेटरों ने 31 अक्टूबर को DGCA को सामूहिक लेटर भेजकर नए नियमों पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि हर उड़ान में दो पायलट अनिवार्य करने से संचालन का खर्च काफी बढ़ जाएगा। पायलटों की नियुक्ति, ठहरने और अन्य व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त खर्च आएगा। मौजूदा किराए पर इतनी लागत के साथ सेवाएं चलाना आर्थिक रूप से संभव नहीं होगा। 10 नवंबर बंद होंगे गंगोत्री के कपाट केदारनाथ में सामान्य हेली सेवाओं का संचालन जारी है। यहां DGCA ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) का कंट्रोल रूम बनाया है, जहां से मौसम और उड़ानों की पल-पल की जानकारी के आधार पर हेलिकॉप्टरों को उड़ान की अनुमति दी जा रही है। नए दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने के कारण लंबी दूरी की पर्सनल चार्टर सेवाएं संचालित नहीं हो रही हैं। वहीं, गंगोत्री के कपाट 10 नवंबर, केदारनाथ और यमुनोत्री के 11 नवंबर, जबकि बद्रीनाथ के कपाट 16 नवंबर को बंद होंगे। इसके साथ ही चारों धामों में इस साल की ग्रीष्मकालीन यात्रा का समापन हो जाएगा। नियम लागू करने से पहले ऑपरेटरों से नहीं की चर्चा ऑपरेटरों ने लेटर में कहा कि वे विमानन सुरक्षा और DGCA के नियमों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने हिमालय के चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में सुरक्षित संचालन के लिए पहले भी संसाधन लगाए हैं। हालांकि, नए नियम लागू करने से पहले ऑपरेटरों से पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। उनका कहना है कि सुरक्षा से जुड़े नए प्रावधान व्यावहारिक और आर्थिक रूप से टिकाऊ होने चाहिए। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा स्वरूप में दो पायलटों की अनिवार्यता स्वीकार नहीं है। इसलिए सभी 11 ऑपरेटरों ने 2 नवंबर से चारधाम चार्टर सेवाओं का संचालन स्थगित करने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने DGCA और UCADA से जल्द बैठक कर कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाने की मांग की है। हर उड़ान से पहले लेनी होगी अनुमति नए दिशा-निर्देशों में दो पायलटों की अनिवार्यता के अलावा उड़ान की अनुमति लेने की प्रक्रिया भी सख्त की गई है। इसके तहत चार्टर हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों को उड़ान भरने से पहले सहस्रधारा में तैनात UCADA के हेड ऑफ ऑपरेशंस से गंतव्य की मंजूरी लेनी होगी। इसका उद्देश्य हेलिकॉप्टरों की आवाजाही पर निगरानी रखना और संचालन को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुनिश्चित करना है। चारधाम क्षेत्र में हेलिकॉप्टर संचालन की सुरक्षा को लेकर यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब शुक्रवार को चमोली के ज्योतिर्मठ में बद्रीनाथ से देहरादून आ रहा एक हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया था। हादसे में पायलट समेत 6 लोगों की मौत हो गई थी। 38 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद रविवार सुबह सभी शव बरामद किए गए। इसके बाद शाम को शव एम्स ऋषिकेश से देहरादून एयरपोर्ट लाए गए। यहां से इंडिगो की फ्लाइट के जरिए उन्हें उनके घर भेजा गया।हेलिकॉप्टर ने शुक्रवार दोपहर करीब 1:14 बजे बद्रीनाथ से देहरादून के सहस्रधारा के लिए उड़ान भरी थी। जोशीमठ घाटी के ऊपर उड़ान के दौरान उसका संपर्क टूट गया था। 10 साल में 13 हादसे, 27 मौतें हादसे की जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) कर रहा है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी हादसे की जांच के निर्देश दिए थे। केंद्र सरकार के मुताबिक, 2016 से 2026 के बीच उत्तराखंड में 13 हेलिकॉप्टर हादसे हुए हैं। इनमें 27 लोगों की मौत हुई है। ऐसे में सुरक्षा नियमों को लेकर सरकार और ऑपरेटरों के बीच शुरू हुआ विवाद अब चारधाम क्षेत्र में हेलिकॉप्टर सेवाओं के संचालन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
Source link
हेलिकॉप्टर क्रैश मामला- चारधाम में हेली सेवा बंद:दो पायलट अनिवार्य करने का विरोध; अधिकारी बोले- उड़ान से पहले लेनी होगी परमिशन
