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17 मिनट पहले
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दिल्ली में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग से सवाल किए। कोर्ट ने पूछा कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर करीब 43 लाख मतदाताओं में जिनके नाम ‘शिफ्टेड या अनुपस्थित’ श्रेणी में दर्ज हैं, उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने के लिए Form-6 भरने को क्यों कहा जा रहा है।
यह फॉर्म नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन के लिए होता है, जबकि ये लोग पहले से ही वोटर लिस्ट में शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि फॉर्म 6, 7 और 8 में बदलाव नहीं किया जा सकता है।
दिल्ली में SIR से पहले करीब 1.45 करोड़ मतदाता थे। 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में करीब 97.53 लाख नाम शामिल किए गए। इस तरह लगभग 47.57 लाख नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर रहे।

Form-6, 7 और 8 का इस्तेमाल क्यों होता है
| फॉर्म | इस्तेमाल |
| Form-6 | वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए |
| Form-7 | आपत्ति या नाम हटाने के लिए आवेदन |
| Form-8 | दर्ज जानकारी में सुधार, पता बदलने और अन्य निर्धारित बदलावों के लिए |
फॉर्म 6 पर विवाद क्या है?
फॉर्म 6 का विवाद तब शुरू हुआ जब पिछले महीने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने रिपोर्ट दी कि दो चुनाव आयुक्तों ने SIR के फॉर्म 6 बदलावों पर आपत्ति जताई थी। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। Form-6 को लेकर विपक्ष का मुख्य आरोप है कि चुनाव आयोग ने नए मतदाताओं के फॉर्म में SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा जोड़कर नियमों का उल्लंघन किया और पहली बार वोटर बनने वालों के लिए अनावश्यक बाधा खड़ी की।
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सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच में हुई। चुनाव आयोग की ओर से सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्रि नायडू ने पक्ष रखा। अन्य प्रमुख वकीलों में सीनियर एडवोकेट मनींदर सिंह और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता भी शामिल रहे हैं।
- बेंच ने कहा, जो किसी वजह से अपना एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं कर सके। जिन लोगों के नाम पहले वोटर लिस्ट में थे और अब नहीं हैं, उन्हें ‘नए वोटर’ मानने के बजाय उनकी स्थिति के मुताबिक समाधान निकालें।
- बेंच ने कहा कि फॉर्म 6, 7 और 8 तय फॉर्मेट हैं। चुनाव आयोग इनमें बदलाव नहीं कर सकता।
- बेंच ने पूछा कि राष्ट्रीय राजधानी में निकट भविष्य में कोई चुनाव नहीं होने पर इतनी जल्दी (30 अक्टूबर) की समयसीमा क्यों रखी जा रही है।
- कोर्ट ने कहा, ‘नाम दोबारा दर्ज कराने के लिए कट-ऑफ तारीख तय न करें। चीफ जस्टिस ने कहा कि चुनाव आयोग को सिर्फ वोटरों के आवेदन का इंतजार नहीं करना चाहिए। आयोग को खुद वोटरों तक पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए।
- इसके बाद चुनाव आयोग ने आवेदन जमा करने की समयसीमा बढ़ाने की इच्छा जताई है।

