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रक्षा सचिव राजेश सिंह का कार्यकाल एक साल बढ़ा:अब 2027 में रिटायरमेंट, मोदी सरकार में सबसे लंबे कार्यकाल वाले दूसरे डिफेंस सेक्रेटरी होंगे




केंद्र सरकार ने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह का कार्यकाल एक साल बढ़ा दिया है। अब वे 31 अक्टूबर 2027 तक या अगले आदेश तक जो भी पहले हो, इस पद पर बने रहेंगे। उनका मौजूदा कार्यकाल 31 अक्टूबर 2026 को समाप्त होने वाला था। राजेश कुमार सिंह ने 1 नवंबर 2024 को 40वें रक्षा सचिव के रूप में कार्यभार संभाला था। 31 अक्टूबर 2027 तक रिटायर होने तक वे करीब 1095 दिन तक इस पद पर रहेंगे। मोदी सरकार में किसी रक्षा सचिव का यह दूसरा सबसे लंबा कार्यकाल होगा। डॉ. अजय कुमार 1,166 दिनों तक भारत के रक्षा सचिव रहे थे। केरल कैडर के 1989 बैच के IAS अधिकारी राजेश कुमार सिंह को रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा देने और DRDO में सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए एक साल का एक्सटेंशन दिया गया है। राजेश सिंह के पास DRDO अध्यक्ष की अतिरिक्त जिम्मेदारी 31 मई 2024 से राजेश सिंह के पास रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार भी है। मई में कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) के एक आदेश के तहत उन्हें यह अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई थी, जब समीर वी. कामत का कार्यकाल पूरा हो गया था। कामत 25 अगस्त 2022 से DRDO के प्रमुख थे। यह व्यवस्था तब तक के लिए थी जब तक कि कोई स्थायी प्रमुख नियुक्त नहीं हो जाता या अगला आदेश नहीं आ जाता। तब से अब तक DRDO के किसी स्थायी प्रमुख की नियुक्ति नहीं हुई है। डिफेंस सेक्रेटरी रक्षा मंत्रालय का सबसे बड़ा अधिकारी होता है भारत में रक्षा सचिव (डिफेंस सेक्रेटरी) रक्षा मंत्रालय का सबसे सीनियर प्रशासनिक अधिकारी होता है। वह सरकार की रक्षा नीतियों को लागू कराने, सेना से जुड़े प्रशासनिक और वित्तीय मामलों के समन्वय तथा रक्षा मंत्रालय के कामकाज को संचालित करने में अहम भूमिका निभाता है। ध्यान दें कि रक्षा सचिव और रक्षा मंत्री अलग-अलग पद हैं। रक्षा मंत्री राजनीतिक नेतृत्व करते हैं, जबकि रक्षा सचिव मंत्रालय के प्रशासनिक कामकाज का नेतृत्व करते हैं। रक्षा सचिव की प्रमुख जिम्मेदारियां 1. रक्षा मंत्रालय का प्रशासन चलाना: मंत्रालय की विभिन्न शाखाओं के बीच समन्वय करना, सरकारी फैसलों को लागू कराना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की निगरानी करना। 2. रक्षा नीतियों और सरकारी फैसलों पर काम करना: रक्षा से जुड़े प्रस्तावों, नीतियों और महत्वपूर्ण मामलों को तय सरकारी प्रक्रियाओं के तहत आगे बढ़ाना तथा जरूरत के अनुसार सरकार को प्रशासनिक सलाह देना। 3. रक्षा बजट और खर्च से जुड़े मामलों का कॉर्डिनेशन: रक्षा मंत्रालय के वित्तीय प्रस्तावों, खर्च, संसाधनों और बजट संबंधी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाना। बजट का अंतिम निर्णय निर्धारित सरकारी और संसदीय प्रक्रिया के अनुसार होता है। 4. सेना और मंत्रालय के बीच प्रशासनिक कॉर्डिनेशन: थल सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़े मंत्रालयी मामलों में समन्वय करना। सैन्य अभियानों की कमान संभालना रक्षा सचिव की सामान्य जिम्मेदारी नहीं है। 5. रक्षा खरीद और आधुनिकीकरण से जुड़े मामले: हथियारों, विमानों, जहाजों और अन्य रक्षा उपकरणों की खरीद से जुड़े प्रस्तावों तथा मंत्रालय की प्रक्रियाओं में भूमिका निभाना। खरीद के निर्णय संबंधित नियमों, वित्तीय अधिकारों और सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी के अधीन होते हैं। ———————————-



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