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गोपालगंज में RSS ने किया शस्त्र पूजन:विजयादशमी पर आत्मरक्षा और राष्ट्र सुरक्षा का संकल्प




गोपालगंज। विजयादशमी के पावन पर्व पर गोपालगंज जिले के गायत्री मंदिर परिसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा एक भव्य शस्त्र पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए स्वयंसेवकों ने पूरी तन्मयता और अनुशासन के साथ भाग लिया,जिससे पूरा परिसर देशभक्ति और हिंदुत्व के रंग में सराबोर नजर आया। कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के चित्र के समक्ष पुष्पअर्पित के साथ हुई। इसके बाद सभी स्वयंसेवकों ने प्रार्थना की और संघ के पवित्र प्रतीक भगवा ध्वज को प्रणाम कर अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठा दोहराई। विजयादशमी का पर्व असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है, और इसी ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए संघ परंपरा के अनुसार शस्त्रों की पूजा की गई। ”शक्ति के बिना शांति की रक्षा संभव नहीं” कार्यक्रम के दौरान उपस्थित वक्ताओं और बौद्धिक प्रमुखों ने विजयादशी के दिन होने वाले शस्त्र पूजन के इतिहास, परंपरा और उसके गहरे वैचारिक अर्थ पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शस्त्र पूजन का उद्देश्य किसी के प्रति भय या हिंसा फैलाना नहीं है, बल्कि यह आत्मरक्षा, समाज की सुरक्षा, और राष्ट्र की संप्रभुता की रक्षा का संकल्प है। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में शास्त्र और शस्त्र दोनों का अपना विशिष्ट स्थान रहा है। जहां शास्त्र हमें ज्ञान, विवेक और सही मार्ग का बोध कराते हैं, वहीं शस्त्र हमें दुर्जनों से सज्जनों की रक्षा करने की शक्ति प्रदान करते हैं। भगवान राम द्वारा रावण का वध और माता दुर्गा द्वारा महिषासुर का संहार इसी सत्य का प्रमाण है कि शक्ति के बिना शांति की रक्षा संभव नहीं है। एक-दूसरे को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं संघ के जिला संघचालक अंजनी कुमार ने स्वयंसेवकों को अनुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्र सेवा के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने वर्तमान समय में समाज को संगठित, सशक्त और जागरूक बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। स्वयंसेवकों ने भी देश की संस्कृति, परंपरा और सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह समर्पित रहने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी स्वयंसेवकों ने एक-दूसरे को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। इस आयोजन ने न केवल स्थानीय लोगों में देशभक्ति की भावना को और प्रगाढ़ किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहना ही एक सशक्त राष्ट्र की नींव है।



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