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50 साल पुरानी जमाबंदी दूसरे के नाम करने का आरोप:बेतिया में कमिश्नर ने FIR का दिया निर्देश, दोषी अधिकारियों-कर्मियों की तय होगी जिम्मेदारी




पश्चिम चंपारण के बेतिया अंचल में जमीन की जमाबंदी में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। पूर्वी कर्गहिया मौजा की जमाबंदी संख्या-105 में अनियमितता के आरोप पर तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने जिलाधिकारी को दोषी कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने और दंडात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। साथ ही जमाबंदी में बदलाव करने और मूल जमाबंदी को शून्य करने का आदेश देने वाले पदाधिकारी का नाम स्पष्ट करने को कहा है। आयुक्त ने जिलाधिकारी, अपर समाहर्ता (राजस्व) और बेतिया अंचलाधिकारी को 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे तक संबंधित प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया है। अधिकारियों को आवश्यक अभिलेखों के साथ आयुक्त कार्यालय में उपस्थित होकर पूरे मामले में संबंधित पदाधिकारियों और कर्मियों की भूमिका स्पष्ट करनी होगी। 5 एकड़ 62.5 डिसमिल जमीन की जमाबंदी बदलने का आरोप मामला बेतिया अंचल के पूर्वी कर्गहिया मौजा की जमाबंदी संख्या-105 से जुड़ा है। आयुक्त को मिले परिवाद के अनुसार, 5 एकड़ 62.5 डिसमिल जमीन की जमाबंदी 50 वर्षों से अधिक समय से परिवादी के पिता के नाम पर कायम थी। परिवादी का दावा है कि जमीन का नियमित लगान भी जमा किया जाता रहा है। आरोप है कि इसके बावजूद मूल जमाबंदी को शून्य कर जमीन किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ऑनलाइन दर्ज कर दी गई। परिवादी के अनुसार, नए नाम से दर्ज व्यक्ति का उसके परिवार से कोई संबंध नहीं है। परिवाद में संबंधित खाता-खेसरा के बेतिया राज से जुड़े होने का आधार भी दिए जाने का उल्लेख है। हालांकि, परिवादी का कहना है कि वर्तमान में इस जमीन का बेतिया राज से कोई संबंध नहीं है। 53 डिसमिल की नई जमाबंदी कैसे बनी? आयुक्त ने मूल जमाबंदी में दर्ज 5 एकड़ 62.5 डिसमिल जमीन के मुकाबले नई जमाबंदी केवल 53 डिसमिल की कायम किए जाने पर सवाल उठाया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूछा है कि शेष जमीन की जमाबंदी का क्या हुआ और उसमें बदलाव किस आधार पर किया गया। आयुक्त ने निर्देश दिया है कि जमाबंदी में बदलाव से जुड़े आदेश, उसके आधार और पूरी प्रक्रिया की जांच की जाए। अंचलाधिकारी को यह भी स्पष्ट करना होगा कि ऑनलाइन दर्ज जमाबंदी में किस तरह बदलाव किया गया और इसमें किन अधिकारियों तथा कर्मियों की भूमिका रही। न्यायालय के आदेश के बिना बदलाव पर सवाल आयुक्त ने कहा कि सक्षम न्यायालय के आदेश के बिना लंबे समय से कायम जमाबंदी को निरस्त करना या उसमें छेड़छाड़ करना गंभीर मामला है। उन्होंने प्रथम दृष्टया इस कार्रवाई के पीछे अनुचित लाभ की आशंका जताई है और इसे संभावित आपराधिक कृत्य के रूप में जांचने की जरूरत बताई है। उन्होंने गलत तरीके से किए गए बदलाव को तत्काल सुधारने और सही व्यक्ति के नाम जमाबंदी कायम करने का निर्देश भी दिया है। दोषी अधिकारियों-कर्मियों की तय होगी जिम्मेदारी आयुक्त ने जिलाधिकारी और अपर समाहर्ता (राजस्व) के स्तर से जारी किसी आदेश, उसके आधार और जमाबंदी में बदलाव की परिस्थितियों का ब्योरा मांगा है। जांच के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मियों की भूमिका स्पष्ट की जाएगी। उन्होंने तिरहुत प्रमंडल के सभी जिलों के राजस्व अधिकारियों को राजस्व मामलों का निष्पादन नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से करने का निर्देश दिया है। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जनहित से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने का भी निर्देश दिया गया है।



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