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- ISRO Completes Gagnayaan Module Separation Test | VSSC Thiruvananthapuram
3 मिनट पहले
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ISRO ने गगनयान कार्यक्रम के क्रू मॉड्यूल (CM) और सर्विस मॉड्यूल (SM) को अलग करने वाले सिस्टम की टेस्टिंग पूरी कर ली है। इसके बाद इस सिस्टम के डिजाइन की क्षमता की पुष्टि हुई है।
ये परीक्षण तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) में किए गए। गगनयान का पहला मानवरहित मिशन G1 साल 2026 में लॉन्च करने का लक्ष्य है।
मॉड्यूल सेपरेशन को ऐसे समझिए…
गगनयान का ऑर्बिटल मॉड्यूल क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल से मिलकर बना है। दोनों मॉड्यूल एक सेपरेट सिस्टम के जरिए जुड़े होते हैं। अंबिलिकल कनेक्शनों से इनके बीच बिजली और लिक्विड की सप्लाई होती है।
लॉन्च से पहले दोनों मॉड्यूल को एक साथ जोड़ा जाता है। मिशन के ऑर्बिट में रहने वाले चरण के खत्म होने तक ये एक यूनिट की तरह काम करते हैं।
पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश से पहले क्रू मॉड्यूल, सर्विस मॉड्यूल से अलग होता है। इसके लिए कई घटनाएं तय क्रम में होती हैं।
परीक्षण में क्या जांचा गया
ISRO ने सेपरेशन सिस्टम के पूरे डिजाइन की पुष्टि के लिए विक्रम साराभाई सेंटर में ये परीक्षण किए। टेस्ट सेटअप में क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल की एक साथ जुड़ी संरचना तैयार की गई थी। पूरी प्रक्रिया की जांच के लिए इसमें बड़ी संख्या में इंस्ट्रूमेंट लगाए गए थे।
ISRO के मुताबिक, इन परीक्षणों से सेपरेशन सिस्टम के डिजाइन की क्षमता की पुष्टि हुई। साथ ही, क्रू मॉड्यूल के कई अहम सिस्टम की मजबूती और झटके सहने की क्षमता भी जांची गई।
इनमें एवियोनिक्स सिस्टम, इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम और पिछले हिस्से, शंकु के आकार वाले हीट शील्ड में लगा थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम शामिल है।
क्रू मॉड्यूल डिप्लॉयबल अंबिलिकल शील्ड की भी जांच की गई। इसके अलावा, क्रू मॉड्यूल अप राइटिंग सिस्टम और थर्मल एंड ह्यूमिडिटी कंट्रोल सिस्टम से जुड़े पाइरोटेक्निक डिवाइस भी परीक्षण में शामिल थे।
इन परीक्षणों के सफल होने से साल 2026 में प्रस्तावित पहले मानवरहित गगनयान मिशन G1 के लिए लागू किए गए अलगाव सिस्टम के सही तरीके से काम करने का भरोसा बढ़ा है।

