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Patna Hospital Crisis: IGIMS AIIMS LNJP Beds Full


“सुबह साढ़े 8 बजे मां को लेकर इतनी दूर से पटना AIIMS पहुंचे थे। उम्मीद थी कि मां का बेहतर इलाज होगा, पांच-छह घंटे इंतजार किया, लेकिन यहां भी बेड नहीं मिला। आखिरकार हमें वापस लौटना पड़ा।” समस्तीपुर से अपनी मां का इलाज कराने पटना AIIMS पहुंचे अरविंद कु

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अरविंद अकेले नहीं हैं। अरवल के अंकित कुमार अपने चाचा को लेकर IGIMS पहुंचे, लेकिन करीब छह घंटे इंतजार करने के बाद भी उन्हें भर्ती नहीं कराया जा सका। अंकित का आरोप है कि बेड पाने के लिए पैरवी की जरूरत पड़ती है। अंत में उन्हें दूसरे अस्पताल का रुख करना पड़ा।

जमुई के मुरारी प्रसाद सिंह भी सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था से निराश हैं। उनका कहना है कि आबादी के अनुपात में बिहार में अस्पताल और चिकित्सा सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं।

बिहार की राजधानी के अस्पतालों में कई मरीजों को भर्ती के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, अस्पताल परिसर के बाहर बने शेड में मरीजों और उनके परिजनों को रात गुजारनी पड़ रही है।

डॉक्टरों, नर्सों और बेड की कमी के कारण मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिलने की स्थिति में उनकी जान पर बन आती है।

पटना के बड़े सरकारी अस्पतालों में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल है, मरीज को भर्ती कराएं तो कहां कराएं? देखिए भास्कर की यह रिपोर्ट…

पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH)।

पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH)।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना (AIIMS)

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना (AIIMS)

IGIMS और AIIMS पर सबसे ज्यादा दबाव

पटना के बड़े सरकारी अस्पतालों में मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। जनरल वार्ड से लेकर इमरजेंसी तक बेड की कमी मरीजों और उनके परिजनों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है।

अस्पतालों में ICU, वेंटिलेटर और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की कमी ने भी समस्या को गंभीर बना दिया है।

IGIMS, पटना AIIMS और लोकनायक जयप्रकाश हड्डी अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या के मुकाबले उपलब्ध संसाधन कम पड़ रहे हैं।

दूसरे जिलों में सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं की कमी के कारण गंभीर मरीजों को पटना रेफर किया जाता है। इससे राजधानी के अस्पतालों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

इलाज की उम्मीद लेकर दूर-दराज के जिलों से पहुंचने वाले कई मरीजों को बेड नहीं मिलने पर दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।

पटना के लोकनायक जयप्रकाश हड्डी अस्पताल (LNJP) में शेड के नीचे इंतजार करते मरीज और उनके परिजन।

पटना के लोकनायक जयप्रकाश हड्डी अस्पताल (LNJP) में शेड के नीचे इंतजार करते मरीज और उनके परिजन।

शेड में रात गुजार रहे मरीज, इमरजेंसी के बाहर इंतजार

IGIMS के बाहर बने शेड में मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी साफ दिखाई देती है। कई लोग फर्श या प्लास्टिक बिछाकर रात गुजारने को मजबूर हैं।

कुछ गंभीर मरीजों के शरीर में इलाज के लिए पाइप लगे होने के बावजूद उन्हें वार्ड में जगह मिलने का इंतजार करना पड़ रहा है।

परिजन दिन-रात अस्पताल परिसर में इस उम्मीद में डटे रहते हैं कि जल्द बेड मिल जाएगा और मरीज का समुचित इलाज शुरू हो सकेगा। लेकिन बेड की अनुपलब्धता के कारण उन्हें बार-बार इंतजार करना पड़ता है।

गंभीर मरीजों के मामले में यह स्थिति और चिंताजनक हो जाती है, क्योंकि समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी होता है।

केस स्टडी: कहीं 6 घंटे इंतजार, तो कहीं बिना भर्ती लौटना पड़ा

1. बिना पैरवी नहीं मिलता बेड, लीवर मरीज को नहीं मिला एडमिशन

अरवल के अंकित कुमार अपने चाचा को लेकर IGIMS पहुंचे थे। अंकित ने बताया कि ”अस्पताल में किसी बड़े नेता के पैरवी के बिना बेड नहीं मिलता। पैरवी है तो बेड मिलेगा, नहीं तो इलाज नहीं”

उन्होंने बताया कि करीब छह घंटे इंतजार करने के बाद भी उनके चाचा को भर्ती नहीं कराया जा सका। इसके बाद उन्हें दूसरे अस्पताल का रुख करना पड़ा।

2. गंभीर मरीजों को रेफर करने पर उठाए सवाल

लखीसराय के अभय कुमार ने पटना AIIMS में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की परेशानी का जिक्र किया। अभय कुमार बताते हैं कि यहां बहुत परेशानी है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि सरकार शिकायतों पर सही तरीके से एक्शन नहीं ले रही है।

अभय के मुताबिक, गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को बेड उपलब्ध नहीं होने पर दूसरे अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है।

उनका कहना है की Clinical Establishments (Registration and Regulation) Act, 2010 बिहार में भी लागू किया जाना चाहिए। इसके लागू नहीं होने से परेशानी काफी ज्यादा है।

उनका मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं के नियमन और मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

3. जमुई के मरीज के परिजन बोले- बढ़ाई जाए बेड की संख्या

AIIMS पहुंचे जमुई के मुरारी प्रसाद सिंह ने कहा कि बिहार में आबादी के अनुपात में अस्पतालों की व्यवस्था कम है। अस्पताल में डॉक्टर, नर्सेज की बड़ी क्राइसिस है।

उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचते ही प्राथमिकता के आधार पर इलाज मिलना चाहिए। खासकर कार्डियक अरेस्ट, सांस लेने में परेशानी या ऑक्सीजन की जरूरत वाले मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिलने से खतरा बढ़ सकता है।

उनके अनुसार, डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के साथ बेड की सीमित संख्या भी मरीजों की परेशानी बढ़ा रही है। सरकार को इस पर कठोर कदम उठाने चाहिए।

उनका कहना है कि इमरजेंसी में लोग AIIMS संस्थान का नाम सुनकर यहां पहुंचते हैं, लेकिन बेड या इलाज नहीं मिलने से निराशा हो जाते हैं। ऐसे में वे मरीज को लेकर किधर जाएं? मरीज का क्या होगा। इसी चिंता में वो परेशान रहते है।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि संस्थान में कम से कम डॉक्टर, नर्सेज एवं जांच का समुचित इलाज करें। उन्होंने बताया कि कई बार देखा गया है कि जांच के नाम पर मरीज के परिजनों को तीन -चार दिनों तक दौड़ाया जाता है। तब तक मरीज की स्थिति और क्रिटिकल हो जाती है। इन तमाम पहलुओं को देखते हुए, इस चिंतन मंथन करना चाहिए। इस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है।

4. समस्तीपुर से मां को लेकर पहुंचे, फिर भी नहीं मिला बेड

समस्तीपुर के अरविंद कुमार अपनी मां को लेकर सुबह करीब 8:30 बजे पटना AIIMS पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि पांच से छह घंटे इंतजार करने के बाद भी उन्हें बेड उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बाद उन्हें अस्पताल से लौटना पड़ा।

यह हालात शहर के बड़े सरकारी अस्पतालों का है, जहां बेड के अभाव में मरीज के परिजन एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकना पड़ता है। इस तरह की स्थिति उन परिवारों की मुश्किलें बढ़ा देती है, जो बेहतर इलाज की उम्मीद में दूसरे जिलों से राजधानी पहुंचते हैं।

LNJP हड्डी अस्पताल में रोज 800-900 मरीजों की OPD

यही हालात एशिया के सुप्रसिद्ध हड्डी रोग अस्पताल पटना के लोकनायक जयप्रकाश हड्डी अस्पताल (LNJP) में भी देखने को मिली। यहां बेड की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

अस्पताल के निदेशक डॉ. राकेश चौधरी ने माना कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में फिलहाल 160 बेड उपलब्ध हैं।

डॉ. चौधरी ने बताया कि नए भवन में सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। उनके अनुसार, आने वाले एक से दो महीनों में व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। 400 बेड वाले नए अस्पताल भवन में सेवाएं पूरी तरह शुरू होने के बाद मरीजों को राहत मिलने की संभावना है।

निजी अस्पतालों से रेफर होकर भी पहुंच रहे मरीज

सरकारी अस्पतालों पर बढ़ते दबाव की एक वजह निजी अस्पतालों से रेफर किए जाने वाले मरीज भी हैं। आरोप है कि कुछ निजी अस्पताल गंभीर मरीजों को संभालने में असमर्थ होने पर उन्हें सरकारी संस्थानों में भेज देते हैं। इससे पहले से दबाव झेल रहे सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या और बढ़ जाती है।

हालांकि, मरीजों को रेफर किए जाने के कारणों और इसकी व्यापकता का आकलन करने के लिए अस्पतालवार आंकड़ों की जरूरत है।

बेड के साथ डॉक्टर और नर्सों की कमी भी बड़ी समस्या

अस्पतालों में परेशानी केवल बेड तक सीमित नहीं है। डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी भी इलाज की व्यवस्था को प्रभावित करती है। वहीं, कई जिला अस्पतालों में ICU, ब्लड बैंक, ट्रॉमा सेंटर और इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर जैसी सुविधाओं की कमी के कारण गंभीर मरीजों को पटना भेजना पड़ता है।

मरीजों की बढ़ती संख्या के अनुपात में अस्पतालों की क्षमता, मानव संसाधन और जांच सुविधाओं का विस्तार नहीं होने से स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

आंकड़ों में अस्पतालों पर दबाव

  • IGIMS: उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रतिदिन करीब 5,500 से 7,500 मरीज OPD में पहुंचते हैं।
  • पटना AIIMS: अस्पताल में वर्तमान में 960 बेड होने की जानकारी दी गई है।
  • LNJP हड्डी अस्पताल: फिलहाल 160 बेड उपलब्ध हैं, जबकि OPD में रोज 800-900 मरीज आते हैं।
  • नया LNJP भवन: 400 बेड की क्षमता वाले भवन में सेवाओं का विस्तार प्रस्तावित है।

इन आंकड़ों से अस्पतालों पर मरीजों के दबाव का अंदाजा मिलता है। हालांकि, सभी संस्थानों में वास्तविक बेड उपलब्धता, ICU क्षमता और भर्ती से इनकार किए गए मरीजों की संख्या के तुलनात्मक आधिकारिक आंकड़े सामने आना जरूरी है।

गरीब मरीजों के सामने दोहरी मार

निजी अस्पतालों में इलाज महंगा होने के कारण गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं। लेकिन सरकारी अस्पतालों में बेड नहीं मिलने पर उनके सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो जाती है। एक तरफ मरीज की गंभीर स्थिति और दूसरी तरफ दूसरे अस्पताल में इलाज कराने का खर्च।

दूसरे जिलों से आने वाले परिवारों के लिए बार-बार अस्पताल बदलना आर्थिक और मानसिक रूप से भी मुश्किल होता है। गंभीर मरीजों के मामले में समय पर इलाज की उपलब्धता सबसे अहम है।

स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत

पटना के बड़े सरकारी अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की जरूरत को रेखांकित करती है। केवल नए भवन बनाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके साथ पर्याप्त डॉक्टरों, नर्सों, जांच सुविधाओं, ICU, वेंटिलेटर और इमरजेंसी सेवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी।

जिला अस्पतालों में गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधाएं मजबूत होने से पटना के अस्पतालों पर दबाव कम किया जा सकता है। वहीं, बेड की उपलब्धता की नियमित निगरानी और जरूरतमंद मरीजों को समय पर दूसरे अस्पताल में भर्ती कराने की प्रभावी व्यवस्था भी जरूरी है।

फिलहाल, बेड की कमी और बढ़ते मरीजों के दबाव के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि गंभीर मरीजों को समय पर इलाज कैसे मिले। स्वास्थ्य व्यवस्था में क्षमता विस्तार और बेहतर समन्वय ही मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।



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