विशाखापत्तनम6 मिनट पहलेलेखक: मोहम्मद जमीर हसन
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आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में गूगल का डेटा सेंटर बन रहा है। तीन कैंपस बनेंगे। राज्य सरकार ने 3 गांवों की 586 एकड़ जमीन दी है। अदाविवरम-मुदासरलोवा गांव में काम शुरू हो चुका है।
160 एकड़ में जंगल काटने और जमीन समतल करने के लिए पहाड़ी छीलने के आरोप हैं। वन्यजीव अभयारण्य और जलाशय के पास होने से पर्यावरणविद भी प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं।
गांव वालों का कहना है, ‘जमीन उनकी आजीविका का आधार थी।’ तरलुवाड़ा की पूर्व सरपंच पायला कोंडम्मा ने कहा, ‘सर्वे के समय अफसरों ने भरोसा दिलाया था कि जमीन हमारी रहेगी। किसान अप्पलाराजू ने आरोप लगाया कि वर्षों पहले आवंटित जमीन अब ली जा रही है।
करीब ₹1.3 लाख करोड़ की लागत, 2028 में शुरू होने की संभावना
15 अरब डॉलर यानी करीब ₹1.3 लाख करोड़ का AI हब बन रहा है। इसमें बड़े डेटा सेंटर और अंतरराष्ट्रीय समुद्र के नीचे बिछने वाली इंटरनेट केबलों का नेटवर्क शामिल है। निर्माण अप्रैल 2026 में शुरू हुआ और कंपनी के मुताबिक, यह 2028 में चालू हो सकता है।
विजाग परियोजना में तीन मुद्दे प्रमुख
- पानी: स्थानीय जलस्रोतों पर परियोजना के असर को लेकर सवाल उठे हैं। Google ने कहा है कि उसने पानी के जोखिम का आकलन करने के बाद कूलिंग के लिए उन्नत एयर-कूलिंग व्यवस्था चुनी है। इसका अर्थ यह नहीं कि पूरे परिसर में पानी की खपत शून्य होगी।
- पर्यावरणीय मंजूरी: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में परियोजना की मंजूरियों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई हुई है। राज्य सरकार के हलफनामे के मुताबिक, पर्यावरणीय मंजूरी निर्माण क्षेत्र के आधार पर दी गई थी; परियोजना के संचालन से जुड़े प्रभावों पर सवाल उठाए गए हैं।
- स्थानीय लोगों को लाभ: गूगल ने स्थानीय आर्थिक गतिविधियों और रोजगार बढ़ने का अनुमान दिया है। लेकिन यह देखना जरूरी होगा कि कितनी नौकरियां स्थानीय लोगों को मिलती हैं और पर्यावरणीय लागत की तुलना में स्थानीय समुदाय को कितना लाभ पहुंचता है।
2 देशों ने डेटा सेंटर के लिए क्या तरीके अपनाए…
इंडोनेशिया: घरों के नल सूखे, डेटा सेंटर में भरपूर पानी
इंडोनेशिया के बाटाम द्वीप में डेटा सेंटर से सबकुछ बदल गया है। नलों में पानी नहीं है, जबकि डेटा सेंटर में पर्याप्त पानी है। लोगों का कहना है, ‘3 महीने से एक बूंद पानी नहीं आया। पहले जल आपूर्ति भरोसेमंद थी। अब वे टैंकर भरोसे है।’ नाराज लोगों ने डेटा सेंटर पर धावा भी बोला।
चीन ने ऐसे निकाला हल…
चीन ने डेटा सेंटर में पानी-बिजली की खपत का हल निकाला है। उलानकाब शहर में 90 डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं। हर सेंटर को 80% से ज्यादा बिजली सीधे पवन ऊर्जा से मिलेगी। यहां की ठंडी जलवायु के चलते डेटा सेंटर को ठंडा रखने की जरूरत कम पड़ेगी।

