पूर्णिया के भट्टा दुर्गा बाड़ी में बंगाली रीति-रिवाज और पारंपरिक विधि-विधान से दुर्गा पूजा मनाई जा रही है। यह पूजा इस साल अपने 110 साल पूरे कर चुकी है। इस बार इसका 111वां वर्ष मनाया जा रहा है।
.
पूजा की शुरुआत पहली बार साल 1916 में हुई थी। इस साल त्रिपुरा आर्ट पर आधारित पंडाल बनाया गया है। इसके निर्माण में करीब 1 लाख बांस का इस्तेमाल किया गया है।

भव्य पंडाल बनाया जा रहा है।
पश्चिम बंगाल से बुलाए कारीगर
पूजा समिति के सदस्य निरंजन कुमार दत्ता बताते हैं कि इस बार पंडाल को तैयार करने के लिए पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिला अंतर्गत गंगारामपुर के कासिम हाट गांव से विशेष कारीगर आए थे। इन कारीगरों ने करीब ढाई महीने की कड़ी मेहनत के बाद इस विशाल पंडाल का निर्माण किया है।
लगभग 1 से 2 एकड़ में फैले इस परिसर में बने त्रिपुरा आर्ट शैली के इस पंडाल में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 1 लाख बांस का इस्तेमाल किया गया है। कहा जाता है कि शाम के समय की गई विशेष रोशनी इस पंडाल की खूबसूरती में चार चांद लगा देती है, जिसे देखने के बाद लोग दंग रह जाते हैं।

पंडाल बनाने में बांस का इस्तेमाल किया गया है।
बंगाली विधि-विधान और परंपराएं
निरंजन दत्ता ने बताया कि यह पूजा बंगाली समिति की ओर से आयोजित की जाती है, जहां शुद्धिकरण और सभी रीति-रिवाजों का पालन बंगाली पंडितों के द्वारा ही संपन्न कराया जाता है। यहां का महाभोग और प्रसाद बेहद लोकप्रिय है। पिछले साल इसके लिए 6,000 कूपन छापे गए थे, जिसमें से 5,127 कूपन बिके थे।
अष्टमी को कूपन के माध्यम से सुव्यवस्थित तरीके से महिला, सीनियर सिटीजन और सामान्य कतारें लगाकर भोग वितरित किया जाता है। जबकि सप्तमी से लेकर नवमी तक लगातार भोग प्रसाद का वितरण होता है । इसके अलावा नवमी के दिन इस मैदान में एक बार में 250 लोगों को बैठाकर महाभोग खिलाया जाता है।
पारंपरिक विसर्जन
भट्टा दुर्गा बाड़ी पूजा समिति द्वारा सनातन परंपरा और नियमों का पालन करते हुए प्रतिमा का विसर्जन दशमी के दिन ही कर दिया जाता है, जो शहर के सिटी स्थित सौरा नदी तट पर संपन्न होता है।

पंडाल में आकर्षक लाइटें लगाई गई है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और मेले जैसा माहौल
पूजा समिति सदस्यों की माने तो पंडाल का यह परिसर किसी बड़े सिनेमा हॉल की तरह भरा रहता है। यहां हर दिन विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है । यहां जादू शो, कत्थक नृत्य, और कोलकाता से आए कलाकारों द्वारा म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट का कार्यक्रम भी हर शाम अलग अलग समय सारणी के मुताबिक होता है। बच्चों के लिए विशेष रूप से टॉफ़ी और उपहार वितरित किए जाते हैं, जिससे उत्सव का आनंद और बढ़ जाता है।
लोकतांत्रिक और पारदर्शी समिति गठन
निरंजन दत्ता ने बताया कि भट्टा दुर्गा बाड़ी समिति का गठन हर दो साल पर लोकतांत्रिक तरीके से वोटिंग के माध्यम से होता है। इस चुनाव की प्रक्रिया मजिस्ट्रेट की प्रतिनियुक्ति और उनकी देखरेख में संपन्न होती है, जिसके बाद चुनी गई समिति आगामी दो वर्षों तक कार्य करती है। चुनी गई समिति के मुताबिक और दायित्व पर ही हर वर्ष अलग अलग थीम में पूजा संपन्न कराई जाती है ।
