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Economics Nobel Prize 2026 Announcement


5 मिनट पहले

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2026 के अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार का ऐलान आज होगा। संभावित दावेदारों में भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री राज चेट्टी का नाम भी चर्चा में है।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री राज चेट्टी ने सरकारी आंकड़ों की मदद से यह समझाने की कोशिश की है कि किसी व्यक्ति के आगे बढ़ने के मौके किन बातों पर निर्भर करते हैं।

उनके काम से यह समझने में मदद मिलती है कि कुछ शहरों में गरीब परिवारों के बच्चों को अच्छी कमाई करने और बेहतर जिंदगी पाने के ज्यादा मौके क्यों मिलते हैं, जबकि दूसरी जगहों पर उनके लिए आगे बढ़ना मुश्किल होता है।

उनकी रिसर्च का मकसद यह समझना भी है कि लोगों को बेहतर मौके देने के लिए क्या किया जा सकता है।

उनकी रिसर्च का मकसद यह समझना भी है कि लोगों को बेहतर मौके देने के लिए क्या किया जा सकता है।

नोबेल के लिए 6 और अर्थशास्त्री भी दावेदार

राज चेट्टी के अलावा कंपनियों के विलय, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोजगार और अमीर-गरीब के बीच बढ़ते अंतर पर रिसर्च करने वाले अर्थशास्त्रियों के नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल हैं।

1. कंपनियों के विलय से कीमतों पर असर बताने वाले एरियल पेक्स

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री एरियल पेक्स ने कंपनियों के बीच मुकाबले और उनके एक होने से बाजार पर पड़ने वाले असर पर रिसर्च की है।

उन्होंने स्टीवन बेरी और जेम्स लेविनसोहन के साथ मिलकर 1995 में अमेरिकी कार बाजार पर एक अहम शोधपत्र लिखा था।

उनकी रिसर्च से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि दो कंपनियों के एक होने से सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं या नहीं।

इससे सरकार को यह तय करने में भी मदद मिलती है कि किसी कंपनी के विलय से ग्राहकों को नुकसान हो सकता है या नहीं।

एरियल पेक्स को 2007 में इकोनॉमेट्रिक्स सोसायटी का फेलो चुना गया था। यह सम्मान अर्थशास्त्र के क्षेत्र में अहम योगदान देने वाले शोधकर्ताओं को दिया जाता है।

एरियल पेक्स को 2007 में इकोनॉमेट्रिक्स सोसायटी का फेलो चुना गया था। यह सम्मान अर्थशास्त्र के क्षेत्र में अहम योगदान देने वाले शोधकर्ताओं को दिया जाता है।

2. AI से अर्थव्यवस्था समझने वाली सुसान एथी

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर सुसान एथी ने अर्थशास्त्र में AI और मशीन लर्निंग के इस्तेमाल पर काम किया है। इन तकनीकों की मदद से बड़ी मात्रा में आंकड़ों का विश्लेषण किया जा सकता है।

उनकी रिसर्च से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि किसी योजना से लोगों को वास्तव में फायदा हुआ या नहीं। उदाहरण के लिए, नौकरी की ट्रेनिंग देने से लोगों की कमाई बढ़ी या नहीं और किन लोगों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिला।

2007 में एथी को जॉन बेट्स क्लार्क मेडल मिला था। यह 40 साल से कम उम्र के अर्थशास्त्रियों को उनके अहम काम के लिए दिया जाता है। वह यह पुरस्कार पाने वाली पहली महिला थीं।

सुसान एथी ने ऑनलाइन विज्ञापनों की नीलामी और इंटरनेट कंपनियों के बिजनेस मॉडल को बेहतर बनाने में भी अहम योगदान दिया है।

सुसान एथी ने ऑनलाइन विज्ञापनों की नीलामी और इंटरनेट कंपनियों के बिजनेस मॉडल को बेहतर बनाने में भी अहम योगदान दिया है।

3. टैक्स और सरकारी कर्ज का लोगों की बचत पर असर बताने वाले रॉबर्ट बैरो

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री रॉबर्ट बैरो ने इस बात पर रिसर्च की है कि भविष्य में टैक्स बढ़ने की आशंका लोगों के खर्च और बचत को कैसे बदल सकती है।

मान लीजिए, सरकार कर्ज लेकर लोगों का टैक्स घटा देती है। ऐसे में कुछ लोग अतिरिक्त पैसे खर्च करने के बजाय बचा सकते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि सरकार भविष्य में कर्ज चुकाने के लिए टैक्स बढ़ा सकती है।

इस विचार को ‘रिकार्डियन इक्विवेलेंस’ कहा जाता है। हालांकि, इस पर अर्थशास्त्रियों के बीच लंबे समय से बहस होती रही है।

बर्ट बैरो को 1988 में अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज का फेलो चुना गया था

बर्ट बैरो को 1988 में अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज का फेलो चुना गया था

4. अमीर-गरीब के बीच बढ़ते अंतर पर रिसर्च करने वाले थॉमस पिकेटी और इमैनुएल साएज

पेरिस स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के थॉमस पिकेटी और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले के इमैनुएल साएज ने इस बात पर रिसर्च की है कि समाज की कुल कमाई और संपत्ति का कितना हिस्सा अमीर लोगों के पास जाता है।

उनके काम से यह समझने में मदद मिलती है कि अमीर और गरीब के बीच आर्थिक अंतर कैसे बढ़ता है और समय के साथ कमाई का बंटवारा किस तरह बदलता है। उनकी रिसर्च ने दुनिया भर में आर्थिक असमानता पर चर्चा को बढ़ावा दिया है।

5. तकनीक और विदेशी व्यापार का नौकरियों पर असर बताने वाले डेविड ऑटोर

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के अर्थशास्त्री डेविड ऑटोर ने इस बात पर रिसर्च की है कि कंप्यूटर, नई तकनीक और दूसरे देशों से व्यापार बढ़ने का नौकरियों पर क्या असर पड़ता है।

उन्होंने चीन के साथ बढ़ते व्यापार का भी अध्ययन किया है। उनकी रिसर्च से यह समझने में मदद मिलती है कि सस्ते विदेशी सामान के आने से कुछ उद्योगों और उनमें काम करने वाले लोगों पर क्या असर पड़ सकता है।

उनका काम आज AI और ऑटोमेशन के कारण नौकरियों में होने वाले बदलावों को समझने में भी उपयोगी है।

डेविड ऑटोर को 2020 में मैकआर्थर फेलोशिप मिली थी। यह फेलोशिप अपने क्षेत्र में असाधारण रचनात्मकता दिखाने वाले लोगों को दी जाती है।

डेविड ऑटोर को 2020 में मैकआर्थर फेलोशिप मिली थी। यह फेलोशिप अपने क्षेत्र में असाधारण रचनात्मकता दिखाने वाले लोगों को दी जाती है।

6. बच्चों की सेहत का भविष्य पर असर बताने वाली जेनेट करी

येल यूनिवर्सिटी की अर्थशास्त्री जेनेट करी ने बच्चों की सेहत और उनकी आर्थिक स्थिति के बीच संबंधों पर रिसर्च की है। उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि बचपन में गरीबी, प्रदूषण और खराब स्वास्थ्य का असर बड़े होने के बाद भी कैसे बना रहता है।

उनकी रिसर्च बताती है कि बचपन में खराब माहौल का असर आगे चलकर व्यक्ति की सेहत और कमाई पर पड़ सकता है।

उनके काम से यह समझने में मदद मिलती है कि बच्चों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं और बेहतर माहौल देना क्यों जरूरी है।

अर्थशास्त्र का नोबेल बाकी पुरस्कारों से अलग है

अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल की मूल वसीयत में शामिल नहीं था। स्वीडन के केंद्रीय बैंक ने 1968 में इसकी शुरुआत की थी। इसका आधिकारिक नाम ‘अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में आर्थिक विज्ञान में स्वेरिग्स रिक्सबैंक पुरस्कार’ है।

यह पुरस्कार ऐसे शोध को सम्मान देता है, जिसने अर्थव्यवस्था को समझने या उससे जुड़े फैसले लेने के तरीकों में अहम योगदान दिया हो। विजेता चुनते समय यह भी देखा जाता है कि किसी शोध का लंबे समय में कितना असर पड़ा है।

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