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लोकगायिका विजया भारती बोलीं-लोकगीतों से बिहार की ब्रांडिंग होती:पटना में विशेष कला ग्राम बनाने की मांग की, कहा- कलाकारों को प्रोत्साहन मिलना जरूरी है




प्रसिद्ध लोकगायिका विजया भारती ने कहा है कि बिहार की पहचान लोकगीतों से ही होगी। उन्होंने पटना में एक विशेष कला ग्राम बनाने की मांग की। भारती ने अश्लील लोकगीतों पर सरकार के प्रतिबंध का स्वागत किया। अपनी तीन दिवसीय पटना यात्रा में विजया भारती ने कला संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार और निदेशक रूबी से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि राज्य के सांस्कृतिक विकास और कलाकारों को बढ़ावा देने के लिए कला ग्राम जरूरी है। भारती ने बताया कि कोविड-19 के बाद हजारों लोक कलाकार अभी भी संघर्ष कर रहे हैं। उनके लिए मंच, मानदेय, बीमा, पेंशन और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि प्रतिबंधों के साथ कलाकारों को प्रोत्साहन भी जरूरी है। लोकगायिका बोलीं- बिहार के लुप्त हो रहे गीतों का संग्रह तैयार करूंगी विजया भारती ने बताया कि दुर्गापूजा पर उनका नया गीत आया है और छठ पर भी गीत आ रहे हैं। वह बिहार के लुप्त हो रहे गीतों का संग्रह भी तैयार कर रही हैं। विदेश में जब कभी जाकर गीत गाने का मौका मिलता है मैं इमोशनल हो जाती हूं। दूसरी भाषा के लोग भी बिहार की भाषाओं के गीत सुनकर नाचने लगते हैं।
बिहार की भूमि के बारे में बताया विजया भारती ने कहा कि बिहार ही वह धरती है जहां महाकवि विद्यापति ने मैथिली को अमर कर दिया, जहां भिखारी ठाकुर ने लोक-नाट्य को जनता की आवाज बनाया, जहां महेंद्र मिसिर ने मगही को साहित्य की गरिमा दी। यह वही भूमि है जहां महात्मा गांधी ने चंपारण सत्याग्रह से सत्य और अहिंसा को विश्व-पटल पर स्थापित किया, जहां बाबू कुंवर सिंह ने 1857 में अंग्रेजों के विरुद्ध प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल फूंका। आगे कहा, यहां सोहर जन्म का स्वर है, समदाउन विदाई का, कजरी विरह की, चैती फसल की, झूमर उल्लास का, निर्गुण आत्म-खोज का, और छठ गीत सूर्य-उपासना का।



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