“सुबह से नाव के लिए पर्ची देने और अधिकारियों से गुहार लगाने में लगे हैं। अफसरों ने कहा था कि 5-10 मिनट में नाव पहुंच जाएगी, लेकिन दोपहर के 2 बज गए, अभी तक कोई नाव नहीं पहुंची। हमलोग भूखे-प्यासे पानी में खड़े होकर मदद का इंतजार कर रहे हैं।
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हमारे गांव के करीब 500 लोग अभी भी घरों की छतों पर फंसे हैं। कुछ गांवों में तो नाव से लोगों को निकालने के लिए 200 रुपए मांगे जाने की बात सामने आ रही है।”
ये कहना है बिहार के सारण जिले के रहने वाले विजय सिंह का। बाढ़ के पानी में फंसे ग्रामीणों ने DM-SP से लेकर सरकार पर खूब गुस्सा निकाल रहे हैं।
पहले बाढ़ से जुड़ी तस्वीरें देखिए…

NH-722 पर 6 फीट तक पानी। आस-पास के गांव में भी पानी बढ़ा।

घर छोड़कर ट्रैक्टर पर सवार होकर सुरक्षित जगह जाते लोग।

राहत शिविर में खाने के लिए सही व्यवस्था नहीं है। हमारी टीम ने 10KM तक राहत शिविर का रियलिटी चेक किया।
CM सम्राट की रिक्वेस्ट पर राहत पहुंचाने उतरा सेना का हेलीकॉप्टर
गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच सारण में बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया है। मकेर, पानापुर और तरैया में तटबंध टूटने के बाद पानी तेजी से गांवों और निचले इलाकों में फैल रहा है।
मकेर में कई सड़कें बाढ़ के पानी में डूबी हैं। भटोली गांव में करीब 6 फीट, मसूरिया रोड पर 5 फीट और भाटा रोड पर करीब 4 फीट पानी बह रहा है। मकेर अस्पताल चौक के पास छपरा-मुजफ्फरपुर NH-722 पर भी बाढ़ का पानी चढ़ गया है। आसपास के इलाकों में पानी 10 से 12 फीट तक है।
सारण समेत कई जिलों में बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए CM सम्राट चौधरी ने राहत और बचाव कार्यों के लिए वायुसेना से मदद मांगी। इसके बाद गोरखपुर से सेना का हेलीकॉप्टर पहुंचा। इसकी मदद से सारण में राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
बाढ़ के विकराल होते हालात को देखते हुए दैनिक भास्कर की टीम ग्राउंड पर उतरी। फुलवरिया, मकेर से अमनौर के भटगांई तक करीब 10 किलोमीटर का सफर तय कर टीम ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की परेशानियों को करीब से देखा और समझा।
इस दौरान सबसे भयावह तस्वीर राहत व्यवस्था की सामने आई। राहत शिविर नहीं होने के कारण कई परिवार सड़क किनारे प्लास्टिक का तंबू लगाकर रहने को मजबूर हैं।
घर डूब चुके हैं, खाने-पीने का सामान खत्म हो चुका है और इन परिवारों के पास न तो भोजन बचा है, न ही कोई सुरक्षित ठिकाना। लोगों का कहना है कि कई घंटे बीतने के बाद भी सरकारी राहत हम तक नहीं पहुंची है।


अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी खबर…
गंड़क में बढ़ते जलस्तर से सारण में बाढ़
नेपाल के गंडक कैचमेंट में भारी बारिश के बाद वाल्मीकिनगर गंडक बराज से बहुत ज्यादा पानी डिस्चार्ज किया गया। 28 सितंबर को 5.43 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसका असर नीचे की ओर पश्चिम चंपारण, गोपालगंज होते हुए सारण तक पहुंचा है।
1 अक्टूबर को सारण के पानापुर के सरौजा-भगवानपुर/सतजोड़ा के पास गंडक का बांध टूटने के बाद 10 से ज्यादा गांवों में पानी घुस गया। गंडक का जलस्तर बढ़ने और तटबंध टूटने से पानी का फैलाव अब मकेर, अमनौर, तरैया और पानापुर की तरफ बढ़ रहा है। छपरा-मुजफ्फरपुर NH-722 पर कई जगह 8 फीट तक पानी बह रहा है।
वहीं, दूसरी तरफ सरयू/घाघरा भी छपरा के लिए महत्वपूर्ण है। सारण जिला प्रशासन के अनुसार, घाघरा/सरयू जिले की दक्षिण-पश्चिमी सीमा बनाती है और आगे छपरा के पास गंगा में मिलती है। हालांकि, अभी यहां की स्थिति सामान्य है।
बाढ़ के पानी में 5 लोग डूबे, दो का मिला शव
बाढ़ के पानी में 5 लोग डूब गए। इसमें दो लोगों के शव मिले हैं। तीन लोगों की तलाश अब भी जारी है। प्रशासन और बचाव दल की टीमें प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू में जुटी हैं।
मृतकों की पहचान मकेर थाना क्षेत्र के सुल्तानगंज निवासी शीतल महतो के बेटे बहादुर महतो और धनसी महतो के बेटे बबन महतो के रूप में हुई है।
वहीं, दक्षिण टोला निवासी मोहम्मद हबीब के बेटे मोहम्मद अनवर, मोहम्मद नसीम के बेटे और मुन्ना टेलर के पोते के तेज बहाव में बहने की सूचना है।


बाढ़ के पानी में गिरता 2 मंजिला मकान।
ऐसे टूटा तटबंध, गांवों में तेजी से घुसा पानी
सारण में बाढ़ की स्थिति बिगड़ने के पीछे गंडक के बढ़ते जलस्तर के साथ तटबंध टूटना बड़ी वजह है। मकेर प्रखंड के बाघाकोल और हैजलपुर के पास सारण तटबंध टूटने के बाद पानी तेजी से गांवों की तरफ फैल गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि कई खेत और घर इसकी चपेट में आ गए।
हैजलपुर में पानी के तेज बहाव में दो मंजिला मकान के ढहकर पानी में समा जाने की सूचना है। यह मकान सुनील सिंह है।
पानापुर में भी टूटा सारण मुख्य तटबंध
पानापुर प्रखंड के सरौजा भगवानपुर के पास गुरुवार सुबह सारण मुख्य तटबंध टूट गया। इसके बाद गंडक का पानी तेजी से निचले इलाकों की तरफ फैलने लगा। सतजोड़ा के पास तटबंध टूटने के बाद गांवों और खेतों में पानी पहुंच गया। इससे पानापुर के साथ तरैया क्षेत्र में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
तटबंध टूटने की सूचना के बाद प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और राहत और बचाव कार्य शुरू किया। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई।
एनएच-722 पर पानी की तेज धार, रास्ता बंद
मकेर अस्पताल चौक के पास छपरा-मुजफ्फरपुर एनएच-722 पर बाढ़ का पानी सड़क के ऊपर से बह रहा है। इस सड़क से मुजफ्फरपुर समेत कई इलाकों के लिए आवागमन होता है। पानी का बहाव तेज होने के कारण गाड़ी ड्राइवरों में भी डर है।
ग्राउंड पर स्थिति यह है कि सड़क और आसपास के इलाके के बीच अंतर करना मुश्किल हो गया है। कई जगह पानी कई फीट तक जमा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है। प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए आवागमन रोक दिया है।

पिलर के ऊपरी हिस्से तक पानी आ गया है।
33 गांवों में बाढ़ का असर, 50 हजार आबादी संकट में
मकेर और अमनौर प्रखंड के 33 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें मकेर के 22 और अमनौर के 11 गांव शामिल हैं। इन दोनों प्रखंडों में करीब 50 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित है। प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, 48 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं और करीब 1.50 लाख आबादी पर असर पड़ रहा है। 24 हजार परिवार और 48 हजार घर प्रभावित हैं। पानी के फैलाव के साथ लोग सुरक्षित ठिकानों की ओर जाने लगे हैं।
छतों पर फंसे लोगों को नाव का इंतजार
बाढ़ प्रभावित इलाकों में कई परिवारों के घर पूरी तरह पानी में घिर गए हैं। विजय सिंह ने बताया कि कई लोग सुबह से प्रशासन को सूचना दे रहे हैं। बार-बार जल्द नाव भेजने की बात कही जा रही थी, लेकिन नाव पहुंचने में देरी हुई। उन्होंने प्रशासन से तत्काल नाव भेजकर लोगों को निकालने की मांग की।
वहीं, अजय कुमार राम ने कहा कि सिर्फ लोगों के नाम लिखकर सीमित संख्या में नाव भेजने से सभी लोगों को समय पर मदद नहीं मिल पाएगी। हमलोग प्रभावित गांवों में ज्यादा नाव और एनडीआरएफ की टीम भेजने की मांग कर रहे हैं।
मेरी बहन, बहनोई और भगना चंदला गांव में फंसे हैं।

तेंदुआ को ट्रैंकुलाइज कर पटना भेजा गया।

बाढ़ से परेशान लोग बांस लेकर जाते हुए। सड़क पर बनाएंगे ठहरने के लिए घर।
राहत शिविरों में भोजन, 14 कम्युनिटी किचन चालू
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 14 कम्युनिटी किचन संचालित किए जा रहे हैं। मकेर बाजार में दो राहत शिविरों में भोजन की व्यवस्था की गई है। यहां पूरी, चावल, दाल और सब्जी उपलब्ध कराई जा रही है।
हालांकि, चंदपुरा निवासी रामनाथ का कहना है कि मेरे रिश्तेदार बाढ़ में फंसे हैं और मुझे घर से खाना बनाकर देना पड़ रहा है। प्रशासन क्षेत्र में हैं, लेकिन मेरे परिवार को अभी तक राशन नहीं मिला है।
ग्रामीणों ने प्रभावित इलाकों में बचाव दल की संख्या बढ़ाने, पर्याप्त नाव उपलब्ध कराने, राहत सामग्री पहुंचाने और आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
