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पाकिस्तान ने बांग्लादेश की मदद रोकी:न्यूक्लियर फ्यूल लेकर जा रही रूसी फ्लाइट को एयरस्पेस नहीं दिया, सबसे बड़ी बिजली संकट से जूझ रहा देश




पाकिस्तान ने बांग्लादेश के लिए न्यूक्लियर फ्यूल लेकर जा रही रूसी फ्लाइट को अपने एयरस्पेस से गुजरने की मंजूरी नहीं दी। यह उड़ान 24 सितंबर को ढाका पहुंचने वाली थी, लेकिन अब फ्यूल की डिलीवरी टल गई है। यह फ्यूल बांग्लादेश के रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए भेजा जा रहा था। इसका इस्तेमाल प्लांट में बिजली उत्पादन के लिए किया जाना है। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब बांग्लादेश गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है। कई गांवों में रोज 10 से 16 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। फ्यूल समय पर नहीं पहुंचने से बिजली उत्पादन शुरू होने में देरी हो सकती है। इससे देश की ऊर्जा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। आखिरी वक्त में नहीं मिली मंजूरी रूस की सरकारी न्यूक्लियर कंपनी रोसाटॉम बांग्लादेश की रूपपुर प्लांट बना रही है और न्यूक्लियर फ्यूल की सप्लाई भी वही कर रही है। प्लांट की यूनिट-2 के लिए फ्यूल की पहली खेप लेकर रूसी फ्लाइट को अजरबैजान, कजाकिस्तान, पाकिस्तान और भारत के रास्ते ढाका पहुंचना था। एयरपोर्ट पर फ्यूल उतारने की सभी तैयारियां पूरी थीं। तभी बांग्लादेशी अधिकारियों को बताया गया कि रूस को पाकिस्तानी एयरस्पेस इस्तेमाल करने की मंजूरी नहीं मिली है। बांग्लादेश के विज्ञान और तकनीक मंत्री फकीर महबूब अनाम ने कहा कि पाकिस्तान ने मंजूरी न देने की सही वजह नहीं बताई है। अक्टूबर से दूसरे रास्ते से आएगा फ्यूल द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, अब रोसाटॉम ने फ्यूल की डिलीवरी के लिए दूसरा रास्ता तय किया है। सप्लाई अक्टूबर से दोबारा शुरू होगी। रोसाटॉम ने कहा है कि बाकी फ्यूल दिसंबर तक 7 अलग-अलग कार्गो फ्लाइट्स से बांग्लादेश पहुंचाया जाएगा। कंपनी ने यह भी कहा है कि डिलीवरी में हुई देरी से रूपपुर प्लांट के पूरे शेड्यूल पर असर नहीं पड़ेगा। पाकिस्तान के ढाका में हाई कमीशन ने इस मामले को तकनीकी और प्रक्रिया से जुड़ी दिक्कत बताया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ अपने रिश्तों को काफी अहमियत देता है और इस घटना को इसी तकनीकी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। 2 साल पहले ही लेट है रूपपुर प्लांट रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट बांग्लादेश में बिजली की सप्लाई बढ़ाने की बड़ी योजना का हिस्सा है। इसका काम कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से करीब 2 साल पीछे हो चुका है। अप्रैल में प्लांट की यूनिट-1 में न्यूक्लियर फ्यूल डालने का काम शुरू हुआ था। इसके बाद अगस्त में प्लांट की अंतिम टेस्टिंग शुरू हुई। अक्टूबर में यूनिट-1 से करीब 300 मेगावाट बिजली ट्रायल के तौर पर नेशनल ग्रिड में भेजने की तैयारी है। दिसंबर में कमर्शियल बिजली उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। ऐसा होने पर बांग्लादेश न्यूक्लियर पावर पैदा करने वाला दुनिया का 33वां देश बन जाएगा। गैस की कमी और आयात ने बांग्लादेश की परेशानी बढ़ाई बांग्लादेश की बिजली व्यवस्था लंबे समय से प्राकृतिक गैस पर निर्भर है। देश अपनी जरूरत की गैस का एक बड़ा हिस्सा बाहर से महंगे दामों पर खरीदता है। ईरान युद्ध के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से गैस की सप्लाई पर भी असर पड़ा है। दुनिया की करीब पांचवीं ऊर्जा सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है। इसके बंद होने से बांग्लादेश जैसे ऊर्जा आयात करने वाले देशों की परेशानी और बढ़ गई है। इस बिजली संकट का असर बांग्लादेश की फैक्ट्रियों पर भी पड़ा है। गारमेंट, फूड, सिरेमिक और फार्मास्युटिकल कंपनियों को उत्पादन कम करना पड़ा है। अस्पतालों में भी बिजली कटौती के दौरान नर्सों को मरीजों की देखभाल के लिए टॉर्च का इस्तेमाल करना पड़ा। ऐसे में बांग्लादेश के लिए रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट को जल्द शुरू करना अहम है। इससे देश में बिजली की सप्लाई बढ़ सकती है और बाहर से खरीदी जाने वाली ऊर्जा पर निर्भरता कम हो सकती है। ——————— यह खबर भी पढ़ें… PoK के लोग बोले- हमें भारत का रास्ता दो, तारबंदी हटाओ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आजादी की आवाजें तेज हो गई हैं। LoC (नियंत्रण रेखा) से लगभग 7 किमी दूर मंधोल में 25 हजार लोग इसके लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि हम भारत से मिलना चाहते हैं। पूरी खबर पढ़ें…



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