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राष्ट्रीय लोक अदालत में 2500 वादों का निपटारा:3 करोड़ का समझौता भी हुआ, न्यायिक पदाधिकारी और अधिवक्ता सम्मानित




जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) की ओर से 12 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में भूमिका निभाने वाले न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं, अभियोजन और पुलिस पदाधिकारियों को बुधवार को सम्मानित किया गया। व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित सम्मान समारोह का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह सहित अन्य न्यायिक पदाधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत-राष्ट्रगान से हुई। समारोह को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन सिंह ने कहा कि लोक अदालत न्याय का महापर्व है। 12 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में लगभग 2500 वादों का निष्पादन किया गया और करीब तीन करोड़ रुपये का समझौता कराया गया। न्यायालयों में मुकदमों का बोझ कम किया जा सकता उन्होंने कहा कि लोक अदालत की सफलता में अधिवक्ताओं का योगदान महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनका पक्षकारों से सीधा संवाद रहता है। उनके सक्रिय सहयोग के बिना इतनी बड़ी संख्या में मामलों का निष्पादन संभव नहीं था। प्रधान जिला जज ने डालसा की सचिव तान्या पटेल के कार्यों की भी सराहना की और विश्वास जताया कि औरंगाबाद आने वाले समय में राज्यभर में बेहतर प्रदर्शन करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। उन्होंने थाना और अंचल स्तर पर विवादों के प्राथमिक समाधान पर भी जोर दिया। विशेष रूप से अंचल अधिकारियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि छोटे विवादों का समाधान प्रारंभिक स्तर पर होने से न्यायालयों में मुकदमों का बोझ कम किया जा सकता है। अधिवक्ता मंटू सिंह समेत कई को प्रशस्ति पत्र पारिवारिक विवादों से जुड़े कुल 50 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण कराया गया। इन मामलों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधिवक्ता राणा सरोज कुमार उर्फ मंटू सिंह को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन सिंह और परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश अरुण कुमार ने संयुक्त रूप से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इसके अलावा पैनल अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही सहित कई अन्य अधिवक्ताओं को भी उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि पारिवारिक विवादों का समाधान केवल कानूनी प्रक्रिया पूरी करना नहीं है, बल्कि इससे परिवारों और रिश्तों को टूटने से बचाने का अवसर भी मिलता है। सम्मान समारोह में परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश अरुण कुमार, डीडीसी कुमारी अनुपम सिंह, जिले के न्यायिक दंडाधिकारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, पुलिस पदाधिकारी और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कर्मी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।



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