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हृदय-रोग से जूझ रहे 3 बच्चों को मिलेगा मुफ्त इलाज:अररिया से पटना तक एंबुलेंस, फिर अहमदाबाद की फ्लाइट; ऑपरेशन का खर्च भी सरकार उठाएगी




राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत जिले के तीन हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को बेहतर इलाज और आवश्यक शल्य चिकित्सा के लिए सोमवार को अहमदाबाद स्थित सत्य साईं अस्पताल रवाना किया गया। जिला पदाधिकारी विनोद दूहन ने बच्चों और उनके परिजनों को रवाना किया। तीनों बच्चों के इलाज से लेकर आवश्यक जांच और ऑपरेशन तक का पूरा खर्च बिहार सरकार की ओर से उठाया जाएगा। बच्चों को इलाज के लिए किसी तरह का आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। रवाना किए गए तीन बच्चों में दो नरपतगंज प्रखंड और एक रानीगंज प्रखंड का है। स्वास्थ्य विभाग की जांच और रेफरल प्रक्रिया के दौरान इन बच्चों में हृदय संबंधी बीमारी की पहचान की गई थी। इसके बाद विशेषज्ञ उपचार के लिए उन्हें अहमदाबाद रेफर किया गया। अररिया से पटना तक एंबुलेंस, फिर अहमदाबाद की फ्लाइट बच्चों और उनके परिजनों की सुविधा को देखते हुए प्रशासन की ओर से अररिया से पटना तक निशुल्क एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। पटना पहुंचने के बाद बच्चों को अहमदाबाद तक निशुल्क हवाई यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन का कहना है कि इलाज की पूरी प्रक्रिया में परिवारों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसका ध्यान रखा जा रहा है। अहमदाबाद पहुंचने के बाद अस्पताल में बच्चों के उपचार के साथ उनके परिजनों के रहने और भोजन की व्यवस्था भी निशुल्क होगी। यानी घर से अस्पताल तक पहुंचने, विशेषज्ञ चिकित्सकों से जांच कराने और ऑपरेशन तक की पूरी प्रक्रिया में परिवार को आर्थिक खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। जांच से ऑपरेशन तक का खर्च योजना के तहत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों में जन्मजात और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान कर उन्हें उचित उपचार उपलब्ध कराया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत जिले में बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। जांच के दौरान गंभीर बीमारी या ऐसी स्वास्थ्य समस्या सामने आने पर बच्चों को बेहतर चिकित्सा सुविधा वाले अस्पतालों में रेफर किया जाता है। इन तीन बच्चों के मामले में भी हृदय संबंधी बीमारी की पहचान के बाद विशेषज्ञ उपचार की जरूरत महसूस हुई। इसके बाद उन्हें अहमदाबाद के सत्य साईं अस्पताल भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई। अहमदाबाद में बच्चों की जरूरी जांच, चिकित्सकीय उपचार और आवश्यकता पड़ने पर शल्य चिकित्सा का खर्च RBSK योजना के तहत वहन किया जाएगा। इलाज के दौरान चिकित्सकों की सलाह के अनुसार आगे की चिकित्सा प्रक्रिया भी पूरी कराई जाएगी। डीएम बोले- आर्थिक तंगी इलाज में बाधा नहीं बने बच्चों को रवाना करते हुए जिला पदाधिकारी विनोद दूहन ने कहा कि आर्थिक तंगी किसी भी बच्चे के इलाज में बाधा नहीं बननी चाहिए। प्रशासन का प्रयास है कि जरूरतमंद बच्चों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में जन्मजात और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान कर समय पर उनका उपचार कराना है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। डीएम ने कहा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से बच्चों को इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इलाज और ऑपरेशन के दौरान भी जरूरत के अनुसार सहयोग और समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा। जिले में लगातार हो रही बच्चों की स्क्रीनिंग RBSK के तहत जिले में बच्चों की स्वास्थ्य जांच और रेफरल की प्रक्रिया लगातार चल रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें बच्चों की जांच करती हैं और गंभीर बीमारी या ऐसी स्वास्थ्य समस्या सामने आने पर उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। इस कार्यक्रम के तहत जन्मजात हृदय रोग समेत कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान पर बच्चों को विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसका सबसे बड़ा फायदा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मिलता है, जिन्हें महंगे इलाज और ऑपरेशन का खर्च उठाना मुश्किल होता है। इलाज के साथ परिवार का आर्थिक बोझ भी होगा कम हृदय रोग का इलाज और ऑपरेशन कई परिवारों के लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। जांच, विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह, अस्पताल में भर्ती और सर्जरी के खर्च के कारण परिवार पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ सकता है। ऐसे में RBSK के तहत निशुल्क उपचार की सुविधा मिलने से इन परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। प्रशासन का कहना है कि बच्चों को सिर्फ अस्पताल तक पहुंचाना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि उनकी पूरी उपचार प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग देना भी सुनिश्चित किया जाएगा। इन तीन बच्चों को अहमदाबाद भेजे जाने के साथ अब विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार शुरू होगा। प्रशासन की कोशिश है कि बच्चों को समय पर जरूरी चिकित्सा सुविधा मिले और वे स्वस्थ होकर अपने घर लौट सकें।



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