बिहार में अगले चरण की राजनीति के लिए अब बड़े आयोजनों के बजाय वार्ड, बूथ, पंचायत और परिवार के स्तर पर तैयार होती दिख रही है। राज्य में 8 विधान परिषद सीटों के चुनाव और पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज है।
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इस बीच प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी वार्ड स्तर पर माइक्रो मैनेजमेंट मॉडल पर काम कर रही है। जन सुराज के ‘स्पेशल-51’ मॉडल में प्रत्येक वार्ड में 51 लोगों की टीम बनाने की बात सामने आई है, जो स्थानीय समस्याओं और लोगों से सीधे संवाद पर केंद्रित है।
इसके जवाब में भाजपा ने भी संगठन और सरकारी योजनाओं को स्थानीय स्तर तक ले जाने के लिए ‘सेवा संकल्प’ और ‘सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान’ शुरू किया है। भाजपा का मॉडल केवल संगठन के विस्तार तक सीमित नहीं है। अगले एक साल में भाजपा तकरीबन 2.67 करोड़ घरों तक पहुंचेगी। इसकी शुरुआत मोदी के बर्थडे से हुई है।
‘सेवा संकल्प’ के जरिए BJP पीके के उसी माइक्रो स्पेस में संगठन को उतारने जा रही है। 17 सितंबर से शुरू अभियान में घर-घर संपर्क, लाभार्थियों तक पहुंच, 26 केंद्रीय योजनाओं के लाभ का ऑन-द-स्पॉट पर काम करेगी।

बीजेपी प्रशांत किशोर से आगे निकलने की कोशिश क्यों कर रही है? प्रशांत किशोर की स्ट्रेटजी क्या है? भाजपा कैसे घर घर पहुंचेगी? पढ़िए रिपोर्ट…
सबसे पहले 5 पॉइंट में समझिए PK का माइक्रो मैनेजमेंट क्या है?
प्रशांत किशोर का मॉडल बड़े राजनीतिक इवेंट की बजाए संगठन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटना है। लोकल चेहरा और सीधे समस्या के समाधान की बात करने का प्लान बनाया है। वार्ड लेवल पर एक ऐसी कमेटी जो सभी की समस्याएं सुनेगी।

1. वार्ड में 51 सदस्यों की कमेटी सुनेगी समस्या
PK ने हर विधानसभा क्षेत्र में वार्ड कमेटी बनाने का फैसला किया है। उनका प्रस्ताव है कि हर वार्ड में 51 लोगों की कमेटी बनाई जाए, जिसमें स्थानीय लोग एक्टिव रहेंगे। यहां लोग अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
इसका मकसद यह है कि जनता को हर छोटी समस्या के लिए सीधे विधायक के पास न जाना पड़े। यानी इसे एक स्थायी लोकल हेल्प-डेस्क में बदलने की कोशिश है। इससे पार्टी की लोगों से कनेक्टिविटी बढ़ेगी।
2. स्थानीय समस्या का समाधान ही लोगों को जोड़ेगा
जनसुराज का माइक्रो मॉडल, स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं को राजनीतिक संवाद के केंद्र में रखने पर आधारित है। शिकायत, अधिकारी से काम न होना और स्थानीय स्तर पर मदद की जरूरत जैसे मुद्दों को संगठन से जोड़ा जा रहा है।
इसका अर्थ यह है कि संपर्क सिर्फ चुनाव के समय नहीं, बल्कि रोजमर्रा की समस्या के समाधान के जरिए बनाए रखने का प्रयास है।
3. पंचायत और स्थानीय निकाय तक नेटवर्क विस्तार
जनसुराज ने पंचायत स्तर पर संगठन विस्तार का ऐलान किया है। बिहार के संभावित 13000 पंचायतों में प्रशांत किशोर चुनाव लड़ने की बात कह रहे हैं। इसके लिए वर्किंग भी शुरू कर दी गई है।
रिपोर्ट में MLC चुनाव को लेकर पंचायत स्तर के नेटवर्क के इस्तेमाल की चर्चा है। यानी विधानसभा के बाद अगला बड़ा चुनाव 8 विधान परिषद की सीटें और पंचायत चुनाव होगा।
4. लोकल चेहरा, लोकल नेटवर्क पर फोकस
प्रशांत किशोर का टारगेट है कि इस पूरे मॉडल में सबसे ज्यादा मौका लोकल लेवल के लोगों को दिया जाएगा। महत्व उस व्यक्ति को मिलेगा, जो उसी वार्ड या इलाके में लोगों के बीच मौजूद है। 51 सदस्यीय कमेटी की अवधारणा भी इसी सोच पर आधारित है।
5. अगला विस्तार पंचायत चुनावों की जमीन पर
जनसुराज की घोषणा के बाद बिहार में पंचायत चुनाव बहुत दिलचस्प होने वाला है। हर राजनीतिक दल अपने समर्थकों को चुनाव में उतारेंगे। भले ही ये चुनाव सिंबल पर नहीं होते, लेकिन पार्टी समर्थित तो होती ही है। प्रशांत किशोर ने पंचायत में संगठन विस्तार की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

अब जानें BJP का ‘सेवा संकल्प’ मॉडल
मोदी के बर्थडे से शुरू हुआ सेवा संकल्प अभियान पूरे बिहार तक पहुंचेगा। ये अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक 13 कार्यक्रमों के साथ चलेगा। इसके साथ ही ‘सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान’ मार्च 2027 तक चलेगा।
1. घर-घर पहुंचेगी भाजपा: बूथ की जगह परिवार से शुरुआत
17 सितंबर को भाजपा ने ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाया। इसके जरिए जिलों से लेकर अनुमंडल, प्रखंड, पंचायत और बूथ स्तर तक कार्यक्रम किए गए। इस अभियान में लाभार्थियों तक दीया पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई। इससे गांव-गांव और शहर में लोगों का भाव चेक किया गया कि कितने लोग अभी भी बीजेपी के आह्वान पर दीया जलाने को तैयार हैं।
2. 26 योजनाओं का रियलिटी चेक: सभी को लाभा दिलाना
‘सेवा सेतु’ इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण ऑपरेशनल हिस्सा है। सितंबर से शुरू होकर अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में प्रखंड स्तर पर शिविर लगाए जाएंगे। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी लोगों को दी जाएगी। करीब 26 प्रमुख केंद्रीय योजनाओं से जुड़े मामलों का मौके पर निपटारा भी किया जाएगा।
3. सिर्फ योजना बताना नहीं, पात्र व्यक्ति तक पहुंचना भी है
सरकारी योजनाओं का लाभ कौन ले रहा है और कौन पात्र होने के बावजूद बाहर है। इस अभियान में इसका भी पता लगाया जाएगा। पहले से मिली शिकायतों और समस्याओं से जुड़े आवेदनों के निपटारे की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य इस अभियान में सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि एग्जीक्यूशन भी दिखाई दे।
4. 26 योजनाओं का जिलेवार डेटा और फीडबैक
जिस व्यक्ति के नाम पर कोई योजना दर्ज है, उससे सीधे पूछा जा सकता है कि लाभ मिला या नहीं। कितना लाभ मिला, कब मिला और कोई पैसा तो नहीं लिया गया। BJP के अभियान का घोषित उद्देश्य योजनाओं की जानकारी और लाभ पहुंचाना है। वास्तविक लाभ की पुष्टि के लिए स्वतंत्र ग्राउंड वेरिफिकेशन जरूरी होगा।
5. पंचायत पर सबसे बड़ा फोकस दिखाई देगा
पंचायत स्तर पर स्थानीय जरूरतों के आधार पर योजनाएं चिह्नित करने का मॉडल बनाया गया है। 17 सितंबर से योजनाओं के लिए पोर्टल की शुरुआत की गई है। जिलों की पंचायत में 10 प्राथमिक योजनाएं चुनने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इनमें स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी, सड़क, नाली, पेयजल और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इन कामों को करने वाले बीजेपी कार्यकर्ताओं को ‘जनसेवक’ कहा जाएगा।
6. मंत्री और विधायक करेंगे मॉनीटरिंग
सरकार ने सभी मंत्रियों और अधिकारियों को अभियान की तैयारियों में सक्रिय कर दिया है। BJP ने ‘सेवा संकल्प’ के लिए प्रदेश स्तर पर विशेष टोली गठित की है और जिलों में जिम्मेदारियां तय की गई हैं। गांव और वार्ड स्तर पर हर सप्ताह रिपोर्ट चेक की जाएगी।

अब जानिए 2.67 करोड़ घरों तक पहुंचने का फॉर्मूला
2026 का अनुमानित हाउस होल्ड सर्वे: 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में हाउस होल्ड 1.89 करोड़ थी।
आबादी: 10.41 करोड़।
2026 प्रोजेक्टेड पॉपुलेशन: करीब 13.29 करोड़, अनुमान के मुताबिक हाउस होल्ड 2.65–2.77 करोड़ बैठता हैं।
243 विधानसभा के अनुसार औसतन 1.11 लाख हाउस होल्ड प्रति विधानसभा होगा।

