2 घंटे पहले
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आज (15 सितंबर) ऋषि पंचमी व्रत है। यह सौभाग्य बढ़ाने वाला व्रत माना गया है, पौराणिक मान्यता है कि इस तिथि पर सात ऋषियों की पूजा करने से भक्त को सौभाग्य मिलता है और जाने-अनजाने में किए गए पाप कर्मों के फल से मुक्ति मिलती है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ऋषि पंचमी कहा जाता है। इस तिथि पर सप्तऋषि कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जगदग्नि और वशिष्ठ की पूजा करने की परंपरा है।
मत्स्य अवतार से जुड़ी है सप्तऋषियों की कथा – भगवान विष्णु का पहला अवतार था मत्स्य। मत्स्य यानी मछली। उस समय धरती पर जलप्रलय आया था और भगवान के मत्स्य अवतार ने राजा मनु, सप्तऋषियों और अन्य जीवों की रक्षा की थी।
ऐसे कर सकते हैं ऋषि पंचमी व्रत
ऋषि पंचमी पर स्नान के बाद भगवान के सामने ऋषि पंचमी व्रत के साथ सप्तऋषियों की पूजा करने का संकल्प लेना चाहिए।
पूजा में मिट्टी या तांबे के कलश में जौ भरकर घर के मंदिर में रखा जाता है।
कलश के पास अष्टदल कमल बनाकर, उसके दलों में सप्तऋषियों और उनकी पत्नियों का ध्यान किया जाता है। इसके बाद सभी सप्त ऋषियों का पूजन करते हैं।
घर में पूजा नहीं कर पा रहे हैं तो किसी ऐसे मंदिर, जहां सप्तऋषियों की प्रतिमाएं हों, वहां पूजा की जा सकती है।


