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जमुई सांसद अरुण भारती के सामने लोजपा (आर) के कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी मुर्दाबाद के नारे लगाए। सर्किट हाउस परिसर में कार्यकर्ताओं ने खूब नारे लगाए। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और अरुण भारती जिंदाबाद के नारे भी लगाए गए। दरअसल, मंगलवार (8 सितंबर) को सिकंदरा के हम विधायक प्रफुल्ल मांझी ने सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उन्होंने अरुण भारती से उनके पिता का नाम पूछा था। साथ ही, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का नाम बदलकर ‘चिराग शर्मा पासवान’ कहा था। इसके बाद एनडीए के दो घटक दल लोजपा (आर) और हम के नेता आमने-सामने आ गए थे। दोनों ने एक-दूसरे पर व्यक्तिगत आरोप लगाए। ”जीतन राम मांझी से सवाल पूछना स्वाभाविक” गुरुवार को सांसद अरुण भारती ने सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सिकंदरा के विधायक प्रफुल्ल मांझी के सभी सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मैंने जीतन राम मांझी से नीति से जुड़ा सवाल पूछा था, लेकिन उनका जवाब नीति पर नहीं होकर व्यक्तिगत था। उन्होंने कहा कि जीतन राम मांझी हमेशा वर्गीकरण की मांग करते हैं। 2007 में जब दलित और महादलित का वर्गीकरण हुआ था, तब वह अनुसूचित जनजाति समाज कल्याण मंत्री थे। इसके बाद वह बिहार के मुख्यमंत्री भी बने। उनके परिवार, यानी संतोष मांझी के पास 10 साल तक समाज कल्याण मंत्रालय रहा। वर्गीकरण करने वाले उस पद पर बैठे थे, इसलिए उनसे सवाल पूछना स्वाभाविक है। ….मैं मांझी जी से यह सब पूछना चाहता हूं – सांसद अरुण भारती ने कहा कि, ‘जब आपने समाज में महादलित और दलित का वर्गीकरण किया था, तब मैंने आपसे दो सवाल पूछे थे। पहला, महादलित वर्गीकरण में जिन जातियों को आपने रखा, आप खुद मंत्री थे, तो आपको बताना होगा कि उन परिवारों को क्या लाभ मिला? शिक्षा और रोजगार में आप परिवार को कितना आगे बढ़ा सके? ’ ‘दूसरा सवाल था कि जिन जातियों को आपने इस वर्गीकरण से बाहर कर दिया, उन जातियों का क्या नुकसान किया था? उन्हें बाहर करने का क्या आधार था? मैं मांझी जी से यह सब पूछना चाहता हूं।’ ”नुकसान का भरपाई कौन करेगा” ‘चार जातियां पासी, पासवान, रजक, रविदास ने आपकी किस अधिकार का हनन किया था आपका क्या हक मारा था, आपने एक कलम से यह कहा था कि सरकारी योजना और सुविधाओं का लाभ नहीं मिलेगा।’ ‘क्या सर्वेक्षण था, क्या कमिटी का रिपोर्ट था,क्या कोई सरकारी रिपोर्ट है आपके पास। जो आपने कहा कि इन्हें इन सुविधाओं की जरूरत नहीं है।’ ‘सारा वर्गीकरण करने के बाद महान दलित को क्या फायदा हुआ,कितना आगे बढ़ा, और अगर आगे नहीं बढ़ा तो क्या यह सारा का सारा लाभ जीतन राम मांझी के घर गया।’ ‘इस बात का जवाब उनको देना है। उन्होंने वर्गीकरण को लेकर सीताराम मांझी के निर्णय को गलतबताया है। उन्होंने कहा कि खास कर पासवान समाज के लोगों को अपने लंबे समय तक बाहर रखा।’ वर्गीकरण का लाभ जीतन मांझी के परिवार को ही मिला – सांसद सांसद अरुण भारती ने कहा, ‘इस दौरान पासवान समाज को जो नुकसान हुआ उस नुकसान का भरपाई कौन करेगा। उन्होंने कहा कि, ‘आप फिर से वर्गीकरण का मांग कर रहे है।’ उन्होंने कहा कि ‘आपने वर्गीकरण बिहार में किया उससे लोगों को क्या फायदा हुआ, क्या नुकसान हुआ यह सवाल जीतराम मांझी से करते हैं।’ ‘इन सब सवालों का जवाब नहीं देकर हमारे नेता रामविलास पासवान, चिराग पासवान और उनके वंश पर सवाल उठाए गए। हमारे घर के महिलाओं पर सवाल उठाए गए।’ ‘राजनीतिक जीवन में भी नहीं है, आपके पास नीतिगत सवालों के जवाब नहीं होते हैं तो आप परिवार के लोगों, महिलाओं पर व्यक्तिगत सवाल करते हैं तो आपके पास नीतिगत सवाल का जवाब देने का आपके पास।’ उन्होंने कहा कि, ‘मेरा सवाल आज भी वही है 2007 में जब कर समाज के लोगों को बगैर उनसे पूछे हुए बगैर कोई सरकारी आंकड़ों के उन्हें सरकारी सुविधाओं से बाहर किया था, तब आपने किस आधार पर बाहर किया था।’ क्या सवाल आज दोबारा इन समाज के लोग आपसे पूछ रहे हैं। अगर जवाब नहीं है तो मुंह पर पट्टी लगाकर घर में बैठ जाइए। वर्गीकरण का लाभ जीतन मांझी के परिवार को ही मिला है।
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अरुण भारती के सामने लगे मांझी मुर्दाबाद के नारे:प्रफुल्ल मांझी के आरोपों पर सांसद ने दिया जवाब, चिराग-भारती जिंदाबाद के नारे लगे
