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मजबूत क्रेडिट स्कोर के लिए अपनाएं 5 आदतें:समय पर EMI चुकाने और कम कार्ड इस्तेमाल से सुधरेगी प्रोफाइल, बार-बार इंक्वायरी से बचें




कोई भी कर्ज लेने से पहले बैंक आपका क्रेडिट स्कोर जांचते हैं। अगर ये कमजोर हो तो लोन आसानी से नहीं मिलता। EMI या बिल चुकाना, क्रेडिट कार्ड लिमिट का इस्तेमाल और बार-बार नए लोन के लिए अप्लाई करना जैसे फैक्टर्स क्रेडिट स्कोर पर असर डालते हैं। ऐसे में अगर किसी वजह से आपका क्रेडिट स्कोर कम हो गया है तो सही आदतें बनाए रखकर इसे मजबूत किया जा सकता है। यहां हम ऐसी ही 5 आदतें बता रहे हैं… 1. समय पर चुकाएं हर EMI और बिल क्रेडिट स्कोर सुधारने के लिए सबसे जरूरी आदत हर महीने की EMI और क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर चुकाना है। देरी से किया गया पेमेंट आपकी क्रेडिट हिस्ट्री में दर्ज हो जाता है। इसलिए भुगतान की तारीख न भूलें, इसके लिए ऑटोमैटिक पेमेंट्स या रिमाइंडर्स का सहारा लें। 2. क्रेडिट कार्ड की लिमिट का सीमित इस्तेमाल क्रेडिट कार्ड की बड़ी लिमिट मिलने का मतलब यह नहीं है कि पूरी रकम खर्च कर दी जाए। आप अपनी कुल उपलब्ध लिमिट में से कितना पैसा इस्तेमाल करते हैं, इसे ‘क्रेडिट यूटिलाइजेशन’ कहा जाता है। सिबिल के अनुसार, ज्यादा क्रेडिट यूटिलाइजेशन से लेंडर्स को लगता है कि आप पूरी तरह से उधार के पैसों पर निर्भर हैं, जिससे आपका क्रेडिट प्रोफाइल कमजोर हो सकता है।
3. जरूरत होने पर ही नए क्रेडिट के लिए करें अप्लाई कैशबैक या जॉइनिंग ऑफर्स के लालच में बार-बार नए क्रेडिट कार्ड या लोन के लिए आवेदन करने से बचें। जब भी आप नए लोन या कार्ड के लिए अप्लाई करते हैं, तो लेंडर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करता है, जिसे ‘हार्ड इंक्वायरी’ कहा जाता है। एक आध इंक्वायरी से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, लेकिन कम समय में कई बार आवेदन करने से स्कोर पर असर पड़ता है। 4. पुराने क्रेडिट अकाउंट्स सोच-समझकर बंद करें सालों पुराना क्रेडिट कार्ड जिसका रीपेमेंट रिकॉर्ड अच्छा रहा हो, वह आपके क्रेडिट स्कोर के लिए फायदेमंद होता है। लंबी हिस्ट्री यह दर्शाती है कि आपने लंबे समय तक जिम्मेदारी से क्रेडिट मैनेज किया है। पुराना कार्ड बंद करने से आपकी कुल उपलब्ध क्रेडिट लिमिट घट जाती है, जिससे यूटिलाइजेशन रेश्यो बढ़ सकता है। हालांकि, अगर कार्ड पर गैर-जरूरी भारी फीस लग रही हो, तब ही उसे बंद करने पर विचार करें। 5. नियमित रूप से क्रेडिट रिपोर्ट चेक करते रहें अपनी सिबिल रिपोर्ट को नियमित रूप से चेक करते रहना चाहिए। रिपोर्ट में आपके सभी क्रेडिट अकाउंट्स, बैलेंस, पेमेंट हिस्ट्री और लेंडर्स की इंक्वायरी का ब्योरा होता है। किसी अनजान अकाउंट, गलत बकाया राशि, डुप्लीकेट एंट्री या अनधिकृत इंक्वायरी को समय रहते पकड़कर डिस्प्यूट दर्ज कराया जा सकता है। शॉर्टकट से नहीं, अनुशासन से सुधरेगा स्कोर मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल बनाने में कोई शॉर्टकट काम नहीं करता। समय पर बिल भरना, क्रेडिट कार्ड लिमिट का संतुलित इस्तेमाल, बिना जरूरत लोन के लिए अप्लाई न करना, पुराने कार्ड एक्टिव रखना और नियमित CIBIL रिपोर्ट चेक करने जैसी आदतें मिलकर ही स्कोर सुधारती हैं। नॉलेज बॉक्स: क्या होती है हार्ड और सॉफ्ट इंक्वायरी?



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