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4 मिनट पहले
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मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि पत्नी से पति के पीछे वोडाफोन के एड वाले पग डॉग की तरह चलने की उम्मीद नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि नौकरी या दूसरी वजहों से पति जहां जाए, पत्नी का हर बार उसके साथ जाना जरूरी नहीं है।
यह मामला उस कपल से जुड़ा है, जो करीब 16 साल से अलग रह रहा था। दोनों की शादी 34 साल पहले, सितंबर 1992 में हुई थी। कपल के चार बच्चे भी हैं। अभी पति की उम्र 67 साल है।
हाईकोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी के बीच काफी कड़वाहट है और दोबारा साथ आने की कोई संभावना नहीं बची है। कोर्ट ने पति को पत्नी को ₹7 लाख गुजारा भत्ता देने का भी आदेश दिया।

फैमिली कोर्ट ने कहा था- अकेले मुंबई जाना पति की गलती
पति ने अपनी तलाक याचिका में बताया था कि वह नौकरी के लिए तमिलनाडु के शिवगंगा से मुंबई चला गया था, लेकिन पत्नी उसके साथ नहीं गई।
2014 में पति ने शिवगंगा के फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दाखिल की। उसने पत्नी पर दूसरे व्यक्ति के साथ अवैध संबंध होने का आरोप लगाया। सितंबर 2021 में फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक याचिका खारिज कर दी।
कोर्ट ने कहा कि पति खुद नौकरी के लिए मुंबई गया और पत्नी को साथ नहीं ले गया, इसलिए वह अपनी ही गलती का फायदा उठाकर तलाक नहीं मांग सकता। 2021 में फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ पति ने मद्रास हाईकोर्ट में अपील की।
पति ने पत्नी पर अवैध संबंध के भी आरोप लगाए थे
पति ने अपनी तलाक याचिका में आरोप लगाया था कि पत्नी के किसी दूसरे व्यक्ति के साथ अवैध संबंध हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने अवैध संबंध के आरोप को स्वीकार नहीं किया।
जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस एमडी सुमति की बेंच ने कहा कि जिस व्यक्ति को पत्नी का प्रेमी बताया गया था, उसे मामले में पक्षकार ही नहीं बनाया गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे आरोप में प्रेमी को भी मामले में शामिल करना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर अवैध संबंध के आधार पर लगाया गया आरोप टिक नहीं सकता।
हाईकोर्ट ने माना- रिश्ते में गहरी दरार पड़ चुकी
पति-पत्नी करीब 16 सालों से अलग रह रहे थे और पत्नी की ओर से पति के पास लौटने की कोई औपचारिक कोशिश भी सामने नहीं आई। समझौते की संभावना तलाशने के लिए अदालत ने दोनों पक्षों से बातचीत की, मगर बात नहीं बन सकी।
हाई कोर्ट ने माना कि रिश्ते में गहरी दरार पड़ चुकी है और दोबारा साथ आने की संभावना नहीं बची। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का संदर्भ देते हुए कहा कि लंबे समय तक अलग रहना, वैवाहिक जीवन का खत्म हो जाना और रिश्ते का पूरी तरह टूट जाना परिस्थितियों के आधार पर मानसिक क्रूरता के दायरे में आ सकता है। इसके बाद अदालत ने तलाक की मंजूरी दे दी।
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि अगर दोनों पार्टनर कमा रहे हैं, तो घर और बच्चे की पढ़ाई का खर्च दोनों को उठाना चाहिए। कोर्ट ने यह टिप्पणी उस याचिका पर की, जिसमें एक पति ने पत्नी और नाबालिग बेटे के लिए तय मासिक गुजारा भत्ता कम करने की मांग की थी। पूरी खबर पढ़ें…

