Headlines

'एक्सपायरी दवा खा सकते हैं, कुछ नहीं होता':गोपालगंज के CS के निजी हॉस्पिटल में बच्चे को दिया एक्सपायरी मेडिसिन, परिजन ने 2 घंटे किया हंगामा




सीवान स्थित निजी सना चिल्ड्रेन हॉस्पिटल से एक बच्चे को एक्सपायरी दवा देने का मामला सामने आया है। ये हॉस्पिटल गोपालगंज के सिविल सर्जन डॉ. मो. इसराइल का है। उनसे जब एक्सपायरी दवा को लेकर सवाल पूछे गए तो सिविल सर्जन ने कहा कि एक्सपायरी दवा खाने से कुछ नहीं होता, सिर्फ उसकी “एफसीएनसी” कम हो जाती है। मामला मंगलवार को जन्मे एक बच्चे से जुड़ा है, जिसे सना चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद शुक्रवार को बच्चे को दवा लिखकर घर भेजा गया। परिजनों का आरोप है कि घर पहुंचने के बाद जब डॉक्टर की लिखी दवा बच्चे को दी गई तो वह बेचैन होने लगा। दवा की जांच करने पर परिजनों को पता चला कि वह जून 2026 में ही एक्सपायर हो चुकी थी। मेडिकल शॉप पर 2 घंटे तक हुआ हंगामा इसके बाद परिजन बच्चे और दवा को लेकर अस्पताल पहुंचे। मेडिकल शॉप पर विवाद होने लगा। इसी दौरान मामले की सूचना डायल-112 को दी गई। पुलिस के पहुंचने के बाद डॉ. मो. इसराइल भी सामने आए। एक्सपायरी दवा को लेकर सवाल करने पर डॉक्टर ने कहा कि इसे खाने से कुछ नहीं होता और एक्सपायरी दवा कोई भी खा सकता है। करीब दो घंटे तक अस्पताल में हंगामा चलता रहा। परिजनों के विरोध के बाद डॉक्टर ने मेडिकल शॉप पर मौजूद कर्मचारी की गलती बताते हुए उसे नौकरी से हटाने की बात कही। लेकिन स्थानीय लोगों का सवाल यह है कि यदि मेडिकल शॉप अस्पताल प्रबंधन के अधीन है और दवाओं की खरीद-बिक्री की जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की है, तो पूरी जिम्मेदारी सिर्फ एक कर्मचारी पर डालकर क्या जवाबदेही से बचा जा सकता है? मौके से आई तस्वीरें…. गोपालगंज की जगह सीवान में इलाज कर रहे डॉ. इसराइल गोपालगंज में सिविल सर्जन जैसे महत्वपूर्ण पद पर तैनात डॉ. मो. इसराइल सीवान में निजी नर्सिंग होम चला रहे हैं। यानी जिस अधिकारी के कंधों पर गोपालगंज की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी है, वे दूसरे जिले में निजी चिकित्सा संस्थान में सक्रिय हैं। इतना ही नहीं, मरीजों के पुर्जे पर किसी दूसरे डॉक्टर का नाम दर्ज है, जबकि इलाज डॉ. इसराइल ही करते हैं। बिहार सरकार लगातार सरकारी डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस और निजी नर्सिंग होम के संचालन को लेकर सख्ती का दावा कर रही है। ऐसे में एक जिले के सिविल सर्जन का दूसरे जिले में निजी अस्पताल चलाना सरकार की व्यवस्था पर ही सवाल खड़ा करता है। सबसे बड़ी बात एक्सपायरी दवा को लेकर दिए गए कथित बयान का है—अगर एक्सपायरी दवा वाकई नुकसानदेह नहीं है, तो दवाओं पर एक्सपायरी डेट क्यों लिखी जाती है और ऐसी दवाओं को बाजार से हटाने के नियम क्यों बनाए गए हैं? अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करता है या फिर मामला भी बाकी शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *